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मायोपिया के क्या है – लक्षण, कारण, इलाज व बचाव के तरीके ?

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Category: Hindi

मायोपिया और दृष्टिवैषम्य के लिए लेसिक सर्जरी
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Eye Specialist Hindi

मायोपिया के क्या है – लक्षण, कारण, इलाज व बचाव के तरीके ?

    September 25, 2023 11698 Views

अकसर क्या हो व्यस्क और क्या हो बच्चे सबके द्वारा मोबाइल फ़ोन और लैपटॉप की स्क्रीन पर ज्यादा समय बिताया जाता है, जिसकी वजह से उनके आँखों पर गलत प्रभाव पड़ता है, और इन उपकरणों का अधिक इस्तेमाल करने के कारण उन्हें दूर की चीजों को देखने में समस्या का सामना करना पड़ता है। वहीं इस समस्या को मायोपिया के नाम से जाना जाता है, इसके अलावा इस समस्या के क्या कारण है, इसके लक्षण किस तरह के नज़र आते है और इससे हम कैसे खुद का बचाव कर सकते है, इस संबंधी आज के लेख में बात करेंगे ;

मायोपिया के क्या कारण है ?

  • खराब जीवनशैली के कारण आपको पास की चीजों को देखने में समस्या का सामना करना पड़ता है। 
  • आँखों के बॉल की लंबाई का बढ़ना। 
  • कॉर्निया का बेहद सुडौल होना। 
  • मायोपिया अनुवांशिक कारणों में भी गिना जा सकता है। 
  • शराब और सिगरेट का सेवन करने के कारण। 
  • प्राकृतिक रौशनी में कम से कम समय बिताने के कारण। 
  • टीवी, मोबाइल या लैपटॉप के सामने अधिक समय बिताने के कारण। 
  • पढ़ते या स्क्रीन पर कुछ देखते समय आवश्यक दूरी का ध्यान न रखने के कारण आपको पास की चीजों को देखने में समस्या का सामना करना पड़ता है।

मायोपिया क्या है ?

  • मायोपिया आंखों की निकट दूरदृष्टि से जुड़ी एक समस्या है। इस स्थिति में आप दूर की वस्तुओं को स्पष्ट तरीके से नही देख पाते है, परंतु आपको पास की वस्तु स्पष्ट तौर पर दिखाई देती है। 
  • मायोपिया की उपस्थिति में आंखों के कॉर्निया का आकार बदलने लगता है और इसी के कारण हमें केवल पास की वस्तुएं ही साफ दिखाई देती है। मायोपिया किसी भी उम्र में हो सकता है, परंतु आप करेक्टीव लेंस पहनकर या फिर आंखों की सर्जरी करवाकर इस समस्या को दूर कर सकते है।
  • वहीं यह समस्या आमतौर पर 40 वर्ष की आयु के लोगों को अपनी गिरफ्त में लेती है, लेकिन आजकल के लाइफस्टाइल के कारण यह समस्या बच्चों में भी आम हो गई है। यही वजह है कि जैसे-जैसे बच्चे बड़े होते है, उनकी आंखों की स्थिति खराब होती जाती है और एक निश्चित उम्र तक पहुंचने तक वह भी मोयोपिया के शिकार हो जाते है। हालांकि कुछ लोगों का मानना है कि मायोपिया को प्राकृतिक रूप से भी ठीक किया जा सकता है, लेकिन अध्ययनों से यह पता चला है कि लोगों के द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली प्राकृतिक प्रक्रियाएं और विधियां मायोपिया पर पूरी तरह से असरदार नहीं है, लेकिन यह प्राकृतिक प्रक्रियाएं बढ़ते बच्चों में इसकी प्रगति को धीमा कर सकती है।
  • अगर आप दूर की चीजों को देखने में पूरी तरह से असमर्थ है, तो इसके लिए आपको अपने आँखों के लिए मायोपिया का इलाज करवाना चाहिए।

मायोपिया के दौरान किस तरह के लक्षण नज़र आते है ?

  • दूर की वस्तुओं का धुंधला दिखाई देना। 
  • आंखों में खिंचाव और सिरदर्द का अहसास होना। 
  • टेलीविजन, मूवी स्क्रीन या क्लास की सबसे पहली सीट पर बैठने की जरूरत महसूस करना। 
  • ठीक से देखने के लिए पलकों को बंद या आंशिक रूप से बंद करने की आवश्यकता का महसूस करना। 
  • विशेष रूप से रात में वाहन चलाते समय देखने में कठिनाई होना। जिसे नाइट मायोपिया कहा जाता है।
  • निश्चित भेंगेंपन की समस्या का सामना करना।  
  • बार-बार जरूरत से ज्यादा पलक को झपकाना। 
  • आँखों को बार-बार रगड़ना। 
  • आँखों में थकावट का अहसास होना आदि। 
  • आपकी आँखों में अगर इस तरह के लक्षण नज़र आए तो इससे बचाव के लिए आपको पंजाब में आंखों के स्पेशलिस्ट डॉक्टर का चयन करना चाहिए।

मायोपिया के कितने प्रकार है ?

मायोपिया को सामान्यतः तीन भागों में बाटा जाता है, जिनके बारे में हम निम्न में चर्चा करेंगे ; 

  • पैथोलॉजिकल (Pathological) मायोपिया :

यह आंख की अक्षीय ऊंचाई, असामान्य और अत्यधिक विकास के कारण होता है। यह 6 साल की उम्र से पहले विकसित नहीं होता है।

  • विद्यालय युग (School age) के दौरान आई मायोपिया की समस्या :

यह 6-18 वर्ष की आयु के भीतर होता है। यह देर किशोरावस्था से लेकर 20 की उम्र तक स्थिर माना जाता है।

  • वयस्क की शुरुआत (Adult-onset) में आने वाली मायोपिया की समस्या :

इस मायोपिया की शिकायत 20 से 40 वर्ष के प्रारंभिक वयस्कों में देखने को मिलती है।

मायोपिया का निदान कैसे किया जा सकता है ?

  • मायोपिया के निदान की बात करें, तो व्यस्को की इसके लिए, 40 साल की उम्र में पहली आँखों की जांच को करवाना चाहिए। 
  • 40 से 54 की उम्र के बीच हर 2 से 4 साल में फिर से आँखों की जाँच को करवाना। 
  • 55 से 64 आयु के बीच हर 1 से 3 साल के बीच आँखों की जाँच को करवाते रहना। 
  • यहां तक ​​कि शुरुआती 65 साल की उम्र में हर 1 से 2 साल में अपने आँखों के चेकउप को करवाते रहना।  
  • वहीं बच्चों और किशोरों को, 6 वर्ष की आयु में मासिक जांच को करवाना। 
  • 3 साल की उम्र में अर्ली चेकअप को करवाना। 
  • पहली बार और स्कूल के समय के दौरान हर 2 साल पहले चेकउप करवाना।

मायोपिया का इलाज कैसे किया जाता है ?

