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रात को पूरी नींद लेने के बाद भी आखिर क्यों होती है आँखों में जलन की समस्या? डॉक्टर से जानें इसके बारे में!

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Category: Hindi

Woman experiencing eye strain at night while using a laptop in bed.
Woman with eye discomfort using a laptop at night, highlighting the importance of eye health awareness.
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रात को पूरी नींद लेने के बाद भी आखिर क्यों होती है आँखों में जलन की समस्या? डॉक्टर से जानें इसके बारे में!

    June 5, 2026 532 Views

दरअसल, हमारी आँखें हमको कई तरह के लाभ प्रदान करती हैं। यह हमारी जिंदगी का एक बहुत ही महत्वपूर्ण हिस्सा होती हैं, जो हमको किसी भी चीजों को देखने और उसको समझने के साथ साथ उसको महसूस करने में भी काफी ज्यादा सहायता प्रदान करती हैं। आम तौर पर, आँखें भगवान के द्वारा दिया गया एक बहुत ही अनमोल तोहफा हैं, जिन को संभाल कर रखना हमारी ख़ास जिम्मेदारी होनी चाहिए, विशेष कर जब कि वो हमारी जिंदगी का एक बहुत ही ख़ास हिस्सा बन चूका हो। आम तौर पर, शरीर के बाकी अंगों की तरह आंखों की देखभाल करना भी काफी ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। इन को हर चीज से बचाकर रखना काफी ज्यादा महत्वपूर्ण होता है, क्योकि अगर इन में किसी भी तरह की कोई समस्या या फिर कोई भी चीज लग जाये, तो यह बहुत जल्दी प्रभावित हो जाती हैं। जिसके कारण आंखों की रोशनी प्रभावित हो जाती है। इसके अलावा, आंखों में होने वाली समस्या न केवल व्यक्ति की जिंदगी को, बल्कि इसके रोजाना के कामों को भी बुरी तरीके से प्रभावित कर देती है। गंभीर समस्या होने पर व्यक्ति को देखने और अपने रोजमर्रा के काम करने में काफी ज्यादा दिक्कत महसूस होती है। 

दरअसल, आंखों में समस्या कई कारणों की वजह से हो सकती है, जिसमें सही खान- पान न होना, स्क्रीन टाइम ज्यादा होना, पर्याप्त मात्रा में पानी का सेवन न करना, नियमित जांच न होना और आंखों की अच्छे से देखभाल न करना शामिल होता है। आमतौर पर, इन्हीं कारणों की वजह से आंखों में चुंबन, और लालिमा शामिल है। अक्सर ही अपने यह महसूस किया होगा, कि रात के दौरान नींद पूरी करने के बाद भी आपको अगली सुबह आपको अपनी आंखों में जलन और थकान की समस्या महसूस होती है। ऐसे में, व्यक्ति के कई काम प्रभावित हो जाते हैं, क्योंकि इस दौरान पूरा दिन आम अपने शरीर में लो एनर्जी का अनुभव करते हैं। हम में से ज्यादातर लोगों में इस तरह की समस्या काफी ज्यादा आम होती है। दरअसल, अगर रात को पूरी नींद लेने के बावजूद भी आंखों में हो रही जलन ठीक होने का नाम नहीं ले रही है, तो इससे यह बिल्कुल साफ़ होता है, कि आप अपनी आंखों कि अच्छे से देखभाल नहीं कर रहे हैं। ऐसे में, कई लोगों का कहना है, कि वह अपनी आंखों की अच्छे से देखभाल करते हैं,

पर फिर भी यह समस्या उनका पीछा नहीं छोड़ रही है। इस तरह की स्थिति में, ऐसे ही बहुत से लोगों का सवाल है, कि आखिर रात के दौरान पूरी नींद लेने के बावजूद भी अगली सुबह आंखों में जलन होने के क्या कारण हो सकते हैं? दरअसल, डॉक्टर के अनुसार रात के दौरान पूरी नींद लेने के बावजूद भी अगली सुबह आंखों में जलन होने के कई कारण हो सकते हैं, जिसमें ड्राई आई सिंड्रोम, डिजिटल स्ट्रेन, आंखों में इंफेक्शन और हाइजीन का ध्यान न रखना जैसे कई कारण शामिल हो सकते हैं। ऐसे में, आपकी आंखों का विशेष ध्यान रखने की जरूरत होती है। अगर आपको अपनी आंखों में यह समस्या लगातार बढ़ती हुयी नजर आ रही है, तो आपको तुरंत अपने डॉक्टर से मिलना चाहिए। आइये इस लेख के माध्यम से इसके बारे में इस के डॉक्टर से और विस्तार से जानकारी प्राप्त करते हैं। 

नींद पूरी करने के बाद भी आंखों में होने वाली जलन के कारण!

आम तौर पर, रात के दौरान नींद पूरी करने के बाद भी आंखों में होने वाली जलन के पीछे कई कारण जिम्मेदार हो सकते हैं, जैसे 

  1. ड्राई आई सिंड्रोम होना 

दरअसल, जब किसी व्यक्ति नींद पूरी नहीं होती है, तो उन को अपनी आंखों में जलन की समस्या अनुभव होता है। ज्यादातर लोग आंखों में होने वाली जलन को नींद पूरी न होने के साथ ही जोड़कर देखते हैं। पर, जो लोग ड्राई आई सिंड्रोम की समस्या से परेशान होते हैं, उन लोगों को अक्सर ही रात की नींद पूरी होने के बाद भी आंखों में जलन की समस्या का अहसास होता है। दरअसल, इस तरह की समस्या के दौरान व्यक्ति की आंखों में पर्याप्त आंसू नहीं बन पाते हैं, जिसके कारण न केवल आंखों में नमी की कमी हो जाती है, बल्कि इसके कारण आंखों में ड्राइनेस की समस्या भी बनी रहती है। आम तौर पर, अमेरिकन एकेडमी ऑफ ऑप्थल्मोलॉजी के अनुसार, ड्राई आई के बहुत से कारण हो सकते हैं, जिसमें पर्यावरणीय कारक, दवा और आंसुओं का निर्माण कम होना जैसे कई कारण शामिल हो सकते हैं। 

  1. हाइजीन का अच्छे से ध्यान न रखना

आज के समय में हर कोई फैशन के लिए अपनी आंखों में कॉन्टैक्ट लेंस का इस्तेमाल करता है, मानो कि यह फैशन का एक हिस्सा बन चुका है। आम तौर पर, ऐसे में लोग काफी ज्यादा प्रभावशाली दिखने के लिए तरह-तरह के रंगीन कॉन्टैक्ट लेंस अपनी आंखों में लगाते हैं। दरअसल, आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि जब आप जरूरत से ज्यादा अपनी आंखों पर लेंस का इस्तेमाल करते हैं, तो इसके कारण आंखों को काफी ज्यादा नुकसान झेलना पड़ता है। ऐसे में, न केवल आंखों की कमजोरी, बल्कि थकान भी काफी ज्यादा परेशान कर देती है। इसके अलावा, आपको सुबह के वक्त उठते वक्त अपनी आंखों में जलन की समस्या का भी एहसास हो सकता है। साथ ही आंखों में ड्राइनेस भी बनी रहती है। ऐसा केवल आंखों की अच्छे से देखभाल न करने के कारण ही होता है। इस समस्या से बचें एक लिए आप अपनी आंखों का अच्छे से ध्यान रखें। 

आंखों में होने वाली ड्राइनेस से किस तरह बचा जा सकता है? 

आम तौर पर, डॉक्टर के अनुसार आप आंखों में होने वाली ड्राइनेस की समस्या से अपना बचाव करने के लिए आप निम्नलिखित उपायों को अपना सकते हैं, जैसे 

  1. रात के दौरान एक आरामदायक नींद लें। 
  2. अपना ज्यादा समय मोबाइल की स्क्रीन पर न बताएं। 
  3. रोजाना अपनी आंखों की अच्छे से देखभाल करें। 
  4. ऐसे में, ज्यादा कॉन्टैक्ट लेंस का इस्तेमाल करने से बचें। 
  5. समय -समय पर अपनी आंखों की जांच जरूर करवाएं। 
  6. केवल डॉक्टर की सलाह पर ही आई ड्राप का इस्तेमाल करें। 
  7. आंखों में जलन की समस्या होने पर अपनी आंखों पर बार-बार पानी के छींटे मारें।
  8. सोने से दो घंटे पहले ही अपनी आंखों को आराम देने के लिए स्क्रीन को अपनी आंखों से से दूर रखें। 

निष्कर्ष: आँखें शरीर का एक बहुत ही कोमल भाग होती हैं, जो हर व्यक्ति के जीवन में एक बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान को रखती हैं। आँखें व्यक्ति को कई तरह की सुविधाओं को प्रदान करती, जिसमें वह किसी भी चीज को देखने और उन को अपनी खुली आँख से महसूस करने में काफी ज्यादा मदद प्रदान करती है। हर व्यक्ति को चाहिए, कि वह अपने जीवन की सुरक्षा और सब कुछ अच्छे से और स्पष्ट रूप से देखने के लिए आंखों की अच्छे से देखभाल करें। यह शरीर के साथ साथ जीवन का भी एक महत्वपूर्ण हिस्सा होती हैं। इनमें होने वाली समस्या से व्यक्ति को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। आंखों में समस्या कई कारणों से हो सकती है, जिसमें आंखों की अच्छे से देखभाल न करना, रोजाना स्क्रीन का गलत इस्तेमाल करना, पर्याप्त मात्रा में पानी न पीना, आंखों को धूप से बचाने के लिए चश्मा न पहनना, गलत भोजन का सेवन करना, आंखों को सही आराम प्रदान न करना और समय पर आंखों की जांच न करवाना जैसे कई कारण शामिल हो सकते हैं। इसी के चलते रात को पूरी नींद करने के बावजूद भी आंखों में जलन की समस्या रहती है, जिस में इंफेक्शन, डिजिटल स्ट्रेन और ड्राई आई सिंड्रोम जैसी समस्याएं मुख्य कारण होती हैं। स्पष्ट रूप में, जब व्यक्ति अपना अधिकतर समय फोन या फिर कंप्यूटर आदि की स्क्रीन पर बीताता है, तो इससे आंखों पर नेगेटिव प्रभाव पड़ता है। जिसमें कि कुछ लोगों में ड्राई आई सिंड्रोम जैसी समस्या का खतरा काफी बढ़ जाता है, जिसके फलस्वरूप कई लोगों को नींद से उठने के बाद भी अपनी आंखों में जलन और ड्राइनेस जैसी समस्या का अनुभव होता है। जो आंखों की सेहत के लिए बिल्कुल भी ठीक नहीं होता है। अगर आप इस समस्या से अपना बचाव करना चाहते हैं, तो आप लैपटॉप और मोबाइल फोन का कम इस्तेमाल करें और ज्यादा से ज्यादा पानी और संतुलित आहार का सेवन करें। इसके अलावा आप अपने डॉक्टर से सलाह कर सकते हैं। इसके बारे में ज्यादा जानकारी प्राप्त करने के लिए और आंखों से जुड़ी किसी भी तरह की समस्या का तुरंत समाधान पाने के लिए आप आज ही मित्रा आई हॉस्पिटल एंड लेसिक लेज़र सेंटर में जाकर अपनी अपॉइंटमेंट को बुक करवा सकते हैं और इसके विशेषज्ञों से इसके बारे में महत्वपूर्ण जानकारी हासिल कर सकते हैं। 

 


Eye strain relief at MitraeyeHospital, trusted eye care with NABH accreditation.
Woman experiencing eye discomfort, seeking expert ophthalmology at MitraeyeHospital.
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क्या स्क्रीन देखने के कारण आँखों में होने वाले दर्द को कम करने के लिए इन घरेलू उपायों को अपनाना हो सकता है फायदेमंद? डॉक्टर से जानें इसके बारे में!