  1. मायोपिया के इलाज के लिए नॉन-सर्जिकल इलाज की बात करें, तो इसमें चश्मा और कॉन्टेक्ट लेंस का प्रयोग शामिल है। चश्मा या कॉन्टेक्ट लेंस की मदद से प्रकाश को रेटिना पर केंद्रित किया जाता है। चश्मा या कॉन्टेक्ट लेंस के निगेटिव नंबर मायोपिया की गंभीरता की ओर इशारा करते है। मायोपिया जितना गंभीर होगा, निगेटिव नंबर उतना ही अधिक होगा।
  • वहीं मायोपिया के लिए चश्में की बात करें, तो दृष्टि को साफ और तेज करने का सबसे आसान और सुरक्षित तरीका है। चश्मा में कई प्रकार के लेंस का इस्तेमाल किया जाता है। इसमें सिंगल विजन, बाई-फोकल्स और प्रोग्रेसिव मल्टी-फोकल लेंस आदि शामिल है।
  • मायोपिया के लिए कॉन्टेक्ट लेंस जोकि सीधे आँखों में लगाया जाता है। ये लेंस कई प्रकार के पदार्थों से बने होते है। इनकी डिजाइन भी अलग-अलग होती है, जिसमें मुलायम, कठोर, टोरिक और मल्टी-फोकल आदि शामिल हैं।
  • मायोपिया में चश्मा या कॉन्टेक्ट का इस्तेमाल प्रभावशाली साबित हो सकता है। लेकिन इनका इस्तेमाल करने से पहले इस बारे में अपने डॉक्टर से एक बार जरूर सलाह लें। और इनके फायदों और संभावित जोखिमों के बारे में जानकारी प्राप्त करें। फिर संतुष्टि होने के बाद ही इनका प्रयोग करें।
  1. मायोपिया के लिए सर्जिकल इलाज का सहारा लेना, और इसमें चश्मा या कॉन्टेक्ट लेंस का प्रयोग नहीं किया जाता है। ऐसे में वे सर्जरी का चुनाव करते है। सर्जरी से मायोपिया का इलाज कई तरह से किया जाता है। इसमें लेजर इन सीटू किरेटोमिल्युसिस (लेसिक), लेजर असिस्टेड सबएपिथेलियल किरेटोमिल्युसिस, फोटोरिफ्रेक्टिव केरटेक्टोमी और इंट्राऑकुलर लेंस प्रत्यारोपण शामिल है।
  • लेजर असिस्टेड सबएपिथेलियल किरेटोमिल्युसिस से भी मायोपिया का इलाज किया जा सकता है। 
  • फोटोरिफ्रेक्टिव केराटेक्टोमी से मायोपिया का इलाज करना। 
  • इंट्राऑकुलर लेंस प्रत्यारोपण से मायोपिया का इलाज करवाना। 
  • अगर मायोपिया की समस्या आपके आँखों में काफी गंभीर हो गई है, तो इससे बचाव के लिए आपको सर्जिकल इलाज की प्रक्रिया का चयन करना चाहिए। और आप चाहे तो इस सर्जरी को मित्रा आई हॉस्पिटल से भी करवा सकते है। 

निष्कर्ष :

मायोपिया की समस्या गंभीर ज्यादा न बने इसके लिए आपको इसके लक्षणों का खास ध्यान रखना चाहिए और किसी भी तरह के इलाज का चयन करने से पहले एक बार अनुभवी आँखों के डॉक्टर से जरूर सलाह लें। 

इसके अलावा अगर आप मायोपिया की समस्या से खुद का बचाव करना चाहते है, तो इसके लिए आपको चश्में या कंटेंट लेंस का सहारा लेना चाहिए।


What are the top eye care tips your ophthalmologist wants you to know?
Optometrist performing eye examination at Mitra Eye Hospital for comprehensive eye care.
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आँखों की एलर्जी के क्या है – प्रकार, लक्षण, कारण और उपचार के तरीके ?

    September 11, 2023 14136 Views

आँखों के एलर्जी की बात करें तो आज के समय में इस समस्या से हर व्यक्ति जूझ रहा है और आँखों की समस्या काफी दुखदायक मानी जाती है, तो वहीं इस तरह की एलर्जी से हम कैसे खुद का बचाव कर सकते है, इसके कारण क्या है, इसके लक्षणों को जानकर हम कैसे खुद का बचाव कर सकते है, साथ ही आप या आपका कोई करीबी इस तरह की समस्या का सामना कर रहा है तो इससे बचाव के लिए आपको लेख को अंत तक जरूर से पढ़ना चाहिए ;

आँखों में एलर्जी की समस्या क्या है ?

  • आंख में एलर्जी को एलर्जिक कंजक्टिविटीस के नाम से भी जाना जाता है। आंख में जलन पैदा करने वाले किसी भी पदार्थ के संपर्क में आने पर आंख इनके प्रति प्रतिक्रिया देने लगती है, जिसकी वजह से आंख में एलर्जी पैदा होती है। इन पदार्थों को एलर्जेंस कहा जाता है। 
  • शरीर के इनको प्रतिक्रिया देने पर एलर्जिक रिएक्शन पैदा होने लगते है। सामान्यतः इन नुकसानदायक कणों के प्रति हमारा इम्यून सिस्टम शरीर की रक्षा करता है। यह कण  वायरस और बैक्टीरिया होते है, जो बीमारी फैलाते है।
  • हालांकि, आंख में एलर्जी वाले लोगों में इम्यून सिस्टम इन एलर्जेंस के प्रति एक गलती करता है। इसकी वजह से इम्यून सिस्टम एक कैमिकल बनाता है, जो इन एलर्जेंस से लड़ता है। यहां तक कि यह नुकसानदायक होता है। इन दोनों के आपस में होने वाले रिएक्शन से कई प्रकार के जलन के लक्षण जैसे खुजली, लालिमा और वॉटरी आइज सामने आते है। 
  • कुछ लोगों में आंख में एलर्जी एग्जेमा (Eczema) और अस्थमा से जुड़ी होती है। वहीं एलर्जी को दूर करने के लिए दवा भी दी जाती है।

आँखों में एलर्जी होने पर आपको पंजाब में आंखों के स्पेशलिस्ट डॉक्टर का चयन करना चाहिए।

आँखों में एलर्जी के लक्षण क्या है ?

  • आंख में खुजली या जलन की समस्या का सामना करना। 
  • आंख का लाल या गुलाबी रंग का होना। 
  • आंखों के चारो तरफ स्केलिंगस की समस्या।  
  • आंख की पुतली में सूजन या पफी होना, विशेषकर सुबह के वक्त। 
  • एक या दोनों आंखों का प्रभावित होना। कुछ मामलों में यह लक्षण नाक बहने, कंजेशन या छींक के साथ आ सकते है।

इन लक्षणों के अलावा अगर इसके लक्षण ज्यादा गंभीर नज़र आने लगें, जैसे आपको देखने में समस्या का सामना करना पड़े, तो इससे बचाव के लिए आपको पंजाब में लेसिक सर्जरी का चयन करना चाहिए।

आँखों में एलर्जी के कारण क्या है ?

  • पराग (Pollen) के कारण।
  • रूसी के कारण। 
  • फफूंद या मोल्ड के कारण। 
  • धुंए के कारण।  
  • धूल के कारण।

आँखों में एलर्जी के इलाज क्या है ?

आँखों की एलर्जी से बचाव के लिए डॉक्टर दवाइयां लेने की सलाह देते है, जैसे ;

  • एंटीहिस्टामाइन, लोरटाडाइन (loratadine) या डिफेनहाइड्रामाइिन, बेनाड्रिल (Benadryl) दवाइयों को आँखों की एलर्जी के लिए प्रयोग किया जाता है। 
  • डिकंजेस्टेंट जैसे स्यूडोएफीड्रीन (pseudoephedrine) सुडाफेड (Sudafed) या ऑक्सीमेटाजोलाइन (oxymetazoline) एफ्रिन नेजल स्प्रे (Afrin nasal spray) स्टेरॉयड जैसे प्रेडिनोसोन (prednisone) डेल्टासोन (Deltasone) आदि सभी दवाइयां आँखों की एलर्जी के लिए डॉक्टर लेने की सलाह देते है।

दूसरा है एलर्जी शॉट्स, जैसे ;

जब दवाओं से एलर्जी के लक्षण ठीक न हो तो एलर्जी शॉट्स की सलाह दी जा सकती है। एलर्जी शॉट्स इम्यूनोथेरेपी का एक रूप होते है, जिसमें एलर्जी के कई इंजेक्शन लगाए जाते है। समय के हिसाब से इंजेक्शन में मेडिसन की मात्रा बढ़ा दी जाती है। यह एलर्जी शॉट्स बॉडी के एलर्जेन के प्रति प्रतिक्रिया करने के तरीके में बदलाव करते है।

तीसरा है आँखों का ड्रॉप ;

इसमें आंख की एलर्जी से बचाव के लिए कई प्रकार के प्रिस्क्रिप्शन और ओवर-दि-काउंटर आई ड्रॉप उपलब्ध है। आंख की एलर्जी में ओलापाटाडाइन हाइड्रोक्लोराइड वाले आई ड्रॉप की सलाह दी जाती है। यह एक ऐसा पदार्थ है जो प्रभावी रूप से एलर्जी से जुड़े हुए लक्षणों में राहत प्रदान करता है।

सुझाव :

आप चाहें तो आँखों के एलर्जी का ईलाज़ मित्रा आई हॉस्पिटल से भी करवा सकते है, वहीं इस हॉस्पिटल में आँखों से जुडी किसी भी तरह की समस्या का इलाज काफी किफायती दाम में किया जाता है, इसके अलावा खास बात इस हॉस्पिटल की ये है की यहाँ पर आधुनिक उपकरणों का प्रयोग किया जाता है इलाज के लिए। और इस हॉस्पिटल के डॉक्टरों का अनुभव भी काफी सालों का है।  

निष्कर्ष :

आँखों से जुडी किसी भी तरह की समस्या से बचाव के लिए आपको एक बार डॉक्टर से जरूर मिलना चाहिए, और किसी भी तरह के उपाय को अपनाने से पहले एक बार डॉक्टर से जरूर सलाह लें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न :

आप आंखों की एलर्जी का कारण कैसे सुनिश्चित कर सकते है ?

आँखों के एलर्जी के कारणों में सामान्य रूप से हानिकारक पदार्थों के आँखों में गिरने के कारण हो सकते है।


शुरुआती दौर में आंखों के कमजोर लक्षणों को न करे नज़रअंदाज़ !
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eye twitching- Hindi

आंख फड़कने को न जोड़े शगुन और अपशगुन से, बल्कि जानिए क्या है इसकी असलियत ?

    September 4, 2023 7752 Views

आँखों का फड़कना या आँखों में किसी भी तरह की मरोड़ की समस्या आए तो इससे बचाव के लिए आपको अपनी आँखों को और मरोड़ने से बचना चाहिए और आँखों में मरोड़ या अन्य आँखों से जुडी समस्या को हम कैसे हल कर सकते है इसके बारे में आज के लेख में चर्चा करेंगे ; 

क्या है आँखों का फड़कना ?

  • आंखों के फड़कने को मेडिकल की भाषा में मायोकिमिया (Myokymia) कहा जाता है। वहीं जब आंखों की मांसपेशियां सिकुड़ने लगती है, तो वो फड़कने लगती है। इसके कई आम कारण होते है। लेकिन ज्‍यादातर मामलों में स्‍ट्रेस, आई स्ट्रेन, नींद की कमी और एल्कोहल का अधिक सेवन होता है। 
  • इसके अलावा जिन्हें वजन संबंधी प्रॉब्लम्स होती है, उनकी आंखों पर अधिक जोर पड़ने लगता है जिसके कारण उनकी आंखें फड़कने लगती है।
  • वहीं आंखों के फड़कने को बहुत से लोग अन्धविश्वाश के साथ जोड़ते है, जोकि कही न कही उनका ये मानना गलत है। 

इसके अलावा अगर आपकी आंखें जरूरत से ज्यादा फड़क रहीं है, तो इससे बचाव के लिए आपको पंजाब में आंखों के स्पेशलिस्ट डॉक्टर का चयन जरूर करना चाहिए।

आंख फड़कने के क्या कारण हो सकते है ? 

  • तनाव को झेलने के कारण भी आपको आँखों से संबंधित समस्या का सामना करना पड़ सकता है। 
  • थकान होने के कारण भी व्यक्ति की आँखों में समस्या हो सकती है। 
  • किसी चीज को देखने में थकान का महसूस करना। 
  • कैफीन का सेवन जब हमारे द्वारा ज्यादा किया जाता है, तो भी आपको इस तरह की समस्या का सामना करना पड़ है।   
  • शराब का सेवन करने वाले भी इस तरह की समस्या का सामना कर सकते है।
  • जिन लोगों की सूखी आंखें है, उनकी आंखें भी फड़क सकती है। 
  • पोषण संबंधी समस्याएं भी आँखों पर गलत प्रभाव डाल सकती है।  
  • आँखों में किसी न किसी तरह की एलर्जी की समस्या। 

यदि आपको आँखों में दूर या पास का देखने या दृष्टि संबंधी किसी भी तरह की समस्या आ रहीं है, तो इससे बचाव के लिए आपको पंजाब में लेसिक सर्जरी का चयन डॉक्टर के कहने पर जरूर करना चाहिए।

आँखों की ऐठन को हम कैसे रोक सकते है ? 

  • कैफीन का सेवन यदि आप करते है तो उसका पूर्ण रूप से बहिष्कार करें। 
  • पर्याप्त नींद लेकर भी आप इस समस्या से खुद को आसानी से बाहर निकाल सकते है।  
  • तनाव को कम करके भी आप इससे खुद का बचाव कर सकते है। 
  • आंखों में जलन के अन्य स्रोतों को कम करें। 
  • जरूरत पड़ने पर धूप का चश्मा पहनें। 
  • बिना डॉक्टर के पूछे किसी भी तरह की दवाई का सेवन न करें।
  • दिमाग और आंखों को आराम देकर भी आप इस तरह की आँखों से खुद का बचाव कर सकते है।
  • डाइट में सुधार लाए। 
  • सामान्य सी भी आँखों से सम्बन्धित समस्या दिखने पर जल्द डॉक्टर का चयन करो।

आँखों की मरोड़ व ऐठन से बचाव के घरेलु उपाय !

  • यदि आपके आँखों में मरोड़ है, तो इसका मतलब ये है की आपकी आंखों को पोटेशियम और मैग्नीशियम की जरूरत है। और ये जरूरत केले का सेवन करने से पूरा किया जा सकता है।
  • यदि आपके द्वारा आँखों पर गर्म सिकाई की जाती है, तो भी आपको काफी फर्क महसूस होगा। 
  • गर्म पानी के छींटे मारने से भी आपकी आंखें फड़कना बंद कर देती है।  
  • गुलाब जल को ठंडा करके रुई की मदद से आँखों पर रखें, जिससे आपको काफी आराम महसूस होगा। 
  • आलू की स्लाइड्स को काट कर इनको आँखों पर रखने से भी आपको काफी आराम मिलेगा। 

आँखों के इलाज के लिए बेस्ट हॉस्पिटल !

यदि आपकी आंखे फड़कना बंद न करें और आपकी समस्या को बढ़ाते जाए तो इससे बचाव के लिए आपको मित्रा आई हॉस्पिटल का चयन करना चाहिए।  

निष्कर्ष :

आँखों की सामान्य सी भी समस्या को कृपया नज़रअंदाज़ ना करें, बल्कि समय पर किसी अनुभवी डॉक्टर का चयन जरूर करें ताकि भविष्य में चलकर आपको दृष्टि खोने की नौबत न आए।

 


In-Depth Information About Lasik Surgery
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ब्लेडलेस लेसिक सर्जरी आँखों के लिए कितना है फायदेमंद !