    June 1, 2026 525 Views

आज के समय में आंखों को सुरक्षित रखना बहुत ही ज्यादा मुश्किल सा हो गया है, क्योंकि आज के समय में ज्यादातर लोग अपना सारा काम मोबाइल और लैपटॉप के माध्यम से ही करते हैं, जिस में आंखों को काफी लंबे समय तक स्क्रीन को देखना पड़ता है। इस दौरान आंखों को सबसे ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। दरअसल, आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि दिन भर में जितना ज्यादा हमारा शरीर काम करके थक जाता है, उससे कई ज्यादा हमारी आँखें काम करके थक जाती हैं, जिसके कारण आपको अपनी आंखों में काफी ज्यादा दर्द का अभाव होता है और इसके कारण अन्य कई और समस्याएं भी काफी ज्यादा परेशान करके रख देती हैं। 

यह मानों या फिर न मानो, परन्तु आज के डिजिटल दौर में मोबाइल, लैपटॉप, टीवी और टैबलेट सभी लोगों की जिंदगी का एक बहुत ही महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है, जिसको हम स्वीकार करने से मना नहीं कर सकते हैं। इसके कारण आंखों को काफी ज्यादा तकलीफ झेलनी पड़ती है। दरअसल, दिन भर में आंखों को किसी भी तरह का कोई आराम नहीं प्राप्त हो पाता है, क्योंकि रोजाना के ऑफिस के काम में, ऑनलाइन पढ़ाई में, सोशल मीडिया या फिर शाम की बारिश में सुकून भरे गाने सुनने में हमारी आँखें व्यस्त ही रहती हैं, क्योंकि इस दौरान एक भी पल आंखों को आराम नहीं मिलता है, क्योंकि इस दौरान लगातार कई घंटों तक स्क्रीन में हम अपनी आंखों को लगाकर रखते हैं और आंखों को बिल्कुल भी आराम नहीं दे पाते हैं। दरअसल, आपकी जानकारी के लिए आपको बता दे, की जब आप कई घंटों तक लगातार अपनी आंखों को स्क्रीन देखने में व्यस्त रखते हैं, तो इसके कारण आपकी आंखों पर काफी ज्यादा दबाव पड़ता है, जिसके कारण आंखों में दर्द की समस्या पैदा होती है। इतना ही नहीं, इसके कारण आंखों में जलन, सूखापन और सब कुछ धुंधला नजर आने लग जाता है। यह समस्याएं होना स्वाभाविक है, क्योंकि आंखों द्वारा लगातार काम करने का नजीता यही होता है। 

क्या आप जानते हैं, इस तरह की स्थिति को मेडिकल भाषा में डिजिटल आई स्ट्रेन या फिर कंप्यूटर विजन सिंड्रोम के नाम से भी जाना जाता है। आम तौर पर, समय के साथ बढ़ते स्क्रीन के इस्तेमाल से आंखों में होने वाली समस्याओं की तरफ अगर महत्वपूर्ण ध्यान न दिया जाये, तो इससे आंखों को गंभीर नुकसान तो होगा ही, पर इसके साथ साथ आंखों से जुड़ी गंभीर समस्याएं भी उत्पन्न हो सकती है। जिसके कारण आंखों की रोशनी जाने का डर भी बना रह सकता है। हालांकि, ज्यादा स्क्रीन देखने के कारण आंखों को होने वाली समस्याओं और इसके कारण आंखों में होने वाले दर्द से छुटकारा पाने के लिए आप कुछ आसान घरेलू उपायों का भी इस्तेमाल कर सकते हैं, जो इन समस्याओं में काफी ज्यादा फायदेमंद साबित हो सकते हैं। इन घरेलू उपायों में आंखों की मालिश करना, 20-20-20 नियम का पालन करना, अपनी आंखों को ठंडे पानी से धोना, रोजाना पर्याप्त मात्रा में नींद लेना और अपनी आंखों की नियमित जांच करवाना जैसे कई घरेलू उपायों का इस्तेमाल शामिल है। अगर समस्या फिर भी बनी रहे तो आप तुरंत अपने डॉक्टर से मिल सकते हैं। आइये इस लेख के माध्यम से इसके बारे में इस के डॉक्टर से और विस्तार से जानकारी प्राप्त करते हैं। 

स्क्रीन देखने से आंखों में होने वाले दर्द के लक्षण!

हाल ही में हुए एक अध्ययन के अनुसार, अगर आप काफी लंबे समय तक स्क्रीन का इस्तेमाल करते हैं, तो ऐसे में आपको निम्नलिखित लक्षण महसूस हो सकते हैं, जैसे 

  1. आंखों में काफी मात्रा में दर्द महसूस होना। 
  2. आंखों में हद से ज्यादा भारीपन महसूस होना 
  3. आंखों में अक्सर ही सूखेपन की समस्या रहना। 
  4. आंखों में जलन होना। 
  5. आंखों में से पानी आना। 
  6. आंखों में दर्द के साथ साथ सिर में भी दर्द होना। 
  7. धुंधला नजर आना। 
  8. आंखों में लाल पन आना। 
  9. रोशनी से समस्या होना। 
  10. गर्दन के साथ साथ कंधों में भी दर्द होना।

स्क्रीन देखने के कारण आँखों में होने वाले दर्द को कम करने के घरेलू उपाय! 

आम तौर पर, अगर लंबे समय तक स्क्रीन देखने के कारण आपको अपनी आंखों में दर्द होता है, तो इससे राहत पाने के लिए आप कुछ घरेलू उपायों का इस्तेमाल कर सकते हैं, जैसे 

  1. ठंडे पानी से आंखों को साफ़ करना 

लंबे समय तक स्क्रीन देखने के कारण आँखों में होने वाले दर्द से राहत पाने के लिए आप ठंडे पानी से अपनी आंखों को साफ़ कर सकते हैं। ऐसा करने से न केवल आपकी आंखों को ताजगी मिलगी, बल्कि इससे आपकी आंखों की थकान भी काफी हद तक दूर हो जाएगी। इसके अलावा, आप ठंडे पानी में कपड़े को भिगोकर भी आंखों को आराम दे सकते हैं। 

  1. रोजाना एक अच्छी नींद लें 

आम तौर पर, रिसर्च के अनुसार यदि आप रोजाना सही समय पर और एक अच्छी नींद प्राप्त नहीं करते है, तो इससे आपको अपनी आंखों में दर्द का अहसास हो सकता है। इसके कारण आपकी आंखों में दर्द काफी मात्रा में बढ़ सकता है। दरअसल, जब हमारे शरीर को पर्याप्त आराम नहीं मिल पाता है, तो ऐसे में हमारी आंखों पर सबसे ज्यादा दबाव पड़ता है और आंखों में दर्द कि समादाय उतपन्न होने लग जाती है। इसलिए, अगर आप चाहते हैं, कि आंखों में दर्द की समस्या न हो तो रोजाना कम से कम 7 से 8 घंटे की नींद जरूर लें। 

  1. 20-20-20 नियम का पालन करें 

दरअसल, आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि स्क्रीन पर काफी लंबे समय तक काम करने के लिए आपको 20-20-20 नियम का पालन जरूर करना चाहिए। आम तौर पर, यह नियम न केवल आंखों को आराम प्रदान करने में काफी ज्यादा महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, बल्कि इससे ज्यादा स्क्रीन देखने के कारण होने वाले दर्द से भी काफी आराम प्राप्त होता है। इस नियम के अनुसार, आप स्क्रीन पर काम करने वक्त हर 20 मिनट बाद 20 सेकंड के लिए 20 फीट दूर किसी वस्तु को देखना है। इससे आंखों की मांसपेशियों को काफी आराम और आंखों का तनाव भी दूर हो जाता है। 

  1. गुलाब जल का उपयोग करें 

दरअसल, गुलाब जल में कई तरह के गुण पाए जाते हैं, जो न केवल त्वचा के लिए बल्कि आंखों के लिए भी काफी ज्यादा फायदेमंद साबित हो सकते हैं। आम तौर पर, आंखों को ठंडक प्रदान करने के लिए आप गुलाब जल का इस्तेमाल कर सकते हैं, यह भारतीय घरों में आंखों के लिए पारंपरिक रूप से इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे में, जब कभी भी आपको अपनी आंखों में भारीपन महसूस या फिर दर्द का अभाव होता है, तो इससे छुटकारा पाने के लिए आप कॉटन पर थोड़ा गुलाब लेकर अपनी बंद आंखों पर रखें और कुछ वक्त तक के लिए ऐसे ही रहने दें। इससे आंखों में होने वाली थकान और दर्द दोनों ही कम हो जाते हैं। ध्यान रहे, आंखों के लिए केवल प्राकृतिक गुलाब जल का इस्तेमाल ही महत्वपूर्ण होता है। केमिकल वाले गुलाब जल से सावधानी बरतें। 

निष्कर्ष: आंखों का स्वस्थ होना सम्पूर्ण स्वास्थ्य के लिए काफी ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। यह शरीर का एक बहुत ही नाजुक अंग होता है, जो किसी भी चीज से जल्दी प्रभावित होकर नजर में रुकावट पैदा कर देता है। आज के समय में ज्यादातर लोग अपने काम या फिर अन्य कार्यों को करने के लिए मोबाइल, लैपटॉप और अन्य डिजिटल स्क्रीन का काफी ज्यादा इस्तेमाल करते हैं, जिसमें सबसे ज्यादा आंखों को मेहनत करनी पड़ती है। इस दौरान न केवल हमारा शरीर, बल्कि आँखें भी काफी ज्यादा तक जाती हैं, जिसके कारण आंखों की रोशनी बुरी तरीके से प्रभावित हो जाती है। इसके कारण ही आंखों में कई तरह की समस्याएं उत्पन्न होने लग जाती हैं, जिसमें आंखों में काफी ज्यादा दर्द, जलन, सूखापन और थकान जैसी समस्याएं शामिल हैं। यह आज के समय में भाड़ आम मणि जाती हैं। क्योंकि, लोग आज ज्यादातर स्क्रीन को ही देखना पसंद करते हैं। पर, आंखों से जुड़ी इन समस्याओं को दूर करने के लिए इन से छुटकारा पाने के लिए आप काम के दौरान 20-20-20 नियम का पालन कर सकते हैं। इसके अलावा, अपनी आंखों को ठंडे पानी से धो सकते हैं, रोजाना पर्याप्त मात्रा में नींद ले सकते हैं और अपनी आंखों की नियमित जांच करवा सकते हैं। ऐसे में, आप केवल इन छोटी-छोटी बातों को अपनाकर आँखों में होने वाले दर्द से छुटकारा पा सकते हैं। ऐसे में, ध्यान रहे अगर आंखों में समस्या स्क्रीन देखने के कारण लंबे समय तक बनी हुई है, तो ऐसे में आपको बिना किसी देरी के तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए। आंखों में होने वाली इस समस्या को नजरअंदाज करना आंखों की सेहत के लिए काफी ज्यादा घातक साबित हो सकता है। इसलिए, सतर्क रहना महत्वपूर्ण होता है। अगर इस लेख में बताए गए घरेलू उपायों का इस्तेमाल करने के बावजूद भी आपकी आंखों में दर्द बना रहता है, तो ऐसे में तुरंत डॉक्टर से मिलें। इसके बारे में ज्यादा जानकारी प्राप्त करने के लिए और आंखों से जुड़ी किसी भी तरह की समस्या का तुरंत समाधान पाने के लिए आप आज ही मित्रा आई हॉस्पिटल एंड लेसिक लेज़र सेंटर में जाकर इस के विशेषज्ञों से इसके बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। 

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल!

प्रश्न 1. आंखों में जलन के क्या-क्या कारण हो सकते हैं?