    August 21, 2023 7635 Views

बिना ब्लेड वाली लेसिक सर्जरी यानी ब्लेडलेस लेसिक एक प्रकार की अपवर्तक सर्जरी है, जो कॉर्निया के आकार को बदलकर आपकी दृष्टि में सुधार करती है। यह लेजर पर आधारित सर्जरी मानी जाती है, जो चीरों को बनाने के लिए स्केलपेल के बजाय फेम्टोसेकेंड लेजर का उपयोग करती है। इस सर्जरी की मदद से हम कैसे अपने आँखों से देखने में समर्थ हो पाते है, इसके बारे में चर्चा करेंगे ;

क्या है ब्लेडलेस लेसिक सर्जरी ?

  • बिना ब्लेड वाली लेसिक सर्जरी आंखों की लेजर सर्जरी का लोकप्रिय और प्रभावी प्रकार है, जिसमें आईड्रॉप या ब्लेड की जरूरत नहीं होती है। इस प्रक्रिया में सर्जन आंख का लेंस हटाने के लिए नई तकनीक का उपयोग करते है।
  • यह सर्जरी कंप्यूटर कंट्रोल लेजर की मदद से की जाती है। इससे आपके मौजूदा लेंस को तब भी हटाया जा सकता है, जब आप जाग रहे होते है और यह आपको बिना किसी निशान के साफ, बिना निशान वाली दृष्टि देती है।
  • इस लेसिक प्रक्रिया के कई अलग-अलग प्रकार है, जिनमें से प्रत्येक के अपने फायदे और जोखिम है। ऐसे ही सबसे आम प्रकार को एपिथेलियल लेसिक कहते है। प्रक्रिया में सर्जन लेजर की गर्मी से बचाने के लिए नेत्रगोलक के ऊपर त्वचा की पतली परत बनाते हैं। इसके बाद आपके मौजूदा लेंस को हटाने के लिए खास लेजर का उपयोग किया जाता है।
  • वहीं इस प्रकार की सर्जरी का उपयोग अक्सर निकटदृष्टि, दूरदृष्टि और दृष्टिवैषम्य के इलाज में किया जाता है।

अगर आप अपने आँखों की दृष्टि से दूर या पास का देखने में असमर्थ है तो इसके लिए आपको पंजाब में लेसिक सर्जरी का चयन करना चाहिए।

ब्लेडलेस लेसिक सर्जरी के कितने प्रकार है ?

  • ब्लेडलेस लेसिक सर्जरी दो प्रकार की होती है, जिनमे सब-एपिथेलियल और मेटा-लेसिक शामिल हैं। 
  • वहीं सब-एपिथेलियल लेसिक में सर्जन मौजूदा लेंस को हटाए बिना नेत्रगोलक के ऊपर त्वचा की पतली परत बनाते है। फिर वह आपके लेंस की कुछ बाहरी परतों को काटते है, ताकि रोशनी ज्यादा आसानी से जाए और अंदर के ऊतकों को खत्म कर सके।
  • मेटा-लेसिक से आपको अच्छे दृष्टि संबंधी नतीजे नहीं मिलते है। मेटा-लेसिक में मौजूदा लेंस को पूरी तरह हटाना और लेजर से बनाए गए नए लेंस का उपयोग शामिल है। ऐसे में आपको बेहतरीन नतीजे प्राप्त करने के लिए अन्य सर्जरी की जरूरत हो सकती है।

अगर आप उपरोक्त दोनों में से किसी एक सर्जरी को करवाना चाहते है तो इसके लिए आपको पंजाब में आंखों के स्पेशलिस्ट डॉक्टर का चयन करना चाहिए।

ब्लेडलेस लेसिक सर्जरी के फायदे क्या है ?

  • इस सर्जरी में जटिलताओं का जोखिम काफी कम होता है। 
  • ब्लेडलेस लेसिक का एक अन्य फायदा यह है कि इसमें मरीज़ जल्दी ठीक हो जाते है। ब्लेडलेस लेसिक के साथ आप आमतौर पर अगले दिन अपनी सामान्य गतिविधियों में वापस आ सकते है। इसके अलावा सर्जरी के तुरंत बाद आपको कुछ असुविधा और धुंधली दृष्टि हो सकती है, लेकिन यह जल्द अपने आप दूर हो जाती है।
  • पारंपरिक लेसिक की तुलना में ब्लेडलेस लेसिक ज्यादा सटीक है। ऐसा इसलिए है, क्योंकि सर्जरी के दौरान सर्जन की आंख का बेहतर नजरिया होता है। यह कम जटिलताओं और उच्च सफलता दर में मदद करता है।
  • बेहतर दृष्टि भी इस सर्जरी का चयन करने के बाद व्यक्ति को मिलती है। 

ब्लेडलेस लेसिक सर्जरी का चयन किन्हे करना चाहिए !

  • जिनकी कम से कम 18 साल की उम्र हो।
  • कम से कम दो वर्षों के लिए एक दृष्टि का बिना बदलने वाला प्रिस्क्रिप्शन लिया हो।
  • आंखों के स्वास्थ्य से संबंधित कोई अन्य गंभीर समस्या ना हो।

ब्लेडलेस लेसिक सर्जरी के जोखिम क्या है ?

  • इस सर्जरी की वजह से आपकी आंखें कई बार सूख जाती है। 
  • चकाचौंध दृष्टि का भी कई बार आपको सामना करना पड़ सकता है। 
  • कम दृष्टि की समस्या का भी आपको सामना करना पड़ सकता है। 
  • आंखों का इंफेक्शन भी कई बार आपको हो सकता है। 
  • आँखों में निशान भी पड़ सकते है।  
  • आंख का कैंसर जैसी समस्या का भी कई बार आपको सामना करना पड़ सकता है।

ब्लेडलेस लेसिक सर्जरी के लिए बेस्ट हॉस्पिटल !

  • आप इस सर्जरी को चाहें तो मित्रा आई हॉस्पिटल से भी करवा सकते है, पर इस सर्जरी के लिए अनुभवी सर्जन का ही सहारा लें।  
  • वहीं अगर आप इस सर्जरी को इस हॉस्पिटल से करवाते है तो यहाँ पर इसका इलाज आधुनिक उपकरणों की मदद से किया जाता है। 

Things-You-Should-Consider-Before-Lasik-Eye-Surgery
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Hindi LASIK surgery

आंखों के ऑपरेशन या लेसिक (LASIK) सर्जरी की क्या है पूरी लागत !

    August 5, 2023 14241 Views

लेसिक सर्जरी जोकि हमें दूर या पास का देखने में आ रहीं परेशानी से निजात दिलवाती है। वहीं लेसिक सर्जरी को लेकर अक्सर लोगों के मन में बहुत से सवाल घूमते है, जैसे ये सर्जरी क्या है और इस सर्जरी का फ़ायदा क्या है और खास बात की इस सर्जरी को करवाने में खर्चा कितना आता है। तो जानते है इन सब सवालों के जवाब आज के लेख में ;

क्या है लेसिक सर्जरी ?