दरअसल, आपकी जानकारी के लिये आपको बता दें, कि आँखों में होने वाली जलन के पीछे कई कारण जिम्मेदार हो सकते हैं। इसमें आँखों में एलर्जी की समस्या होना, आँखों में सूखापन की समस्या होना, हवा में फैला हुआ प्रदूषण, बैक्टीरियल या फिर वायरल संक्रमण होने जैसे कई कारण जिम्मेदार हो सकते हैं। इसके अलावा जी इस समस्या के कई अन्य कारण जिम्मेदार हो सकते हैं। 

प्रश्न 2. आंखों की देखभाल करना क्यों महत्वपूर्ण होता है?

आम तौर पर, आँखों की देखभाल करना हमारे सम्पूर्ण स्वास्थ्य के लिए काफी ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। दरअसल, आँखों को शरीर के सबसे संवेदनशील अंगों में से एक माना जाता है। जिसकी देखभाल करना बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि अगर इस की देखभाल अच्छे से की गई, तो हमको अपने सामान्य जीवन को जीने, दुनिया को देखने और सामान्य दैनिक गतिविधियों को करने जैसे चलने, लिखने गाड़ी चलाने में किसी भी तरह की कोई दिक्क्त का सामना नहीं करना पड़ेगा। इससे हमारी आँखें सेहतमंद बनी रहेगी। 

 


Eye doctor examining an elderly man's eye with specialized equipment at Mitra Eye Hospital.
Mitra Eye Hospital offers advanced eye care and diagnosis services for all ages.
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क्या वाकई 90 फीसदी लोगों को पता नहीं होता, कि उनको ग्लूकोमा है? डॉक्टर से जानें, आखिर किस तरह छीनती है यह बीमारी आँखों की रौशनी!

    May 25, 2026 489 Views

आज ग्लूकोमा जो दुनिया भर में, एक खतरनाक स्थिति बनकर सामने आ रहा है। यह समस्या एक बहुत ही आम बीमारी है, पर जितनी यह आम है उतनी ही ज्यादा गंभीर भी है, क्योंकि इसके कारण पीड़ित व्यक्ति अँधा भी हो सकता है। यह बीमारी पीड़ित व्यक्ति की आंखों पर एक दम से हमला नहीं करती है या फिर इसके लक्षण तभी सामने नहीं आते हैं, बल्कि यह समस्या तो धीरे-धीरे आंखों की रोशनी को नुकसान पहुंचाती है और ज्यादा समय होने पर यह अंधेपन का कारण बनती है। इसके कारण ही इस समस्या को साइलेंट विजन थीफ ने नाम से जाना जाता है। ग्लूकोमा की वजह से अंधापन हो सकता है, इसमें कोई शक नहीं। इसलिए, इस गंभीर बीमारी का वक्त पर इलाज होना बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। पर क्या आप जानते हैं, हम से ज्यादातर लोगों को ग्लूकोमा जैसी गंभीर बीमारी का पता तब चलता है, जब आंखों की रोशनी कम होने लगती है। 

दरअसल, इस पर डॉक्टर का कहना है, कि ग्लूकोमा एक बहुत ही गंभीर बीमारी है, जिसके रोगियों की संख्या में लगातार हद से ज्यादा तेजी देखी जा रही है। दरअसल, आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि हर 100 में से 10 व्यक्तियों को इस तरह की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। दरअसल, ऐसे में हैरान कर देने वाली बात यह है, कि 90 फीसदी लोगों को इसके बारे में पता ही नहीं होता है, कि उनको ग्लूकोमा की बीमारी हो चुकी है। क्योंकि, इस समस्या की शुरुआत में पीड़ित व्यक्ति को किसी भी तरह का कोई भी लक्षण महसूस नहीं होता है। इसलिए, उनको इसके बारे में ज्यादा जानकारी नहीं मिल पाती है। यह अंधे पन का कारण बन सकती है, इसलिए ग्लूकोमा की समय पर पहचान होना बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। इससे आंखों को होने वाले गंभीर नुकसान को रोका जा सकता है। 

दरअसल ग्लूकोमा जैसी गंभीर बीमारी के कारण प्रभावित हुई आँखों की रोशनी को तो वापिस नहीं लाया जा सकता, पर अगर इस समस्या की समय पर पहचान करके इलाज कर दिया जाए, तो ग्लूकोमा के कारण आंखों को होने वाले नुकसान को रोका जा सकता है। गंभीर स्थिति में आप अपने डॉक्टर से मिल सकते हैं। आइये इसके बारे में और जानते हैं। 

ग्लूकोमा पर जरूरी डाटा इस प्रकार है!

  1. दरअसल, दुनिया भर में लगभग 80 मिलियन से भी ज्यादा लोग ग्लूकोमा जैसी समस्या से पीड़ित हैं। आज भारत में भी ग्लूकोमा के रोगियों की संख्या बढ़ती नजर आ रही है। 
  2. आम तौर पर, 50 प्रतिशत लोगों को ग्लूकोमा जैसी समस्या का पता तब चलता है, जब उनकी आंखों की रोशनी पूरी तरीके से चली जाती है, मतलब कि वह अंधे हो जाते हैं। 
  3. ऐसे में, लगभग 90 प्रतिशत लोग ऐसे हैं, जिनको पता ही नहीं होता है, कि उनको ग्लूकोमा जैसी कोई गंभीर बीमारी भी है। 
  4. फीसदी लोगों को पता ही नहीं होता है कि उन्हें ग्लूकोमा की बीमारी है। उन्हें इसका पता तब चलता है जब बीमारी की वजह से अंधापन हो जाता है। दरअसल, अंधे लोगों की समस्या में ज्यादातर व्यक्ति ग्लूकोमा की वजह से अंधे होते हैं। 

आखिर किस तरह छीनता है ग्लूकोमा आंखों की रोशनी को? 

दरअसल, इस पर डॉक्टर का कहना है, कि ग्लूकोमा यानी कि काला मोतिया एक बहुत ही गंभीर बीमारी है, जो आंखों की रोशनी को पूरी तरीके से छीन लेता है और अंधे पन का कारण बनता है। इसके कारण आंखों के अंदर काफी ज्यादा दबाव बढ़ता है और ऐसे में आंखों की ऑप्टिक नर्व को काफी ज्यादा नुकसान पहुंचता है। दरअसल, आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि जब आंखों की ऑप्टिक नर्व पूरी तरीके से क्षतिग्रस्त हो जाती है, तो ऐसे में आंखों की रोशनी धीरे-धीरे कम होने लग जाती है। जिसका समय पर इलाज होना बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण होता है, नहीं तो व्यक्ति अंधेपन का शिकार हो सकता है। 

किन लोगों को ग्लूकोमा का खतरा काफी ज्यादा होता है? 

दरअसल, आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि यह बात सच है, कि कुछ लोगों में ग्लूकोमा का खतरा काफी ज्यादा होता है। इन लोगों में शामिल हो सकते हैं, जैसे कि 

  1. जो लोग ज्यादातर डायबिटीज जैसी समस्या से काफी ज्यादा पीड़ित होते हैं। 
  2. दरअसल, जिन लोगों को हाई ब्लड प्रेशर जैसी समस्या होती है, उन में ग्लूकोमा का खतरा काफी ज्यादा रहता है। 
  3. ऐसे में, जिन लोगों के चश्मे का नंबर माइनस में होता है, दरअसल उन लोगों में भी ग्लूकोमा का अधिक जोखिम बना रहता है।
  4. अगर घर में पहले से इस तरह कि बीमारी का कोई इतिहास रहा है, तो यह समस्या आपको भी परेशान कर सकती है। 
  5. जो लोग थायराइड की बीमारी से पीड़ित होते हैं, उन में भी इस समस्या का अधिक जोखिम देखा जा सकता है। 

निष्कर्ष: ग्लूकोमा एक आम पर पर एक बहुत ही गंभीर बीमारी है, जो किसी भी वर्ग के व्यक्ति को अपनी चपेट में ले सकती है। अगर इस समस्या पर वक्त रहते ध्यान न दिया जाये, तो यह आगे चलकर अंधे पन का कारण भी बन सकती है। इसलिए, इस समस्या में सतर्क रहना बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। हाँ, ऐसे में यह बात बिलकुल सच है, कि भारत में 90 फीसदी लोगों को पता नहीं होता, कि उनको ग्लूकोमा है। इसलिए, यह समस्या पीड़ित लोगों में अपना गंभीर रूप धारण कर लेती है और आंखों की रौशनी प्रभावित होने का कारण बनती है। ग्लूकोमा आंखों की रोशनी को पूरी तरीके से छीन लेता है और ऐसे में हैरानी कि बात यह है, कि ग्लूकोमा की वजह से आंखों को हुए नुकसान को पूरी तरीके से ठीक नहीं किया जा सकता है। पर अगर वक्त रहते इस समस्या को पहचान लिया जाए और समय पर इलाज कर दिया जाए, तो इससे होने वाली बीमारी को रोका जा सकता है। इसके अलावा, इसके कारण आंखों को हुए नुकसान से भी बचा जा सकता है। ऐसे में, जो व्यक्ति हाई बीपी कि समस्या से पीड़ित होते हैं, दरअसल उन रोगियों में ग्लूकोमा जैसी गंभीर बीमारी का खतरा काफी ज्यादा रहता है। समस्या के बारे में पता लगने पर या फिर स्थिति गंभीर होने पर आपको तुरंत अपने डॉक्टर से मिलना चाहिए। इसके बारे में ज्यादा जानकारी प्राप्त करने के लिए और आंखों से जुड़ी कोई भी गंभीर समस्या महसूस होने पर आज तुरंत मित्रा आई हॉस्पिटल एंड लेसिक लेज़र सेंटर के विशेषज्ञों के साथ संपर्क कर सकते हैं। 

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल 

प्रश्न 1. काला मोतियाबिंद के क्या -क्या लक्षण हो सकते हैं?

दरअसल, काला मोतियाबिंद न केवल आंखों की एक गंभीर बीमारी है, बल्कि यह नजर का एक खामोश चोर भी होता है। इसके पीछे का कारण, इस समस्या की शुरुआत में किसी भी लक्षण का न दिखना है। इसलिए, लोग इस समस्या को जल्दी पहचान नहीं पाते हैं और इस समस्या से गंभीर रूप से प्रभावित हो जाते हैं। ऐसे में इसके विशेष लक्षणों में धीरे-धीरे साइड नज़र का कम हो जाना, लाइट के चारों ओर घेरे का महसूस होना धुंधला दिखाई देना, काफी तेज सिर में दर्द होना, आंखों में तेज दर्द का अहसास होना, उल्टी आना और जी मिचलाना जैसे कई लक्षण शामिल हो सकते हैं। 

प्रश्न 2. क्या छोटे बच्चों को भी काला मोतियाबिंद हो सकता है?

दरअसल, हाँ इस समस्या से न केवल छोटे बच्चे बल्कि नवजात शिशु भी बुरी तरीके से प्रभावित हो सकते हैं। जिस को आम तौर पर, कन्जेनिटल ग्लूकोमा के नाम से जाना जाता है। 

प्रश्न 3. क्या सच में काला मोतियाबिंद से आंखों की रोशनी जा सकती है?

दरअसल, हाँ अगर वक्त रहते काला मोतियाबिंद जैसी गंभीर समस्या पर ध्यान न दिया गया, तो इसके कारण स्थायी रूप से आंखों की रोशनी प्रभावित हो सकती है।


Close-up of a woman using eye drops for eye health treatment.
Eye health treatment at Mitra Eye Hospital, ensuring optimal eye care and vision improvement.
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आंखों के लेंस की देखभाल के लिए किन सावधानियों को बरतना होता है सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण? डॉक्टर से जानें इसके बारे में!

    May 19, 2026 487 Views

दरअसल, आज के समय में ज्यादातर लोग अपनी आंखों को सेहतमंद रखने के लिए न जाने कितने ही उपायों का इस्तेमाल करते हैं और कई लोग तो आंखों की तरफ ध्यान ही नहीं देते हैं, जिससे कि उनको आंखों से जुड़ी कई तरह की समस्याएं होने लग जाती हैं। ऐसे में लोग अपनी आंखों को सुंदर भी दिखाना चाहते हैं और कमजोरी होने पर आंखों के लेंस का भी इस्तेमाल करते हैं। आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि अक्सर आंखों के लेंस का इस्तेमाल आंखों की अच्छे से जांच कराने और डॉक्टर की सलाह के बाद ही करना चाहिए, क्योंकि इससे आँखों को काफी ज्यादा नुक्सान झेलना पड़ सकता है। जो आगे चलकर आपकी आंखों की रौशनी को भी बुरी तरीके से प्रभावित कर सकता है। आम तौर पर, ऐसा कई बार देखने को मिलता है, कि हम लेंस तो पहन लेते हैं, पर वातावरण में प्रदूषण और धूल-मिट्टी इतनी ज्यादा होती है, कि इससे आंखों के लेंस को भारी नुकसान का सामना करना पड़ता है। 

ऐसे में, लेंस का इस्तेमाल करते वक्त कई बातों का ख़ास ध्यान रखने की जरूरत होती है, नहीं तो आपकी आंखों को इंफेक्शन का भी सामना करना पड़ सकता है। जो लोग रोजाना अपनी आंखों में लेंस का इस्तेमाल करते हैं, उनको बहुत सी सावधानियों को बरतने की जरुरत होती है, जिसमें आंखों में इचिंग या फिर इंफेक्शन होने पर लेंस का इस्तेमाल न करें, हाथों को साफ़ रखें, मेकउप से पहले लेंस को पहने, लेंस लगाने के बाद पेंसिल आईलाइनर का ही इस्तेमाल करें, लेंस को साफ़ रखें, लेंस को निचे गिरने से बचाएं और मेकअप हटाने से पहले लेंस को निकालने जैसी सावधानियों को बरतना चाहिए। इस दौरान किसी भी तरह की समस्या होने पर आप तुरंत अपने डॉक्टर से भी संपर्क कर सकते हैं। आइये इस लेख के माध्यम से इसके बारे में इस के डॉक्टर से और विस्तार से जानकारी प्राप्त करते हैं। 

आंखों के लेंस की देखभाल के लिए सावधानियां!

आंखों के लेंस की देखभाल करने के लिए कई तरह की सावधानियों को बरतना बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में, लेंस को जमीन पर बिल्कुल भी नहीं गिरने देना चाहिए। ऐसे में अगर आपका लेंस जमीन पर गिर भी जाए, तो उसे पानी से बिल्कुल भी न धोएं। इस तरह की स्थिति में केवल इसको फ्लूड या फिर सल्यूशन से ही साफ करना चाहिए। ऐसे में, लेंस का इस्तेमाल करते वक्त आपको निम्नलिखित कई तरह की बातों का ध्यान रखने की जरूरत होती है, जैसे कि 

  1. इचिंग या फिर इन्फेक्शन में इन का इस्तेमाल बिल्कुल भी न करें 

ऐसे में, आपको केवल सेहतमंद आंखों में ही लेंस का इस्तेमाल करना चाहिए। इस तरह की स्थिति में अगर आपकी आंखों में किसी भी प्रकार की खुजली या फिर इन्फेक्शन होती है, तो ऐसे में आपको अपनी आंखों में भूलकर भी लेंस का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। इससे आंखों को भारी नुकसान झेलना पड़ सकता है। 

  1. लेंस का इस्तेमाल करते वक्त हाथों को अच्छे से साफ़ करें 

इस तरह की स्थिति में, आंखों में कॉन्टैक्ट लेंस का इस्तेमाल करते वक्त आपको अपने हाथों को अच्छी तरीके से साबुन से धोना चाहिए। हाथों को धोने के बाद अपने हाथों को रोएंदार तौलिए से बिल्कुल भी साफ़ न करें। क्योंकि, यह रु आपके हाथों में चिपक सकता है और लेंस के साथ आपकी आंखों में जाकर आंखों की सेहत को बुरी तरीके से प्रभावित कर सकता है। 

  1. मेकअप करने के बाद लेंस का इस्तेमाल न करें 

दरअसल, हम में से ज्यादातर लोग पूरा तैयार होकर आंखों में लेंस लगाते हैं, जो कि आंखों की सेहत के लिए बिल्कुल भी ठीक नहीं होता है। दरअसल, मेकअप करने के बाद आंखों में लेंस लगाने से कॉस्मेटिक के अंश आपकी आंखों में जा सकते हैं, जिससे काफी परेशानी हो सकती है। 

  1. केवल पेंसिल आईलाइनर का ही इस्तेमाल करें 

आज के समय में पुरुष और महिला दोनों ही लेंस का इस्तेमाल आंखों को सुरक्षित और सुंदर दिखाने के लिए करते हैं। जो महिलाएं लेंस का इस्तेमाल करती हैं, ऐसे में वो केवल पेंसिल आईलाइनर का ही इस्तेमाल करें। क्योंकि यह आंखों के लिए सुरक्षित माना जाता है। ध्यान रहे, आंख के अंदरूनी हिस्सों में इसका इस्तेमाल बिल्कुल भी न करें। 

निष्कर्ष: एक अच्छा, साफ़ और सेहतमंद जीवन जीने के लिए आंखों का सेहतमंद होना बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। आंखों को सेहतमंद रखने के लिए इन की विशेष देखभाल करना बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। आंखों के लिए न केवल एक सेहतमंद खाने की जरूरत होती है, बल्कि आंखों के लिए इस्तेमाल होने वाली हर एक चीज का अच्छे तरीके से चुनाव करना भी काफी ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। कई लोग बिना डॉक्टर की सलाह लिए आंखों के लेंस का इस्तेमाल करने लग जाते हैं, जो आगे चलकर कई तरह की परेशानियों का कारण बन सकते हैं। पहले से ही आंखों से जुड़ी बीमारियों से पीड़ित व्यक्तियों के लिए आंखों के लेंस का इस्तेमाल करना हानिकारक साबित हो सकता है। दरअसल, लेंस का इस्तेमाल करते वक्त व्यक्ति कोई कई तरह की सावधानियों का ध्यान रखने की काफी ज्यादा जरूरत होती है, इसमें लेंस पहनते वक्त आंखों को साफ़ रखना, मेकउप के बाद लेंस पहहने कि गलती न करना, आंखों को पानी से दूर रखना, आंखों को बार बार न रगड़ना, लेंस को साफ़ रखना, लेंस को जमीन पर गिरने से बचना, मेकअप हटाने से पहले लेंस को निकलना और हाथों को अच्छे से साफ़ रखना जैसी कई सावधानियां शामिल होती हैं। इसके कारण आंखों में किसी भी तरह की जलन या फिर दर्द का अनुभव होने पर आपको इसके लिए तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। आंखों के लिए लेंस का इस्तेमाल करने से पहले एक बार डॉक्टर से सलाह लेना बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण माना जाता है। इसके बारे में ज्यादा जानकारी प्राप्त करने के लिए और आंखों से जुड़ी किसी भी तरह की समस्या का तुरंत समाधान पाने के लिए आप आज ही मित्रा आई हॉस्पिटल एंड लेसिक लेज़र सेंटर में जाकर अपनी अपॉइंटमेंट को बुक करवा सकते हैं और इसके विशेषज्ञों से इसके बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। 

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल!

प्रश्न 1. क्या कांटेक्ट लेंस का इस्तेमाल करने से आँखों की रौशनी जा सकती है? 

दरअसल, हाँ अगर आप कांटेक्ट लेंस का इस्तेमाल सही तरीके से नहीं करते हैं, अगर आप इसका इस्तेमाल गलत या फिर लापरवाही से करते हैं, तो इससे आँखों को काफी ज्यादा नुक्सान, मतलब कि गंभीर संक्रमण और कॉर्निया को काफी ज्यादा नुकसान पहुंच सकता है, जिसके कारण नजर का काफी ज्यादा नुक्सान हो सकता है, यानी कि अंधेपन का खतरा काफी ज्यादा बढ़ सकता है। हालांकि, अगर आप इसका इस्तेमाल स्वच्छता के नियमों के साथ और सही तरीके से पहनते हैं, तो यह आपकी आंखों के लिए काफी ज्यादा सुरक्षित हो सकते हैं। इससे होने वाले खतरे को कम करने के लिए इन को पहन कर न सोएं और समय-समय पर बदलते रहें।

प्रश्न 2. पहली बार कॉन्टैक्ट लेंस पहनते वक्त किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

दरअसल, आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि अगर आप पहली बार कॉन्टैक्ट लेंस का इस्तेमाल कर रहे हैं, तो आपको ऐसी कई बातों का ध्यान रखने की जरूरत होती है, जिससे की आपकी आँखें सुरक्षित रहें। ऐसे में आप इन लेंस को पहनते वक्त गंदे हाथों से लेंस को न छुएं, लेंस को पहन कर न सोएं, स्वच्छता का ध्यान रखें, नल या फिर पूल के पानी के संपर्क न आना, अधिक समय तक लेंस को पहन कर न रखना, मेकअप के बाद लेंस पहनने की गलती न करना जैसी कुछ बातों का विशेष ध्यान रखने की जरूरत होती है। इससे आंखों को काफी ज्यादा नुकसान पहुंच सकता है।


Eye surgery and laser treatment at Mitra Eye Hospital for vision correction.
Mitra Eye Hospital offers advanced eye surgery and laser treatments for improved vision.
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ग्लूकोमा के इलाज के लिए आई ड्रॉप्स या लेजर सर्जरी क्या है बेहतर? डॉक्टर से जानें इसके बारे में!

    May 9, 2026 805 Views

दरअसल, व्यक्ति के लिए हर कीमत पर अपनी आंखों को संभाल कर रखना बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि इन के बिना कुछ भी कर पाना और किसी भी चीज को देख पाना बहुत ही ज्यादा मुश्किल हो सकता है। इससे न केवल आपके काम रोजाना प्रभावित होंगे, बल्कि इसके कारण आपकी पूरी जीवन शैली बुरी तरीके से प्रभावित हो सकती है। इसलिए, आंखों की विशेष देखभाल करना बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण होता है और साथ में नियमित आंखों की जांच भी जरूरी होती है, ताकि आंखों में होने वाली किसी भी तरह की समस्या का पता लगने पर उसका तुरंत इलाज किया जा सके और आंखों को होने वाले नुकसान को रोका जा सके। पर हम में से ज्यादातर लोग आंखों की देखभाल करना इतना जरूरी नहीं समझते हैं, जितनी की हमारे लिए जरूरी होती है। इसी कारण से वह आंखों से जुड़ी कई तरह की समस्याओं का शिकार हो जाते हैं, जिसमें ग्लूकोमा जैसी समस्या होना भी शामिल है। 

दरअसल, एक उम्र के बाद आधे से ज्यादा लोगों को आंखों में ग्लूकोमा या फिर मोतियाबिंद जैसी समस्या की शिकायत होना लाजमी है। यह समस्या आम के साथ-साथ बहुत ज्यादा गंभीर भी है, क्योंकि इस समस्या का समय पर इलाज न होने पर यह आंखों की रोशनी हमेशा के लिए चले जाने का खतरा बना रहता है। आम तौर पर, ग्लूकोमा एक आई डिसऑर्डर है, जो हमारी ऑप्टिक नर्व को काफी ज्यादा नुकसान पहुंचता है, जिसके कारण आंखों की रोशनी चले जाने को जोखिम होता है। इसकी वजह से आँखों में पानी जमा हो जाता है और इंट्राऑक्युलर प्रेशर बढ़ने लग जाता है। ओपन-एंगल, क्लोज्ड-एंगल, नॉर्मल-टेंशन और जन्मजात यह सभी प्राइमरी ग्लूकोमा के आम प्रकारों में से एक माने जाते हैं। वैसे तो, ग्लूकोमा का कोई पूर्ण इलाज नहीं है, पर समय रहते इसके लक्षणों की पहचान करके आई ड्रॉप्स या लेज़र सर्जरी से आंखों की रोशनी को कम होने से रोका जा सकता है। यह ग्लूकोमा को दूर करने के दो समाधान हैं। ऐसे में लोग जानना चाहते हैं, कि इलाज के इन दो समाधानों में से ग्लूकोमा इलाज के लिए कौन सा बेहतर होता है? दरअसल, डॉक्टर के अनुसार वैसे तो ग्लूकोमा के इलाज के लिए आई ड्रॉप्स और लेजर सर्जरी दोनों ही काफी कारगर साबित होती हैं, पर इस दौरान इलाज का बेहतर विकल्प मरीज की स्थिति पर निर्भर करता है। आइये इस लेख के माध्यम से इस के बारे और विस्तार से जानकारी प्राप्त करते हैं। 