  • लेसिक सर्जरी को अंग्रेजी में लेजर इन सीटू किरेटोमिल्युसिस कहा जाता है। यह एक प्रकार की सर्जिकल प्रक्रिया है जिसकी मदद से डॉक्टर आपकी आंखों से चश्मा हटाने या आंखों में होने वाली बीमारियां जैसे कि मायोपिया, हाइपरोपिया आदि को ठीक करते है।
  • वहीं आंखों को ठीक करने के लिए जब दवा, आई ड्रॉप्स(Eye Drop) या इलाज के दूसरे तरीके काम नहीं आते तो ऐसी अवस्था में आपके डॉक्टर आपको लेसिक सर्जरी करवाने का सुझाव देते है। इस सर्जरी की मदद से कॉर्निया को सही आकार दिया जाता है, ताकि रेटिना पर रोशनी पड़ने पर वह सही तरीके से काम कर सके। 
  • जो लोग चश्मे या कॉन्टैक्ट लेंस से छुटकारा पाना चाहते है, उनके लिए ये सर्जरी रामबाण है।

अगर आप भी चश्मे या कॉन्टैक्ट लेंस से छुटकारा पाना चाहते है, तो इसके लिए आपको पंजाब में लेसिक सर्जरी का चुनाव करना चाहिए।

लेसिक सर्जरी में क्या किया जाता है ?

लेसिक सर्जरी से पहले मरीज के द्वारा किया जाने वाला कार्य –

  • लेसिक सर्जरी से पहले आपको किसी भी चल रही दवाओं के बारे में अपने नेत्र चिकित्सक को सूचित करना चाहिए।
  • प्रक्रिया के दौरान किसी भी जटिलता से बचने के लिए संबंधित नेत्र विशेषज्ञ के साथ अपनी वर्तमान चिकित्सा स्थिति पर चर्चा करना महत्वपूर्ण है।
  • सर्जरी से पहले धूम्रपान या तंबाकू का सेवन ना करें।
  • अगर आपको एनेस्थीसिया से एलर्जी है तो अपने डॉक्टर को सूचित करें।
  • सर्जरी से 8 से 9 घंटे पहले कुछ भी ना खाएं-पिएं। 

सर्जरी के दौरान डॉक्टर के द्वारा किया जाने वाला कार्य –

  • इसके बाद डॉक्टर आंखों को सुन्न करने के लिए आई ड्रॉप डालते है।
  • मरीजों को आराम में मदद पहुंचाने के लिए उन्हें सीडेटिव दिया जा सकता है।
  • सर्जन आंख को खुला रखने के लिए एक ढक्कन स्पेकुलम का इस्तेमाल करते है और आंख पर एक सटीक भाग बनाने के लिए आँख पर अंगूठी रखते है।
  • फ्लैप सर्जन द्वारा खोला जाता है और फिर माइक्रोकरेटोम और रिंग को हटा दिया जाता है।
  • सर्जन कंप्यूटर नियंत्रित लेजर से हाई फ्रीक्वेंसी बीम का इस्तेमाल करता है ताकि कॉर्निया के अंदरूनी हिस्सों के छोटे हिस्से को वैपोराइज़ किया जा सके और इसे फिर से आकार दिया जा सके।
  • एक बार फिर से आकार देने के बाद, सर्जन फ्लैप को उसकी मूल स्थिति में वापस रख देते है।

इस सर्जरी को करवाने के लिए आपको पंजाब में आंखों के स्पेशलिस्ट डॉक्टर का चयन करना चाहिए।

लेसिक सर्जरी की लागत क्या है ?

  • इस सर्जरी की लागत निर्भर करती है की मरीज़ के आँखों की समस्या कितनी गहरी है। मतलब अगर आँखों की समस्या सामान्य है या निकटदृष्टिता की समस्या हो तो इसके लिए आपका खर्चा ज्यादा नहीं आएगा इस सर्जरी में।
  • नवीनतम टेक्नोलॉजी पर भी इस सर्जरी की लागत निर्भर करती है। 
  • वहीं अगर आप इस सर्जरी की लागत को ज्यादा नहीं दे सकते तो इसके लिए जरूरी है की आँखों में सामान्य सी भी समस्या आने पर आपको डॉक्टर का चयन कर लेना चाहिए। 
  • इसके अलावा काफी रिसर्च के बाद इसकी कीमत सामने आई है और वो है  15,000 से 90,000 तक लेकिन इसकी कीमत निर्भर करती है की व्यक्ति किस किस्म के सर्जरी का चयन कर रहा है।

अगर आप इस सर्जरी को अनुभवी सर्जन से किफायती दाम में करवाना चाहते है, तो इसके लिए आपको मित्रा आई हॉस्पिटल का चयन करना चाहिए।

निष्कर्ष :

आँखों में किसी भी तरह की समस्या से निजात पाने के लिए जरूरी है की इसकी देखभाल अच्छे से की जाए।


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Cataract Surgery Hindi

मोतियाबिंद के क्या है लक्षण, कारण, प्रकार व इलाज की संपूर्ण प्रक्रिया ?

    August 4, 2023 11693 Views

मोतियाबिंद में अकसर हम दूर या पास का स्पष्ट रूप से देखने में सक्षम नहीं हो पाते जिसकी वजह से हमें कम दिखाई देता है, हमें गाड़ी ड्राइव करने में समस्या आती है, या कई दफा हम दूसरे व्यक्ति के चेहरे के भावों को नहीं पढ़ पाते है, अगर आपको खुद में ऐसी समस्या नज़र आए तो समझ ले की आपके आंखों में मोतियाबिंद विकसित हो रहा है। 

मोतियाबिंद क्या है ? इसके लक्षण, कारण, प्रकार व इलाज कैसे किया जा सकता है, इसके बारे में जानना आँखों के लिए बहुत जरूरी है, तो जानते है की आखिर क्या है मोतियाबिंद की समस्या ;

क्या है मोतियाबिंद ?

  • जब आंख का प्राकृतिक लेंस अपारदर्शी हो जाये तो उसे कैटरेक्ट या मोतियाबिंद कहते है। 
  • सामान्यतः आँखों के लेंस के माध्यम से ही प्रकाश रेटिना पर प्रतिबिम्ब बनाता है, यह प्रतिबिम्ब तंत्रिका तंत्र के द्वारा मस्तिष्क पर प्रकाश पुंज के वास्तविक प्रतिबिम्ब का आभास करता है, लेकिन जब प्राकृतिक लेंस अपारदर्शी हो जाता है जिसके कारण प्रकाश रेटिना तक सही ढंग से नहीं पहुँच पाता है, अतः प्रतिबिंब धुंधला दिखाई देने लगता है। 

अगर आपको कोई भी चीज देखने में दुविधा का सामना करना पड़ रहा है, तो इसके लिए आपको पंजाब में आंखों के स्पेशलिस्ट डॉक्टर का चयन करना चाहिए।

मोतियाबिंद के कारण क्या है ?

  • उम्र का बढ़ना। 
  • डायबिटीज की समस्या। 
  • अत्यधिक मात्रा में शराब का सेवन करना। 
  • सूर्य के प्रकाश का अत्यधिक एक्सपोजर। 
  • मोतियाबिंद का पारिवारिक इतिहास। 
  • उच्च रक्तदाब। 
  • मोटापे की समस्या। 
  • आंखों में चोट का लगना या सूजन की समस्या। 
  • पहले हुई आंखों की सर्जरी। 
  • धुम्रपान का सेवन करना आदि।

मोतियाबिंद के कितने प्रकार है ?

  • मोतियाबिंद को दो भागों में बाटा गया है, जैसे- सफेद मोतिया और काला मोतिया,
  • सफेद मोतिया में उम्र बढ़ने के साथ ही ये आपके आँखों के लेंस को धुंधला कर देते है और आँखों के कुदरती लेंस के ऊपर सफ़ेद झिल्ली आजाती है, जो की आपकी दृष्टि को दिन प्रति दिन प्रभावित करती है।
  • वहीं काला मोतिया की बात करें तो ये एक खतरनाक अवस्था है जिसमे आँखों की दृष्टि समय के साथ सिमटती जाती है, और अगर समय पर इसका इलाज न कराया जाये तो ये अंधेपन के क़रीब आपको ले जा सकती है।

मोतियाबिंद के लक्षण क्या है ?

  • सूरज या दीपक का प्रकाश बहुत उज्ज्वल या चमकता हुआ प्रतीत होना।
  • रात में गाड़ी चलाते समय सामने से आने वाली हेडलाइट्स पहले की तुलना में अधिक चमकदार लगने लगेगी।
  • दोहरी दृष्टि की समस्या। 
  • रात में या कम रोशनी में देखना ज्यादा मुश्किल होता है।
  • रंग उतने चमकीले नहीं दिखाई पड़ते जितने पहले दिखते थे।

दूर या पास की चीजों को देखने में अगर आप भी असमर्थ है तो इसके लिए आपको पंजाब में लेसिक सर्जरी का चयन करना चाहिए।

मोतियाबिंद से कैसे करें खुद का बचाव ?

  • मोतियाबिंद से बचाव के लिए आपको अपने खान-पान पर पूरा ध्यान देना चाहिए और हेल्थी चीज़े खाएं ज़्यादा तर विटामिन-सी और विटामिन-आई से भरपूर चीज़े ले जैसे की पालक, गोभी, शलगम, साग, और अन्य पत्तेदार साग। 
  • स्मोकिंग से बचे, स्मोकिंग करने से अन्य बीमारियों के अलावा आँखों में मुक्त कण (फ्री रेडिकल्स) पैदा हो जाते है, जो आँखों को नुकसान पहुँचाने का काम करते है।

मोतियाबिंद का इलाज क्या है ?

  • मोतियाबिंद के इलाज के लिए ऑपरेशन ही एकमात्र विकल्प है। 
  • वहीं इस ऑपरेशन में डॉक्टर द्वारा अपारदर्शी लेंस को हटाकर मरीज़ की आँख में प्राकृतिक लेंस के स्थान पर नया कृत्रिम लेंस आरोपित किया जाता है, कृत्रिम लेंसों को इंट्रा ऑक्युलर लेंस कहते है, और इस लेंस को उसी स्थान पर लगा दिया जाता है, जहां आपका प्राकृतिक लेंस लगा होता है।
  • सर्जरी के पश्चात मरीज़ के लिए स्पष्ट देखना संभव होता है। हालांकि पढ़ने या नजर का काम करने के लिए निर्धारित नंबर का चश्मा पहनने की ज़रूरत आपको पड़ सकती है। 

अगर आप भी मोतियाबिंद की समस्या से बचाव करना चाहते है तो इसके लिए आपको मित्रा आई हॉस्पिटल से इस सर्जरी का चयन करना चाहिए।

निष्कर्ष :

आँखों में मोतियाबिंद का होना काफी खतरनाक समस्या है, इसलिए जरूरी है आप इससे बचाव के लिए डॉक्टर का चयन करें, वहीं अगर आपको डायबिटीज की समस्या है तो आपको आँखों की सर्जरी को करवाने में देर नहीं करना चाहिए। इसके अलावा आँखों के बचाव के लिए आपको उचित आहार का भी अच्छे से सेवन करना चाहिए।


क्या है मानसून आई फ्लू (Eye Flu) और इसके लक्षणों को जानकर कैसे करें खुद का बचाव !
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Eye Flu Hindi

क्या है मानसून आई फ्लू (Eye Flu) और इसके लक्षणों को जानकर कैसे करें खुद का बचाव !

    July 22, 2023 8998 Views

मानसून का मौसम तो चल ही रहा है, और ये मौसम जितना सुहावना होता है उतना ही अपने साथ कई सारी बीमारियों को भी लेकर आता है। और इन बीमारियों में सबसे पहले आई फ्लू की बीमारी निकल कर सामने आती है। इसके अलावा इस बीमारी से कैसे हम खुद का बचाव कर सकते है और इस बीमारी को जानने में इसके लक्षण कितने मददगार साबित होते है इसके बारे ने आज के आर्टिकल में चर्चा करेंगे ;

क्या है आई फ्लू (Eye Flu) की समस्या ?

  • आई फ्लू व्यक्तियों में देखी जाने वाली आम समस्याओं में से एक है। आई फ्लू को मेडिकल की टर्म में गुलाबी आँख भी कहा जाता है, जिसे नेत्रश्लेष्मलाशोथ के नाम से जाना जाता है। 
  • आई फ्लू बरसात के मौसम में होने वाली सबसे आम समस्याओं में से एक मानी जाती है। 
  • आई फ्लू की वजह से आँखों के सफ़ेद हिस्से में संक्रमण हो जाता है, वही आई फ्लू ज्यादातर सर्दी, खांसी वाले संक्रमणों की वजह से बढ़ते है।

आई फ्लू (Eye Flu) के क्या कारण है ?

  • वायरस और ये तब फैलता है जब हमारे द्वारा बारिश के मौसम में नहाया जाता है, या ज्यादा देर तक पसीने में रह कर काम किया जाता है।  
  • परेशान करने वाले पदार्थ जैसे शैम्पू, क्लोरीनयुक्त पानी में तैरना और धुआं। 
  • गोनोरिया और क्लैमाइडिया जैसे बैक्टीरिया। 
  • धूल, कॉन्टैक्ट लेंस और पराग जैसे एलर्जी कारक। 
  • वही आई फ्लू से पीड़ित व्यक्ति के कपडे पहनने से भी आपको इसका खतरा हो सकता है। 

यदि आई फ्लू की वजह से आपको कॉन्टैक्ट लेंस का ज्यादा इस्तेमाल करना पड़ रहा है, तो इससे बचाव के लिए आपको पंजाब में लेसिक सर्जरी का चयन करना चाहिए।

आई फ्लू (Eye Flu) के लक्षण क्या है ?

  • धुंधली दृष्टि या आँखों में जलन का होना। 
  • आँखों में सफ़ेद रंग के कीचड़ का बनना। 
  • आँखों का लाल होना। 
  • आँखों में सूजन की समस्या। 
  • आँखों से पानी का बहना। 
  • आँखों में दर्द का होना आदि।

यदि आई फ्लू की वजह से आपकी आँखों में इस तरह के ही लक्षण नज़र आए तो इससे बचाव के लिए आपको पंजाब में आंखों के स्पेशलिस्ट डॉक्टर का चयन करना चाहिए।

आई फ्लू होने पर क्या करना चाहिए ?

आई फ्लू होने पर निम्न बातों का ध्यान रखें ;

  • आई फ्लू के गंभीर लक्षण दिखने पर जल्द डॉक्टर का चयन करें।  
  • आई फ्लू होने पर आँखों को गुनगुने पानी से धोए। 
  • आँखों को साफ़ करने या पोछने के लिए साफ़ एवं सूती कपडे का इस्तेमाल करें।  

आई फ्लू से कैसे करें खुद का बचाव ?

  • आँखों को ज्यादा न मले। 
  • आई फ्लू होने पर ज्यादा मोबाइल न चलाए। 
  • आई फ्लू होने पर बारिश में भीगने से बचे। 
  • आँखों को ऐसी अवस्था में बार-बार छूने से बचे। 
  • और अपने आँखों को गंदे हाथों से छूने से बचे।
  • आँखों के बचाव के लिए काले चश्मे को पहने।

आँखों को आई फ्लू से बचाने के लिए बेस्ट हॉस्पिटल !