ग्लूकोमा का शुरुआती उपचार

दरअसल, आई ड्रॉप के माध्यम से ग्लूकोमा के शुरुआती स्तर का इलाज किया जाना संभव है। यह मरीजों की आईओपी और ऑक्यूलर या सिस्टमेटिक की स्थिति पर निर्भर होता है। इससे आंखों में पानी बनना और निकलना आसान हो जाता है

ग्लूकोमा में लेजर सर्जरी है कारगर

ग्लूकोमा जैसी स्थिति में लेजर सर्जरी कारगर साबित होती है। क्योंकि, लेजर सर्जरी के कई फायदे होते हैं, जो लंबे समय तक प्रभावशाली रहते हैं। पर, स्थिति के हिसाब से ही मरीज का उपचार निर्भर करता है। यह दो प्रकार की होती है: 

  1. ट्रैबेकुलोप्लास्टी लेजर सर्जरी। 
  2. लेजर पेरिफेरल इरिडोटॉमी। 

निष्कर्ष: ग्लूकोमा को काला मोतिया भी कहा जाता है। यह एक गंभीर समस्या है, जिसमें पीड़ित व्यक्ति की हमेशा के लिए आंखों की रोशनी जाने का खतरा बना रहता है। यह समस्या आँख के अंदर बढ़ते हुए दबाव के कारण होती है। इस समस्या की शुरुआत में आपको कोई भी लक्षण नजर नहीं आएगा, पर समस्या गंभीर होने पर कम दिखाई देना, नजर धुंधली होना और आँखों में तेज दर्द होना जैसे लक्षण महसूस हो सकते हैं। इस दौरान लक्षणों की पहचान कर व्यक्ति को अपनी आंखों का विशेष ध्यान रखने की बहुत ज्यादा जरूरत होती है और समय पर इलाज भी काफी महत्वपूर्ण है। वैसे तो, ग्लूकोमा का कोई पूर्ण इलाज नहीं है, पर समय रहते इसके लक्षणों की पहचान करके आई ड्रॉप्स या लेज़र सर्जरी से आंखों की रोशनी को और कम होने से रोका जा सकता है। ग्लूकोमा की समस्या को दूर करने में आई ड्रॉप और लेजर सर्जरी दोनों ही कारगर साबित हो सकते हैं। क्योंकि इन दोनों के अपने-अपने फायदे और नुकसान होते हैं। इसके बारे में ज्यादा जानकारी प्राप्त करने के लिए और आंखों से जुड़ी किसी भी तरह की समस्या का तुरंत समाधान पाने के लिए आप आज ही मित्रा आई हॉस्पिटल एंड लेसिक लेज़र सेंटर के विशेषज्ञों से संपर्क कर सकते हैं। 

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल!

प्रश्न 1. ग्लूकोमा क्या है? 

दरअसल, ग्लूकोमा जिसे काला मोतिया के नाम से भी जाना जाता है, जो आँखों को बुरी तरीके से प्रभावित कर देता है। आम तौर पर, यह आँखों की स्थितियों का एक गंभीर समूह है, जिसमें आंख के अंदर बढ़ा हुआ प्रेशर ऑप्टिक नर्व को काफी ज्यादा नुकसान पहुंचाता है, जिसके कारण एक पीड़ित व्यक्ति की हमेशा के लिए आंखों की रोशनी जा सकती है। 

प्रश्न 2. किन कारणों की वजह से ग्लूकोमा होता है? 

ग्लूकोमा जैसी समस्या ज्यादातर आँख के अंदर बढ़ते हुए दबाव के कारण होती है, जो दिमाग से जुड़ी ऑप्टिक नर्व को काफी ज्यादा नुक्सान पहुंचने का काम करती है। 

प्रश्न 3. ग्लूकोमा के दौरान किन चीजों से अपनी आंखों को बचाकर रखना चाहिए? 

दरअसल, ग्लूकोमा के दौरान सिर को नीचे झुकाने वाले योग करना, टाइट कपड़े पहनना, काफी ज्यादा कैफीन का सेवन करना, धूम्रपान करना और भारी वजन उठाना जैसी आदतों से अपनी आंखों को बचाकर रखना चाहिए। इसके अलावा, ग्लूकोमा में आंखों के दबाव को कंट्रोल में रखने के लिए धूप का चश्मा पहनना, नियमित चेकअप कराना और तनाव को कम करना जैसे तरीकों को अपनाना चाहिए। 

प्रश्न 4. क्या ग्लूकोमा की शुरुआत में लक्षणों की पहचान की जा सकती है? 

शुरुआत में इस समस्या का कोई भी लक्षण नजर नहीं आता है, पर जब स्थिति धीरे-धीरे काफी ज्यादा गंभीर हो जाती है, तो बाद में आपको इसके लक्षण साफ़ दिखाई दे सकते हैं, जिसमें दिखाई देना कम हो जाना, धुंदला नजर आना और गंभीर मामलों में आँखों में तेज दर्द की समस्या होना जैसे लक्षण शामिल हो सकते हैं।


Close-up of a person's eye with a red circle highlighting a stye or eyelid bump.
Understanding eyelid bumps and styes: causes, symptoms, and treatment options.
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आखिर क्यों बढ़ जाता है आंखों में मांस? डॉक्टर से जानें इसके कारण, लक्षण और इलाज के बारे में!

    May 6, 2026 790 Views

दरअसल, आंखों में कई तरह की समस्याएं हो सकती हैं, जो एक व्यक्ति के पूरे जीवन को भी बुरी तरीके से प्रभावित करके रख सकती हैं। बेशक आंखों में समस्याएं होना बहुत आम हो गया है, पर इन को अनदेखा करना उतना ही ज्यादा खतरनाक भी हो सकता है, क्योंकि इससे न केवल आंखों की सेहत प्रभावित हो सकती है, बल्कि इसके कारण आंखों की रौशनी भी बुरी तरीके से प्रभावित हो सकती है। इसलिए आंखों से जुड़ी हर तरह की समस्या पर ध्यान देना बहुत ही ज्यादा जरूरी होता है। 

आँखें शरीर का कोमल और एक बहुत ही नाजुक अंग होती है। आंखों का महत्वपूर्ण ध्यान न रखने पर इस में कई तरह के संक्रमण भी हो सकते हैं, जो आंखों को बुरी तरीके से प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए, आंखों की सही देखभाल और खानपान को ठीक रखना आंखों के लिए काफी ज्यादा जरूरी होता है। आंखों में कई गंभीर समस्याएं हो सकती हैं, जिसमें आंखों में मांस बढ़ना भी एक गंभीर समस्या में शामिल है। इस समस्या को नाखूना, टेरिजियम भी कहा जाता है। इस समस्या में आंख में मांसपेशियां अप्राकृतिक रूप से बढ़ती हैं। समस्या गंभीर होने पर दिखाई देना भी बंद हो सकता है। 

आंखों में मांस बढ़ने की समस्या की शुरूआत आंखों के संक्रमण की तरह हो सकती है, जिसे कंजंक्टिवाइटिस भी कहा जाता है। इसका विकास कॉर्नेल लिंबस और इसके आसपास होता है। इन मांसपेशियों का विकास धीरे-धीरे होता है और वक्त बाद बंद हो जाता है। इसके कारण कई परेशानियां हो सकती हैं, जिसमें आंखों में लालिमा होना और आंखों में दर्द होना शामिल हो सकता है। डॉक्टर के अनुसार, इस समस्या के कई कारण हो सकते हैं। समस्या के दोनों आंखों में होने पर इस को बाईलेटरल टेरिजियम के नाम से जाना जाता है।

आखिर क्या हो सकते हैं आंखों में मांस बढ़ने के प्रमुख कारण?

दरअसल, आंखों में मांस बढ़ने के प्रमुख्य कारण निम्नलिखित अनुसार हो सकते हैं, जैसे कि 

  1. आंखों में सूखापन की समस्या होना। 
  2. आंखों में यूवी किरणों का काफी ज्यादा प्रभाव पड़ना। 
  3. धूल-मिट्टी और प्रदूषण के कारण आंखों को नुकसान पहुंचना। 
  4. परागकण के कारण आंखों में समस्या होना। 
  5. आंखों में लगी किसी चोट के कारण आंखों में मांस बढ़ सकता है। 

आंखों में मांस बढ़ने के क्या -क्या लक्षण हो सकते हैं?

दरअसल, आंखों में मांस बढ़ने की समस्या की शुरुआत धीरे-धीरे होती है, इसलिए लोग जल्दी से इस समस्या को पकड़ नहीं पाते हैं और इस समस्या से गंभीर रूप से पीड़ित हो जाते हैं। आम तौर पर, समस्या का समय पर पता नहीं चलता है और समस्या पहले से और भी ज्यादा बढ़ने लग जाती है। जैसे-जैसे समस्या का विकास तेजी से होता है, वैसे वैसे ही इस के लक्षण बढ़ने लग जाते हैं। आंखों में मांस की समस्या बढ़ने पर, प्रमुख रूप से निम्नलिखित लक्षण दिखाई दे सकते हैं, जैसे कि 

  1. आंखों में जलन की समस्या होना। 
  2. आंखों में लालिमा आना। 
  3. आंखों में गंभीर रूप से दर्द होना। 
  4. आंखों का लाल हो जाना। 
  5. आंखों में तेज खुजली होना। 
  6. आंखों में इरिटेशन होना। 
  7. आंख में सूजन की समस्या होना। 

आंख में मांस बढ़ने का इलाज किस तरीके से किया जा सकता है?

आम तौर पर, डॉक्टरों द्वारा इस तरह की समस्या का इलाज मरीज के लक्षणों के आधार पर ही किया जाता है, जो एक मरीज के लिए बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। आम तौर पर, अगर इस तरह की स्थिति में इस समस्या के लक्षण काफी ज्यादा गंभीर है, तो डॉक्टर इस दौरान सर्जरी का सहारा भी ले सकते हैं। दरअसल, डॉक्टर समस्या की अच्छे तरीके से जांच करने के बाद मरीज को कुछ दवाएं और ड्रॉप्स का इस्तेमाल करने की सलाह प्रदान कर सकते हैं। आम तौर पर, अगर इस तरह की स्थिति में व्यक्ति को किसी भी प्रकार से राहत नहीं मिल पाती है, तो इस दौरान डॉक्टर सर्जरी का सहारा भी ले सकते हैं। 

निष्कर्ष: आंखों में कई प्रकार की समस्याएं होती हैं, जो एक व्यक्ति के जीवन को बुरी तरीके से प्रभावित करके रख देती हैं। आज के समय में आंखों में समस्या होना बहुत ही आम बात है। आंखों से जुड़ी समस्याओं को नजरंअदाज करना आंखों की सेहत के लिए हानिकारक साबित हो सकता है। इसलिए, आंखों से जुड़ी हर छोटी से छोटी समस्या पर महत्वपूर्ण ध्यान देना बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। क्योंकि, आंखों में होने वाली समस्या आंखों की रौशनी को भी बुरी तरह प्रभावित करके रख सकती है। आंखों को उम्र भर सेहतमंद रखने के लिए आंखों से जुड़ी समस्याओं को समय रहते डॉक्टर से दिखाना आँखों के लिए बेहतर होता है। इसी तरह आंखों में बढ़ने वाले मांस की समस्या की तरफ ध्यान देना अति आवश्यक होता है। क्योंकि, अगर समस्या पता काफी देर से लगता है, तो यह आंखों के लिए ठीक नहीं होता है। इसलिए, आंखों में मांस बढ़ने के लक्षण दिखाई देने पर आपको बिना कोई देर किये तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए। क्योंकि, समस्या का सही समय पर इलाज और जांच होना आपको इससे होने वाली गंभीर समस्या का शिकार होने से बचा सकता है। आम तौर पर, इस गंभीर समस्या से अपना बचाव करने के लिए आप धूप में बाहर निकलते वक्त चश्मे का इस्तेमाल करें और जितना हो सके अपनी आंखों को प्रदूषण से बचा कर रखें। जैसा कि आपको बताया है, कि समस्या के बढ़ने या फिर गंभीर होने पर आप तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क कर सकते हैं। इसके बारे में ज्यादा जानकारी प्राप्त करने के लिए और आंखों से जुड़ी किसी भी तरह की समस्या का तुरंत समाधान पाने के लिए आप आज ही मित्रा आई हॉस्पिटल एंड लेसिक लेज़र सेंटर के विशेषज्ञों से संपर्क कर सकते हैं। 

प्रश्न 1. आंखों में दर्द होने पर किस दवा का इस्तेमाल करना होता है बेहद फायदेमंद?