अगर मानसून या बरसात के मौसम में आपके आँखों में भी आई फ्लू की समस्या उत्पन्न हो गई है, तो इससे बचाव के लिए आपको उपरोक्त बचाव के तरीको को तो ध्यान में रखना ही और साथ में इसके लक्षण गंभीर होने पर आपको जल्द डॉक्टर का चयन करना चाहिए। इसके अलावा आँखों के इलाज के लिए आपको मित्रा आई हॉस्पिटल के अनुभवी डॉक्टरों का चयन करना चाहिए। 

निष्कर्ष :

आंख जिससे हम पूरी दुनिया की सुंदरता को देखते है इसलिए इनमे किसी तरह की समस्या अगर उत्पन्न हो जाए तो कैसे हम इससे खुद का बचाव कर सकते है, इसके बारे में हम आपको उपरोक्त बता ही चुके है। इसलिए आँखों में सामान्य सी भी समस्या दिखने पर डॉक्टर का चयन करें।


स्माइल लेजर सर्जरी आंखों के लिए कौन-सा कार्य करती है ?
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Hindi LASIK surgery

क्या है आंखों की स्माइल लेजर सर्जरी की सम्पूर्ण प्रक्रिया, फायदे और नुकसान ?

    July 20, 2023 8471 Views

आंखों के लिए लेसिक सर्जरी हो या स्माइल लेजर सर्जरी दोनों का अपनी-अपनी जगह पर खास महत्व होता है। वही स्माइल सर्जरी कैसे और किस समय लोगों के द्वारा करवाई जाती है इसके बारे में आज के आर्टिकल में बात करेंगे, तो अगर आंखों की सर्जरी करवाने के बारे में आप भी सोच रहें है तो स्माइल लेजर सर्जरी का चयन करने से पहले आर्टिकल को जरूर पढ़े ;

क्या है आंखों की स्माइल लेजर सर्जरी ?

  • स्माइल लेसिक एक अलग प्रकार की लेजर सर्जरी है, जिसमें आंखों की सतह से झुर्रियां और उम्र बढ़ने के लक्षण हटाने के लिए लेजर का उपयोग किया जाता है। सर्जन स्माइल लेसिक सर्जरी का इस्तेमाल वयस्कों और बच्चों दोनों पर कर सकते है।
  • इसके अलावा आंखों की स्माइल लेजर सर्जरी के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला लेजर बहुत छोटा होता है, जिसकी वजह से सर्जरी के दौरान या बाद में कोई दर्द नहीं होता है। 

आंखों की स्माइल लेजर सर्जरी के बारे में और विस्तार से जानने के लिए पंजाब में आंखों के स्पेशलिस्ट डॉक्टर से जरूर संपर्क करें।

स्माइल लेजर सर्जरी की प्रक्रिया क्या है ?

  • आंखों की स्माइल लेजर सर्जरी एक अन्य सर्जिकल प्रक्रिया है। इसमें सर्जन आंखों से झुर्रियों और उम्र के धब्बों को हटाने के लिए लेजर का उपयोग करते है। 
  • यह सर्जरी उन मरीजों के लिए एक लोकप्रिय विकल्प है, जो सर्जरी या लेजर उपचार जैसी आक्रामक प्रक्रियाओं के बिना अपनी उपस्थिति में सुधार लाना चाहते है। 
  • स्माइल सर्जरी की प्रक्रिया आपकी आंखों की तस्वीरों की एक श्रृंखला लेकर शुरू होती है। इन तस्वीरों के उपयोग से सर्जन आपकी आंख का त्रि-आयामी मॉडल बनाते है।
  • आमतौर पर सर्जरी के दौरान सर्जन का मार्गदर्शन करने के लिए इस मॉडल का उपयोग किया जाता है। 
  • वही इस प्रकार की लेजर सर्जरी खास उपकरणों का उपयोग करके निचली पलक और ऊपरी पलक को हटाकर शुरू होती है।

यदि आप दूर या पास की चीजों को देखने में असमर्थ है, तो इसके लिए आप पंजाब में लेसिक सर्जरी का चयन करें।

नुकसान क्या है स्माइल लेजर सर्जरी का ?

  • इस सर्जरी से आपको इंफेक्शन, नसों को नुकसान और दृष्टि हानि हो सकती है। 
  • सूखी आंखों के जोखिम का बढ़ना भी इसमें शामिल है। 
  • इस सर्जरी का एक ये भी नुकसान है की एक बार सर्जरी के बाद अगर कोई नुकसान होगा तो दोबारा सर्जरी होने पर आपको फिर से खर्चा करना पड़ सकता है।

स्माइल लेजर सर्जरी का खर्चा कितना आता है ?

  • एक वयस्क व्यक्ति के लिए स्माइल लेसिक प्रक्रिया की औसत कीमत 50,000 रुपये से लेकर 1,00,000 रुपये के बीच है। 
  • जबकि, बच्चों के लिए स्माइल लेसिक प्रक्रिया की औसत फीस लगभग 1 लाख रुपये है। 
  • यह मूल्य सीमा सर्जरी करने वाले डॉक्टर और इस्तेमाल किए गए लेजर के प्रकार पर भी निर्भर करता है।

स्माइल लेजर सर्जरी के फायदे क्या है ?

  • इस प्रकार की लेजर सर्जरी का एक मुख्य फायदा यह है कि यह बहुत कम दर्दनाक है। इसका मतलब यह है कि सर्जरी के लिए किसी सामान्य एनेस्थीसिया की जरूरत नहीं होगी। 
  • इसके अलावा आंखों की स्माइल लेजर सर्जरी उपचार के अन्य रूपों की तुलना में कम खर्चीली भी है।

आंखों की स्माइल लेजर सर्जरी के लिए बेस्ट हॉस्पिटल !

  • आप भी अगर आंखों की स्माइल लेजर सर्जरी को करवाकर आंखों की सतह के नीचे की झुर्रियां को कम करना चाहते है तो इसके लिए आप मित्रा आई हॉस्पिटल का चयन जरूर से करें।

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blurry vision Hindi

जानें आंखों में दर्द और धुंधलेपन की समस्या को नजरअंदाज करना कैसे पड़ सकता है भारी !

    July 1, 2023 12665 Views

आंखों से कम दिखना या आंखों में धुंधलेपन की समस्या काफी बीमारियों को खड़ी कर सकती है, इसके अलावा इस समस्या को नज़रअंदाज़ करने पर व्यक्ति को किस तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है इसके बारे में बात करेंगे, इसलिए इसके बारे में जानने के लिए आर्टिकल को अंत तक जरूर से पढ़े ;

आंखों में धुंधलेपन व दर्द की समस्या क्या है ?

  • दिनभर काम करने के बाद जिस तरह हमारा शरीर थक जाता है, ठीक इसी तरह हमारी आंखें भी कई बार ज्यादा थकने पर कुछ संकेत देना शुरू कर देती है, जैसे- आंखों में दर्द का होना, धुंधलापन या फिर चक्कर का आना। तो वही अगर आप इस तरह की समस्याओं को लगातार इग्नोर कर रहे हैं तो यह स्थिति खतरनाक है। 
  • हालांकि यह अधिक खतरनाक स्ट्रोक के खतरे को दूर भी कर सकता है, आंखों की रोशनी में बदलाव हो सकता है, यहां ध्यान देने वाली बात ये है कि आंखों का स्ट्रोक हमेशा सिर्फ एक आंख में ही होता है।

अगर आपको भी आंखों में धुंधलेपन की समस्या है, तो इससे निजात पाने के लिए आपको लेसिक सर्जरी पंजाब का चयन करना चाहिए।

आंखों में दर्द और धुंधलेपन की समस्या किस तरह की बीमारी को उत्पन करती है ?

  • अधिकतर मामलों में मायोपिया, हाइपरोपिया और एस्टिग्मेटिज्म के कारण आंखों में धुंधलापन की समस्या पैदा होती है। अगर आपके आंखों के धुंधलापन का कारण भी इन तीनों में कोई है तो शुरूआती इलाज के तौर पर आंखों का स्पेशलिस्ट डॉक्टर पंजाब चश्मा या कॉन्टेक्ट लेंस का इस्तेमाल करने का सुझाव देते है।
  • अगर आपको सिर में एक तरफ और कभी-कभी एक आंख के पीछे बहुत दर्द होता है तो ये माइग्रेन के लक्षण हो सकते है।

आंखों में धुंधलेपन के संकेत क्या मिलते है ?

  • उम्र बढ़ने, आंखों में चोट लगने, लेंस खराब होने और कॉर्निया या ऑप्टिक नर्व में किसी तरह की समस्या पैदा होने पर आपके देखने की क्षमता काफी प्रभावित होती है। जिसके नतीजतन, आपको वस्तुएं साफ-साफ देखने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। वही इस स्थिति को आम भाषा में दृष्टि का धुंधला होना कहा जाता है।

आंखों के इलाज के लिए बेहतरीन हॉस्पिटल ?

अगर आप चाहते है की आपको आंखों में दर्द और धुंधलेपन की समस्या से निजात मिल सके तो इससे छुटकारा पाने के लिए आपको मित्रा आई हॉस्पिटल का चयन करना चाहिए। वही आपको बता दे की इस हॉस्पिटल में तरह की आंखों की बेहतरीन सर्जरी आधुनिक उपकरणों की मदद से की जाती है ताकि व्यक्ति को आँखों से जुडी किसी भी तरह की समस्या का सामना न करना पड़े।

आंखों में धुंधलेपन की समस्या किसे सबसे ज्यादा होती है ?

  • जिन लोगों को दिल से जुड़ी कोई बीमारी होती है और वह दवा भी लेते है, लेकिन फिर भी उनमें बीमारी का खतरा सबसे अधिक होता है। 
  • वही आपकी ऑप्टिक डिस्क का आकार भी आपको इस स्थिति के लिए ज्यादा खतरे में डाल सकता है, इसके अलावा जिन लोगों के सामने अचानक धुंधलापन आ जाता है उन्हें स्वास्थ्य विशेषज्ञ को दिखाना चाहिए. साथ ही आंख की मालिश करके थक्के को हटाने के लिए चार घंटे के अंदर आंखों के स्ट्रोक का इलाज आपके द्वारा करवाया जाना चाहिए।

निष्कर्ष :

आंख अमूल्य और कीमती तौफा है व्यक्ति के लिए, तो अगर इसमें किसी भी तरह की परेशानी आ जाए तो इससे निजात पाने के लिए किसी बेहतरीन डॉक्टर का चयन समय पर जरूर से करें। 


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आंखों के नीचे सूजन को कम करने के लिए अपनाएं असरदार घरेलू उपचार !

    June 22, 2023 128223 Views

आंखों में सूजन का आना आज के समय में कोई बड़ी बात नहीं है, क्युकि बढ़ते काम और टेक्नोलॉजी का ज्यादा इस्तेमाल करने की वजह से व्यक्ति को इस समस्या का सामना करना पड़ता है। पर आपको अपनी सूजी हुई आंखों को लेकर परेशान नहीं होना है, क्युकि आज के लेख में हम आपकी सूजी हुई आंखों के लिए एक बेहतरीन घरेलू उपाय लेकर आए है, तो आप अगर चाहते है की आपको अपनी सूजी आंखों से छुटकारा मिल जाए तो इसके लिए आपको आर्टिकल के साथ अंत तक बने रहना है ; 

आंखों में सूजन की समस्या क्यों उत्पन्न होती है ?

  • आंखों के आसपास सूजन किसी बीमारी के कारण भी हो सकती है, या ये हमारे द्वारा गलत दिनचर्या का हद से ज्यादा प्रयोग करने की वजह से हो सकता है। वही आंखों में सूजन एडेमा की वजह से भी हो सकता है, और ऐसा तब होता है जब हमारे ऊतकों में तरल पदार्थ ज्यादा जमा हो जाते है। 
  • वही आमतौर पर आंखों के आसपास सूजन ज्यादा सोने और रोने की वजह से भी हो सकती है। कई बार यह सूजन अपने आप चली जाती है, लेकिन कभी-कभी इसका इलाज कराना जरुरी हो जाता है। अगर आपमें भी ये समस्या उत्पन है तो इसे ज्यादा गंभीर होने से पहले आंखों का स्पेशलिस्ट डॉक्टर पंजाब का चयन करें। 

आंखों में सूजन के कारण क्या है ?

  • आंखों में सूजन कई वजह से हो सकती है जैसे कभी-कभी एलर्जी की वजह से इस समस्या का उत्पन होना। 
  • वही आंखों में सूजन आने के अन्य कारणों की बात करें तो इसमें कंजेक्टिवाइटिस, सिंगल्स, पलकों के नीचे की ऑयल ग्रंथि का बंद हो जाना, इंफेक्शन, थायराइड आदि शामिल हैं।
  • यदि आंखों में सूजन के कारण आपकी आंखें धुंधली हो चुकी है तो इससे बचाव के लिए आपको लेसिक सर्जरी पंजाब का चयन करना चाहिए।

कौन-से घरेलू उपाय आंखों में सूजन की समस्या को कम कर सकते है?

  • आंख की सूजन को कम करने के लिए आप एंटी इंफ्लेमेटरी गुणों से युक्त टी-बैग का इस्तेमाल करें, आप टी बैग को भिगोकर आधे घंटे के लिए फ्रिज में रख दें फिर आंख पर 5 से 10 मिनट के लिए रखें. इससे सूजन कम हो सकता है। 
  • बेकिंग सोडा (baking soda) भी सूजन कम करने में काफी सहायक माना जाता है। बस इसके लिए आपको करना ये है की 1 चम्मच सोडे को आधे कप पानी में मिलाकर रूई की मदद से आंखों पर 5 से 10 मिनट के लिए रखना है। 
  • खीरा सबसे असरदार तरीका माना जाता है आंखों की सूजन (स्वैलिंग) को ठीक करने के लिए, बस इसमें आपको दो टुकड़ों को आंखों के उपर रखकर कुछ देर लेटना है। जिससे आपको काफी हद तक राहत महसूस होगा।
  • एलोवेरा भी आपके आंखों की सूजन को कम करने में काफी सहायक माना जाता है। 
  • आलू को भी आप सूजन कम करने के लिए इस्तेमाल में ला सकते है। बस आपको इसकी स्लाइस को सूती कपड़े में बांधकर आखों पर रखना है। और ऐसा करने से आपको आंखों की सूजन की समस्या से आराम मिलेगा। 
  • यदि घरेलू उपायों का असर आपकी आंखों के नीचे के सूजन को कम करने में असमर्थ है तो आंखों का बचाव करने के लिए आपको मित्रा आई हॉस्पिटल का चयन करना चाहिए। 

निष्कर्ष :

आंखों में सामान्य समस्या अगर उत्पन्न हो जाए, तो बचाव के लिए आपको समय रहते किसी अच्छे आंखों के डॉक्टर का चयन कर लेना चाहिए।


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