दरअसल, आंखों में दर्द होने पर लुब्रिकेटिंग आई ड्रॉप्स, एंटीबायोटिक ड्रॉप्स या फिर ब्रोम्फेनाक ड्रॉप्स का इस्तेमाल करना बेहद फायदेमंद साबित हो सकता है। 

प्रश्न 2. आंखों की रौशनी बढ़ाने के लिए क्या खाना चाहिए?

दरअसल, आपकी जानकारी के लिए आपको बगता दें, कि आंखों की रौशनी को बढ़ाने के लिए और उनको हमेशा के लिए स्वस्थ रखने के लिए आप ओमेगा-3 फैटी एसिड, विटामिन ए, सी, इ, और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर खाने का सेवन कर सकते हैं। यह आंखों के लिए बेहद फायदेमंद साबित हो सकता है। 

प्रश्न 3 आंखों में बढ़ता मांस किस समस्या का संकेत होता है?

आम तौर पर, आंखों में बढ़ता मांस दरअसल टेरिजियम नाम की समस्या का संकेत होता है, जिसको आम तौर पर, नाखूना या फिर सर्फर आई के नाम से भी जाना जाता है। 

प्रश्न 4. सुबह आंखों को किस पानी से धोना चाहिए। 

यह सभी जानते हैं, कि आंखों को साफ़ रखना बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। आम तौर पर, आंखों को सुबह साफ, ठंडे या फिर आम तापमान वाले पानी से धोना आंखों की सेहत के लिए फायदेमंद हो सकता है। 

प्रश्न 5. क्या आंखों की समस्या के दौरान चाय का सेवन करना फायदेमंद हो सकता है? 

दरअसल, हाँ आंखों की समस्या के दौरान चाय का सेवन करना फायदेमंद साबित हो सकता है। पर, ऐसे में केवल ग्रीन टी या फिर काली चाय ही आंखों की सेहत के लिए काफी ज्यादा लाभदायक साबित होती है। क्योंकि, इस चाय में कई तरह के एंटीऑक्सीडेंट मौजूद होते हैं, जो न केवल आंखों की सूजन को कम करने में मदद प्रदान करते हैं, बल्कि ग्लूकोमा जैसी गंभीर बीमारी को कम करने में काफी सहायता प्रदान करते हैं।


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आखिर किन कारणों की वजह से आंखों को जलन की समस्या का शिकार होना पड़ सकता है? डॉक्टर से जानें इसके बारे में!

    April 17, 2026 808 Views

आज लोगों में आंखों से जुड़ी समस्याओं का होना आम है। लोग ज्यादातर काम के चलते अपनी आंखों की अच्छे से देखभाल नहीं कर पाते हैं और आंखों में जलन होना समस्या का शिकार हो जाते हैं। यह समस्या वैसे तो आम होती है, पर वक्त रहते अगर इस समस्या पर ध्यान न दिया जाए, तो यह आंखों से जुड़ी कई तरह की गंभीर बीमारियों का कारण बन सकती है। यह समस्या बड़ों से लेकर छोटे बच्चों तक सभी में देखी जा सकती है। हम में से ज्यादातर लोगों को और विशेष तौर पर छोटे बच्चों को अपनी आंखों को रगड़ते हुए देखा जाता है, जिसका कारण आंखों से जुड़ी समस्याएं होती हैं, जिसमें आंखों में जलन होना भी शामिल होता है। 

आंखें हमारे शरीर का एक सबसे संवेदनशील अंग होती हैं, जिसका सेहतमंद होना बहुत जरूरी होता है। दरअसल, बढ़ते स्क्रीन टाइम, धूल-मिट्टी और प्रदूषण की वजह से आंखों को कई दिक्क्तों से गुजरना पड़ता है, जिसमें आंखों में जलन, लालपन और सूजन की समस्या होना एक आम बात होती है। यह छोटी-छोटी समस्याएं ही पता नहीं कब बड़ी समस्याओं में बदल सकती हैं। इसलिए, इन पर ध्यान देना अति आवश्यक होता है। कई लोग आंखों की थकान समझकर इन को नजरअंदाज कर देते हैं, जो की आंखों की सेहत के लिए ठीक नहीं होता है। आंखों में होने वाली जलन के कई कारण हो सकते हैं, जिसमें डिजिटल आई स्ट्रेन होना, आंखों में होने वाला सूखापन, वायु प्रदूषण होना, एलर्जी होना और आंखों में इन्फेक्शन होना जैसे मुख्य कारण शामिल होते हैं। यह आंखों से जुड़ी किसी गंभीर समस्याओं का संकेत भी हो सकता है। इसलिए नजरअंदाज करना ठीक नहीं, समय पर इलाज महत्वपूर्ण है। 

आंखों में होने वाली जलन के कारण 

  1. डिजिटल आई स्ट्रेन होना 

आंखों में जलन की समस्या होने का एक बहुत बड़ा कारण डिजिटल आई स्ट्रेन भी होता है। इसके कारण आंखों को काफी ज्यादा नुकसान झेलना पड़ता है। दरअसल, जब आप काफी लंबे वक्त तक स्मार्टफोन या फिर लैपटॉप का इस्तेमाल करते रहते हैं, तो इस दौरान आंखों पर पड़ने वाली ब्लू लाइट आंखों की मांसपेशियों पर काफी दबाव डालती है, जिसके कारण आंखों में कई तरह की समस्याएं होने लग जाती है। दरअसल, ऐसे में पलक झपकने की दर कम हो जाती है और आंखों में जलन जैसी समस्या का अभाव हो सकता है। 

  1. आंखों में होने वाला सूखापन 

दरअसल, आंखों में होने वाली सूखेपन की समस्या जलन का एक बहुत बड़ा कारण बनती है। इसलिए, आंखों में होने वाली जलन की समस्या का आम कारण ड्राई आई को माना जाता है। असल में, हमारी आंखों को नमी की काफी ज्यादा जरूरत होती है और इसकी कमी आंखों में सूखेपन की समस्या को पैदा करती है। आंखों में इस नमी

को पूरा करने के लिए आंसुओं का सहारा लिया जाता है। दरअसल, जब हमारी आंखों के आंसू पूरी तरीके से सूख जाते हैं, तो इस दौरान हमें आंखों में ड्राइनेस जैसी समस्या का सामना करना पड़ सकता है। इसके कारण ही आंखों में तेज जलन महसूस हो सकती है। 

  1. वायु प्रदूषण होना 

आप सभी जानते ही हैं, कि आज के समय में प्रदूषण की मात्रा कितनी ज्यादा बढ़ गई है और इसकी वजह से न केवल हमको सेहत से जुड़ी कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है, बल्कि इसके कारण आंखों से जुड़ी कई तरह की समस्याओं का भी सामना करना पड़ता है। जिसमें आंखों में जलन की समस्या होना काफी ज्यादा आम माना जाता है। दरअसल, प्रदूषित हवा में मौजूद सल्फर डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन डाइऑक्साइड जैसे हानिकारक तत्व, जो आंखों की झिल्ली को नुकसान पहुंचा कर उन में जलन की समस्या को पैदा कर देते हैं। 

  1. एलर्जी की समस्या होना 

यह सभी जानते हैं, कि हवा में उड़ने वाली धूल-मिट्टी आंखों को कितना ज्यादा नुक्सान पहुंचा सकती है। इसके आंखों को काफी तकलीफ झेलनी पड़ सकती है। इसके अलावा, एलर्जी और धूल-मिट्टी की वजह से आंखों में जलन की समस्या हो सकती है। हवा में मौजूद धूल-कण और पराग आंखों में एलर्जी होने का एक बहुत बड़ा कारण बनते हैं, जिससे न केवल आंखों को जलन की समस्या का सामना करना पड़ता है, बल्कि आंखों में सूजन की समस्या भी हो सकती है। 

  1. आंखों में इन्फेक्शन होना 

लोगों की आंखों में होने वाली इंफेक्शन की वजह से उनको अपनी आंखों में जलन जैसी समस्या का अभाव हो सकता है। दरअसल, इस तरह की स्थिति में, बैक्टीरिया और वायरस के कारण आंखों को कई तरह की दिक्क्तों का सामना करना पड़ सकता है, जिसमें आंखों में चिपचिपाहट होना, आंखों का लाल या फिर रेडनेस होना और साथ में जलन जैसी समस्या शामिल हो सकती है। अगर इस तरह की स्थिति में आंखों की जलन के साथ- साथ आपको आंखों से डिस्चार्ज भी हो रहा है, तो इस तरह की स्थिति को हलके में न लेकर आपको तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। 

निष्कर्ष: सही और साफ़ दृष्टि पाने के लिए आपको अपनी आंखों का ख़ास ध्यान रखना होता हैं। आंखों में होने वाली समस्या तरह-तरह परेशानियों को पैदा कर सकती है। इससे व्यक्ति के बाकी के काम भी काफी ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं। इसलिए। आंखों में होने वाली किसी भी तरह की समस्या के लिए आपको तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। दरअसल, ड्राई आई सिंड्रोम, डिजिटल आई स्ट्रेन, एनर्जी, वायु प्रदूषण और आई इंफेक्शन की वजह से आंखों में जलन की समस्या हो सकती है। आंखों में होने वाली जलन को बिल्कुल भी हल्के में नहीं लेना चाहिए। अगर यह समस्या आपको बार- बार और लगातार परेशान कर रही है, तो आपको किसी डॉक्टर की सलाह पर आई ड्रॉप या फिर इसकी जांच करवानी चाहिए। ताकि इससे होने वाली गंभीर समस्याओं से अपना बचाव किया जा सके। इसके बारे में ज्यादा जानकारी प्राप्त करने के लिए और आंखों से जुड़ी किसी भी तरह की समस्या का तुरंत समाधान पाने के लिए आप मित्रा आई हॉस्पिटल एंड लेसिक लेज़र सेंटर के विशेषज्ञों से संपर्क कर सकते हैं।


Blurred vision, eye floaters, and red eyes are common eye problems treated at Mitra Eye Hospital. Se.
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आंखों से जुड़ी किन समस्याओं को नजरअंदाज वरना हो सकता है गंभीर बीमारियों का संकेत? डॉक्टर से जानें इसके बारे में!

    April 14, 2026 825 Views

दरअसल, हर व्यक्ति की जिंदगी में आंखें एक बहुत ही अहम रोल निभाती हैं। इसके बिना इस दुनिया के किसी भी खूबसूरत नजारे को देख पाना बहुत ही ज्यादा मुश्किल हो जाता है। इसलिए, आंखों का सेहतमंद होना बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। दरअसल, अपनी आंखों को सेहतमंद रखने के लिए आंखों को धूप से बचाना, पौष्टिक आहार का सेवन करना, आंखों को साफ़ पानी से धोना और नियमित आंखों कि जांच करवाना जैसे तरीके शामिल हो सकते हैं। हमारी आँखें बहुत ही नाजुक होती हैं, इसलिए इस दौरान आंखों को लेकर की गई एक छोटी सी भी गलती आपको जीवन भर का पछतावा दे सकती है। इसलिए, इनके प्रति हर मोड़ पर वफादार होना लाजमी होता है। 

दरअसल, आंखों में होने वाली समस्याओं के बढ़ने के कई कारण हो सकते हैं, जिसमें देर रात तक जागना, हवा में काफी प्रदूषण होना, और फ़ोन का हद से ज्यादा इस्तेमाल करना शामिल होता है। वैसे, तो आज के समय में आंखों से जुड़ी कई तरह की समस्याओं का होना बहुत ही आम हो गया है, इसमें बढ़ती उम्र के साथ लोगों की आंखों की रौशनी भी प्रभावित होना शामिल है। पर, ऐसे में आंखों से जुड़ी कई समस्याएं ऐसी होती हैं, जो स्वास्थ्य बिगड़ने का संकेत प्रदान करती हैं, जो स्वास्थ्य से जुड़ी गंभीर समस्याओं का संकेत प्रदान करती हैं। दरअसल, आंखों से जुड़ी इन समस्याओं में आंखों में अधिक सूखापन होना, आंखों में सूजन, आइब्रो का झड़ना और आंखों का फड़कना शामिल है। यह समस्याएं खराब स्वास्थ्य होने का संकेत प्रदान करती हैं, इसलिए इन समस्याओं पर विशेष ध्यान देना अति आवश्यक होता है, ताकि इससे होने वाली गंभीर समस्याओं से निजात पाया जा सके। आंखों से जुड़ी गंभीर समस्या होने पर आप तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क कर सकते हैं। आइये इस लेख के माध्यम से इसके बारे में इस के डॉक्टर से और विस्तार से जानकारी प्राप्त करते हैं। 

आंखों से जुड़ी समस्याएं, जो गंभीर बीमारियों का संकेत दे सकती हैं?

  1. आंखों में सूजन 

आंखों में सूजन होना एक आम बात है, जो कई कारणों से आंखों को प्रभावित कर सकते हैं। इसमें व्यक्ति की उम्र बढ़ना, नींद की कमी होना, शराब का ज्यादा सेवन करना और किसी चीज से आंखों में एलर्जी होना जैसे कारण शामिल हो सकते हैं। पर, यह समस्या कई बार ब्लड शुगर लेवल बढ़ने, प्री-डायबिटीज या फिर डायबिटीज जैसी गंभीर बीमारियों का भी संकेत हो सकता है। आंखों में होने वाली सूजन से छुटकारा पाने के लिए आप पोटेशियम से भरपूर एवोकाडो, पालक, शकरकंद और नारियल पानी जैसे खाद्य पदार्थों को शामिल कर सकते हैं। 

  1. आंखों का फड़कना 

शरीर में कैल्शियम की कमी या फिर नींद पूरी न होने की वजह से आपको आँख फड़कने जैसी समस्या का सामना करना पड़ सकता है। यह स्वास्थ्य खराब होने का संकेत होता है। इससे छुटकारा पाने के लिए आप अपनी डाइट में कैल्शियम से भरपूर पनीर, दही और पत्तेदार सब्जियों को शामिल कर सकते हैं। 

निष्कर्ष: कुल मिलाकर आँखें बहुत ही नाजुक होती हैं, जिसके प्रति होने वाली छोटी सी भी लापरवाही आपको जिंदगी भर का पछतावा दे सकती है। इसलिए, हर वक्त आंखों की देखभाल करना बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। वैसे, तो आंखों में होने वाली समस्याएं ज्यादातर आम होती है, जो वक्त के साथ अपने आप ठीक हो जाती हैं। पर, ऐसे में आंखों से जुड़ी ऐसी बहुत सी समस्याएं हैं, जो स्वास्थ्य से जुड़ी गंभीर समस्याओं का संकेत हो सकती हैं। इसलिए, इन समस्याओं पर वक्त रहते ध्यान देना जरूरी होता है, ताकि स्वास्थ्य से जुड़ी गंभीर समस्याओं से अपना बचाव किया जा सके। आंखों की देखभाल करने के लिए आप कई तरीकों को अपना सकते हैं, जिसमें आप अपनी आंखों को लंबे वक्त तक के लिए सेहतमंद और सुरक्षित रख सकते हैं। इससे जुड़ी गंभीर स्थिति होने पर आप तुरंत अपने डॉक्टर से मुलाक़ात कर सकते हैं। इसके बारे में ज्यादा जानने के लिए और आंखों से जुड़ी किसी भी समस्या का तुरंत समाधान पाने के लिए आप आज ही मित्रा आई एंड लेजर लेसिक हॉस्पिटल के विशेषज्ञों से संपर्क कर सकते हैं। 

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल!

प्रश्न 1. आँखों से जुड़ी वो कौन सी समस्याएं हैं, जो खराब स्वास्थ्य का संकेत देती हैं? धुंधला दिखाई देना, आंखों का सूखा होना, आंखों में लाली और सूजन आना, पलकों का बार-बार फड़कना और अचानक फ्लोटर्स का दिखना जैसी समस्याएं एक खराब स्वास्थ्य का संकेत हो सकती हैं। इसलिए, आँखों में होने वाली समस्याओं पर महत्वपूर्ण ध्यान देना अति आवश्यक होता है। 

प्रश्न 2. अपनी आँखों को किन चीजों से दूर रखना चाहिए?

आपकी आँखों को सुरक्षित और सेहतमंद रखने के लिए आप अपनी आँखों को कुछ चीजों से बचा कर रख सकते हैं, जैसे अपने गंदे हाथों से आँखों न रगड़ें, लंबे समय तक स्क्रीन के सामने न बैठें, तेज धुप में बहार न निकलें, धूम्रपान और रसायनों जैसी चीजों से अपनी आँखों को बचा कर रखें। इससे आपकी आँखें लंबे वक्त तक सेहतमंद बनी रह सकती हैं। 

प्रश्न 3. कौन-कौन सी समस्याएं आँखों को काफी नुकसान पहुंचा सकती हैं?

असल में, ऐसी कई समस्याएं हैं जो आंखों को नुकसान पहुंचा सकती हैं, जिसमें ग्लूकोमा मतलब कि काला मोतिया, डायबिटिक रेटिनोपैथी, उम्र से जुड़ा मैकुलर डिजनरेशन और रेटिना का अलग होना जैसी समस्याएं शामिल हो सकती हैं। दरअसल, यह समस्याएं अंधेपन का कारण बन सकती हैं। इसके अलावा, गंभीर ड्राई आई होना, आंखों में चोट लगना, आँखों में इन्फेक्शन होना और धूप में यूवी किरणों से आँखों को होने वाला नुकसान भी आंखों को बुरी तरीके से प्रभावित कर सकता है। 

प्रश्न 4. आँखों की देखभाल कैसे की जा सकती है?

दरअसल, आँखों की देखभाल करने के लिए आप सबसे पहले धुप में यूवी प्रोटेक्टिव चस्मा पहने, सेहतमंद आहार का सेवन करें, स्क्रीन टाइम कम करें, कंप्यूटर पर काम करते वक्त 20-20-20 नियम का पालन करें, आँखों को रोजाना साफ़ पानी से धोएं, एक अच्छी और पर्याप्त नींद लें और नियमित अपनी आँखों की जांच करवाने जैसे कई तरीकों को अपना स्वकते हैं।


Bright-eyed healthcare professional promoting eye health and vision care at Mitraeyehospital.
Dedicated doctor encouraging eye health awareness and regular checkups.
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आंखों को सेहतमंद रखने के लिए किन तरीकों को अपनाना हो सकता है बेहद फायदेमंद? डॉक्टर से जानें इसके बारे में!

    April 10, 2026 794 Views

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी के कारण और ज्यादातर मोबाइल और लेपटॉप का इस्तेमाल करने के कारण लोगों की आँखें दिन-ब-दिन काफी खराब होती जा रही हैं। आंखों में होने वाली इस कमजोरी के कारण लोगों के सभी काम बुरी तरीके से प्रभावित हो जाते हैं। आँखें शरीर से साथ-साथ हमारी जिंदगी का भी एक महत्वपूर्ण हिस्सा होती हैं, जिन का सेहतमंद होना बहुत ही ज्यादा जरूरी होता है। इनमें होने वाली किसी भी तरह की छोटी से छोटी समस्या हमारे पूरे जीवन को बदल कर रख सकती है। आँखें बहुत ही कोमल होती हैं, जो पूरे जहान की चीजों को देखने में हमारी काफी ज्यादा सहायता करती हैं। दरअसल, हमारी आँखें सुबह जागने से लेकर रात को सोने तक बिना रुके सभी कामों को करती रहती हैं। ऐसे में, आंखों का कमजोर होना बहुत ही आम हो जाता है। जैसे कि हम सभी को पता है, कि आज हर किसी के पास फ़ोन मौजूद है, फिर चाहे वो कोई छोटा बच्चा हो या फिर कोई बजुर्ग हो। इसके साथ ही, लोगों का ज्यादातर काम लैपटॉप और कंप्यूटर पर ही होता है, जिससे कि आँखें काफी ज्यादा कमजोर और दर्द करने लग जाती हैं। इसलिए, आंखों में होने वाली किसी भी तरह की समस्या का कारण लोगों का बढ़ता स्क्रीन टाइम ही होता है। ऐसे में, अपनी आंखों का ध्यान रखते हुए काम को छोड़ना आपकी आर्थिक स्थिति को प्रभावित कर सकता है। इसलिए, आप बिना काम को छोड़े ही अपनी आंखों को सेहतमंद रखने के लिए कुछ महत्वपूर्ण तरीकों को अपना सकते हैं, जिसमें खाने की चीजों पर ध्यान देना, रोजाना पर्याप्त मात्रा में पानी का सेवन करना, 20-20-20 नियम का पालन करना, ज्यादा से अपनी पलकों को झपकाना और आंखों को यूवी किरणों से बचाकर रखना जैसे तरीके शामिल हो सकते हैं। इन तरीकों का इस्तेमाल आंखों के लिए बेहद फायदेमंद साबित हो सकता है। गंभीर समस्या या फिर देखने में दिक्कत महसूस होने पर आप तुरंत डॉक्टर से संपर्क कर सकते हैं। आइये इस लेख के माध्यम से इसके बारे में इस के डॉक्टर से और विस्तार से जानकारी प्राप्त करते हैं। 

किन तरीकों से आंखों को सेहतमंद रखा जा सकता है?

आंखों की देखभाल करना सम्पूर्ण स्वास्थ्य के लिए बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। आंखों की बेहतर नजर से लेकर आंखों से जुड़ी समस्याओं तक आंखों की देखभाल

करने के लिए सेहतमंद डाइट के साथ-साथ कुछ और बातों पर भी ध्यान देना अति आवश्यक होता है। 

  1. खाने की चीजों का ध्यान रखना 

ऐसे में, खाने की चीजों पर ध्यान देना महत्वपूर्ण होता है। आंखों को सेहतमंद बनाए रखने के लिए आप निम्नलिखित चीजों को अपनी डाइट में शामिल कर सकते हैं, जैसे कि 

  •  हरी पत्तेदार सब्जियों का सेवन करना 

आंखों से जुड़ी समस्याओं को दूर करने के लिए और सेहत को बरकरार रखने के लिए आप अपनी डाइट में हरी पत्तेदार सब्जियां, रंग-बिरंगे फल और पालक, करेला, लौकी, गाजर, मटर और बीटरूट जैसी सब्जियों को शामिल कर सकते हैं। अगर आप नियमित इनका सेवन नहीं करते हैं, तो इससे शरीर में पोषक तत्वों की काफी कमी हो जाती है, जिससे आंखों की सेहत काफी ज्यादा नाजुक हो सकती है। 

 

  • हेल्दी फैट से भरपूर आहार 

अपनी आंखों को सेहतमंद रखने और कमजोरी से बचने के लिए आप ड्राई फ्रूट्स, बीज, जैतून का तेल, देसी घी और एवोकाडो जैसे हेल्दी फैट से भरपूर आहार को अपनी डाइट में शामिल कर सकते हैं। 

  1. पर्याप्त मात्रा में पानी का सेवन करना 

आंखों की सेहत को बरकरार रखने के लिए शरीर को हाइड्रेट रखना बहुत ही ज्यादा जरूरी होता है, इसलिए पर्याप्त मात्रा में पानी का सेवन करना बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। रोजाना पर्याप्त मात्रा में पानी का सेवन करने से आंसुओं की स्वस्थ परत बनी रहती है, जिससे आँखें आरामदायक और चिकनी रहती हैं। इससे ड्राइनेस की समस्या नहीं होती है। 

  1. 20-20-20 नियम का इस्तेमाल करना

आंखों की सबसे आम समस्याओं में से एक डिजिटल आई स्ट्रेन। इस समस्या से बचने के लिए और आंखों को सेहतमंद रखने के लिए लिए आप 20-20-20 नियम का

इस्तेमाल कर सकते हैं, इसमें हर 20 मिनट में, 20 फीट की दूरी पर रखी किसी भी चीज़ को 20 सेकंड के लिए देखना शामिल है। इससे आंखों की मांसपेशियों को आराम मिलता है और थकान, सिरदर्द और धुंधली नज़र जैसी समस्याएं कम होती हैं। 

  1. ज्यादा से ज्यादा अपनी पलकों को झपकाएं

जब कोई व्यक्ति कंप्यूटर या फिर मोबाइल पर काम करता है, तो ऐसे में वो सामान्य से काफी कम केवल 50% कम पलकों को झपकाता है। आंखों के सूखापन, जलन और चुभन जैसी समस्याओं से बचने के लिए पलकों को बार-बार झपकाना ज्यादा जरूरी होता है। 

निष्कर्ष: सम्पूर्ण स्वास्थ्य के लिए आंखों का सेहतमंद होना काफी महत्वपूर्ण होता है। आंखों को सेहतमंद रखने के लिए, खाने की चीजों पर ध्यान देना, रोजाना पर्याप्त मात्रा में पानी का सेवन करना, 20-20-20 नियम का पालन करना, ज्यादा से अपनी पलकों को झपकाना और आंखों को यूवी किरणों से बचाकर रखना जैसे तरीकों का इस्तेमाल करना बेहद फायदेमंद साबित हो सकता है। ध्यान रहे, समस्या गंभीर होने पर डॉक्टर से संपर्क करना न भूलें और जितना हो सके अपने स्क्रीन टाइम को कम करने की कोशिश करें, क्योंकि यह आंखों से जुड़ी समस्याओं का सबसे बड़ा कारण होता है। इसके बारे में ज्यादा जानने के लिए और आंखों से जुड़ी किसी भी समस्या का समाधान पाने के लिए आप आज ही मित्रा आई हॉस्पिटल एंड लेसिक लेज़र सेंटर विशेषज्ञों से संपर्क कर सकते हैं। 

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल!

प्रश्न 1. आंखों का ध्यान रखना क्यों महत्वपूर्ण होता है?

नजर को बेहतर बनाये रखने के लिए, मोतियाबिंद और ग्लूकोमा जैसी गंभीर समस्या को रोकने और ज्यादा स्क्रीन टाइम से होने वाली डिजिटल समस्याओं को कम करने के लिए आंखों का ध्यान रखना महत्वपूर्ण होता है। 

प्रश्न 2. किन गंभीर समस्याओं से आंखों की रोशनी प्रभावित हो सकती है?

ग्लूकोमा, मोतियाबिंद, रेटिनल डिटैचमेंट और डायबिटिक रेटिनोपैथी जैसी गंभीर समस्याओं से आंखों की रोशनी प्रभावित हो सकती है।


Woman adjusting glasses while working on a laptop at Mitraeyehospital.
A woman working on her laptop, highlighting the importance of eye health and vision care at Mitraeyehospital.
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पलक को बिना झपकाए स्क्रीन को लगातार देखते रहने से आंखों को कौन कौन से नुकसान हो सकते हैं? डॉक्टर से जाने इसके बारे में!

    April 6, 2026 877 Views

आँखें हमारी जिंदगी का एक बहुत ही महत्वपूर्ण हिस्सा है। एक आसान जिंदगी जीने के लिए इन को सेहतमंद रखना बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। आँखें हमको देखने में काफी ज्यादा सहायता प्रदान करती हैं। आम तौर पर, इस में होने वाली समस्या हमारी जिंदगी को बुरी तरीके से प्रभावित कर सकती है। दरअसल, आंखों की पलकों को झपकना आंखों की सेहत को बनाए रखने का एक सबसे आसान और एक बहुत ही ज्यादा जरूरी नेचुरल प्रोसेस में से एक माना जाता है। दरअसल, जब आप हर बार अपनी आंखों की पलकों को झपकाते हैं, तो इस दौरान आपकी पलकें आंखों की सतह पर आंसुओं की एक पतली परत को फैलाती हैं, जिसकी सहायता से आँखें नम, साफ और आरामदायक महसूस करती हैं। आम तौर पर, इसी के चलते, जब आप डिजिटल स्क्रीन को चाहे वो आपका फोन हो, कंप्यूटर हो या फिर टीवी हो उसे लगातार देखते या फिर उसको एक टक घूरते ही रहते हैं, तो इसकी वजह से आपकी आंखों को काफी ज्यादा नुकसान झेलना पड़ता है। इसके कारण पलक झपकने की दर काफी ज्यादा कम हो जाती है। स्क्रीन को देखते हुए आंखों को कम झपकने की यह गन्दी आदत आंखों में कई तरह की समस्याओं को पैदा कर सकती है, जिस में ड्राइनेस, जलन, रेडनेस और आंखों में किरकिरा पन महसूस होना शामिल हो सकता है। यहां डॉक्टर का मानना है, कि यह आदत डिजिटल आई स्ट्रेन या फिर कंप्यूटर विज़न सिंड्रोम के मुख्य कारणों में से एक है। आम तौर पर, यह एक इस तरह की स्थिति है, जो किसी भी उम्र के लोगों को बुरी तरीके से प्रभावित कर सकती है। दरअसल, पालक को झपकाए बगैर और लगातार स्क्रीन को देखते रहने की वजह से आपकी आंखों को कई तरह के नुकसानों का सामना करना पड़ सकता है, जिसमें आँखों का सुख जाना, डिजिटल आई स्ट्रेन होना, नजर का धुंधला हो जाना, सिर और गर्दन में दर्द होना और मैकुलर डिजनरेशन होना जैसे कई नुकसान शामिल हो सकते हैं। आइये इस लेख के माध्यम से इसके बारे में इस के डॉक्टर से और विस्तार से जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। 

आंख का आंसू सिर्फ पानी ही नहीं होता है!

आम तौर पर, हम में से बहुत से लोगों को यही लगता है, कि आंखों में आने वाला आँसू सिर्फ एक पानी होता है, पर ऐसा बिल्कुल भी नहीं है, हम में से ज्यादातर लोगों को इस बात का एहसास ही नहीं है, कि आंखों में से निकलने वाला आँसू केवल पानी ही नहीं होता है, बल्कि यह तेल, बलगम और पानी का एक बहुत ही नाजुक मिश्रण होता है, जो हमारी आंखों को कई तरह की चीजों से बचाने का काम करता है, जिसमें धूल, एलर्जी और इन्फेक्शन जैसी चीजों से बचाना शामिल होता है। दरअसल, आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि जब पलक झपकने की बारंबारता काफी ज्यादा कम हो जाती है, तो इस दौरान आंसुओं की परत एक जैसी नहीं रहती, जिसकी वजह से आंखों में जलन और आंखों में सूखापन जैसी समस्या हो जाती है। 

लगातार स्क्रीन देखने से आंखों को होने वाले नुकसान

दरअसल, जो लोग बिना थके और बिना रुके किसी भी डिजिटल स्क्रीन को लगातार देखते रहते हैं, उन्हें आंखों में कई तरह के नुकसानों का सामना करना पड़ सकता है, जिसमें से कुछ निम्नलिखत अनुसार हो सकते हैं, जैसे कि 

  • आंखों में थकान होना 

दरअसल, लगातार एक ही नज़र और बिना पलक झपकाएं स्क्रीन को देखते रहना आंखों की थकान को काफी ज्यादा बढ़ा देता है। इससे आपको अपनी आंखों में काफी दर्द महसूस हो सकता है और कुछ भी देखने में काफी ज्यादा परेशानी हो सकती है। आंखों की इस थकान से बचने के लिए अपने स्क्रीन टाइम को कम करना और बीच बीच में ब्रेक लेना आंखों की सेहत के लिए काफी ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। 

  • आंखों में सूखापन आना 

जो लोग बिना पालक को झपकाए लगातार स्क्रीन को देखते रहते हैं, दरअसल उनकी आंखों में काफी ज्यादा सूखापन आ जाता है। इस तरह की स्थिति के कारण आंखों की नमी काफी ज्यादा कम हो जाती है, जिसकी वजह से आंखों में जलन और खुजली जैसी समस्या होने लग जाती है।

  • धुंधला दिखाई देना 

आपको बता दें, कि आपकी आंखें जितना वक्त स्क्रीन के पास काम करती हैं, उसकी वजह से आँखें काफी ज्यादा थक जाती हैं, जिस से पास और दूर की चीजें देखने में काफी ज्यादा परेशानी महसूस होती है। आम तौर पर, इसकी वजह से गर्दन और कंधों में भी काफी ज्यादा दर्द महसूस हो सकता है। 

  • आंखों में ड्राइनेस होना 

आम तौर पर, काफी लंबे वक्त तक और लगातार एक टक से स्क्रीन को देखते रहने की वजह से आंखों में ड्राइनेस की समस्या हो सकती है। दरअसल, इसकी वजह से कॉर्न‍िया की सतह में काफी ज्यादा सूजन हो जाती है और आंखों में इंफेक्शन का खतरा काफी ज्यादा बढ़ जाता है। 

  • 20-20-20 रूल फॉलो करें

आंखों से जुड़ी किसी भी तरह की समस्याओं से बचने के लिए आप 20-20-20 नियम का पालन कर सकते हैं। इसमें स्क्रीन पर काम करते वक्त हर 20 मिनट में, कम से कम 20 सेकंड तक के लिए ब्रेक लें और अपने से 20 फीट की दुरी पर रखी किसी भी चीज को देखें। दरअसल, अपनी आंखों को सेहतमंद रखने के लिए आप पलकों को झपकाते रहें और सही रोशनी में बैठकर काम करें। 

निष्कर्ष: इस ड‍िज‍िटल युग में कोई भी स्क्रीन को देखने से अपने आप को नहीं रोक सकता है। क्योंकि आज यह सभी की जरूरत बन चुका है। पर आंखों को सुरक्षित रखने के लिए हम कुछ सेहतमंद आदतों को अपना सकते हैं। इससे आँखें लंबे समय तक बीमारियों से बची रह सकती हैं। इसके बारे में ज्यादा जानने के लिए और आंखों से जुड़ी किसी भी समस्या का समाधान पाने के लिए आप आज ही मित्रा आई हॉस्पिटल एंड लेसिक लेज़र सेंटर में जाकर इसके विशेषज्ञों से इसके बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।


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