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क्या वाकई 90 फीसदी लोगों को पता नहीं होता, कि उनको ग्लूकोमा है? डॉक्टर से जानें, आखिर किस तरह छीनती है यह बीमारी आँखों की रौशनी!

Home   : :  Hindi  : :  क्या वाकई 90 फीसदी लोगों को पता नहीं होता, कि उनको ग्लूकोमा है? डॉक्टर से जानें, आखिर किस तरह छीनती है यह बीमारी आँखों की रौशनी!
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क्या वाकई 90 फीसदी लोगों को पता नहीं होता, कि उनको ग्लूकोमा है? डॉक्टर से जानें, आखिर किस तरह छीनती है यह बीमारी आँखों की रौशनी!

    May 25, 2026 490 Views

आज ग्लूकोमा जो दुनिया भर में, एक खतरनाक स्थिति बनकर सामने आ रहा है। यह समस्या एक बहुत ही आम बीमारी है, पर जितनी यह आम है उतनी ही ज्यादा गंभीर भी है, क्योंकि इसके कारण पीड़ित व्यक्ति अँधा भी हो सकता है। यह बीमारी पीड़ित व्यक्ति की आंखों पर एक दम से हमला नहीं करती है या फिर इसके लक्षण तभी सामने नहीं आते हैं, बल्कि यह समस्या तो धीरे-धीरे आंखों की रोशनी को नुकसान पहुंचाती है और ज्यादा समय होने पर यह अंधेपन का कारण बनती है। इसके कारण ही इस समस्या को साइलेंट विजन थीफ ने नाम से जाना जाता है। ग्लूकोमा की वजह से अंधापन हो सकता है, इसमें कोई शक नहीं। इसलिए, इस गंभीर बीमारी का वक्त पर इलाज होना बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। पर क्या आप जानते हैं, हम से ज्यादातर लोगों को ग्लूकोमा जैसी गंभीर बीमारी का पता तब चलता है, जब आंखों की रोशनी कम होने लगती है। 

दरअसल, इस पर डॉक्टर का कहना है, कि ग्लूकोमा एक बहुत ही गंभीर बीमारी है, जिसके रोगियों की संख्या में लगातार हद से ज्यादा तेजी देखी जा रही है। दरअसल, आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि हर 100 में से 10 व्यक्तियों को इस तरह की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। दरअसल, ऐसे में हैरान कर देने वाली बात यह है, कि 90 फीसदी लोगों को इसके बारे में पता ही नहीं होता है, कि उनको ग्लूकोमा की बीमारी हो चुकी है। क्योंकि, इस समस्या की शुरुआत में पीड़ित व्यक्ति को किसी भी तरह का कोई भी लक्षण महसूस नहीं होता है। इसलिए, उनको इसके बारे में ज्यादा जानकारी नहीं मिल पाती है। यह अंधे पन का कारण बन सकती है, इसलिए ग्लूकोमा की समय पर पहचान होना बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। इससे आंखों को होने वाले गंभीर नुकसान को रोका जा सकता है। 

दरअसल ग्लूकोमा जैसी गंभीर बीमारी के कारण प्रभावित हुई आँखों की रोशनी को तो वापिस नहीं लाया जा सकता, पर अगर इस समस्या की समय पर पहचान करके इलाज कर दिया जाए, तो ग्लूकोमा के कारण आंखों को होने वाले नुकसान को रोका जा सकता है। गंभीर स्थिति में आप अपने डॉक्टर से मिल सकते हैं। आइये इसके बारे में और जानते हैं। 

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ग्लूकोमा पर जरूरी डाटा इस प्रकार है!

  1. दरअसल, दुनिया भर में लगभग 80 मिलियन से भी ज्यादा लोग ग्लूकोमा जैसी समस्या से पीड़ित हैं। आज भारत में भी ग्लूकोमा के रोगियों की संख्या बढ़ती नजर आ रही है। 
  2. आम तौर पर, 50 प्रतिशत लोगों को ग्लूकोमा जैसी समस्या का पता तब चलता है, जब उनकी आंखों की रोशनी पूरी तरीके से चली जाती है, मतलब कि वह अंधे हो जाते हैं। 
  3. ऐसे में, लगभग 90 प्रतिशत लोग ऐसे हैं, जिनको पता ही नहीं होता है, कि उनको ग्लूकोमा जैसी कोई गंभीर बीमारी भी है। 
  4. फीसदी लोगों को पता ही नहीं होता है कि उन्हें ग्लूकोमा की बीमारी है। उन्हें इसका पता तब चलता है जब बीमारी की वजह से अंधापन हो जाता है। दरअसल, अंधे लोगों की समस्या में ज्यादातर व्यक्ति ग्लूकोमा की वजह से अंधे होते हैं। 

आखिर किस तरह छीनता है ग्लूकोमा आंखों की रोशनी को? 

दरअसल, इस पर डॉक्टर का कहना है, कि ग्लूकोमा यानी कि काला मोतिया एक बहुत ही गंभीर बीमारी है, जो आंखों की रोशनी को पूरी तरीके से छीन लेता है और अंधे पन का कारण बनता है। इसके कारण आंखों के अंदर काफी ज्यादा दबाव बढ़ता है और ऐसे में आंखों की ऑप्टिक नर्व को काफी ज्यादा नुकसान पहुंचता है। दरअसल, आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि जब आंखों की ऑप्टिक नर्व पूरी तरीके से क्षतिग्रस्त हो जाती है, तो ऐसे में आंखों की रोशनी धीरे-धीरे कम होने लग जाती है। जिसका समय पर इलाज होना बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण होता है, नहीं तो व्यक्ति अंधेपन का शिकार हो सकता है। 

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किन लोगों को ग्लूकोमा का खतरा काफी ज्यादा होता है? 

दरअसल, आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि यह बात सच है, कि कुछ लोगों में ग्लूकोमा का खतरा काफी ज्यादा होता है। इन लोगों में शामिल हो सकते हैं, जैसे कि 

  1. जो लोग ज्यादातर डायबिटीज जैसी समस्या से काफी ज्यादा पीड़ित होते हैं। 
  2. दरअसल, जिन लोगों को हाई ब्लड प्रेशर जैसी समस्या होती है, उन में ग्लूकोमा का खतरा काफी ज्यादा रहता है। 
  3. ऐसे में, जिन लोगों के चश्मे का नंबर माइनस में होता है, दरअसल उन लोगों में भी ग्लूकोमा का अधिक जोखिम बना रहता है।
  4. अगर घर में पहले से इस तरह कि बीमारी का कोई इतिहास रहा है, तो यह समस्या आपको भी परेशान कर सकती है। 
  5. जो लोग थायराइड की बीमारी से पीड़ित होते हैं, उन में भी इस समस्या का अधिक जोखिम देखा जा सकता है। 

निष्कर्ष: ग्लूकोमा एक आम पर पर एक बहुत ही गंभीर बीमारी है, जो किसी भी वर्ग के व्यक्ति को अपनी चपेट में ले सकती है। अगर इस समस्या पर वक्त रहते ध्यान न दिया जाये, तो यह आगे चलकर अंधे पन का कारण भी बन सकती है। इसलिए, इस समस्या में सतर्क रहना बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। हाँ, ऐसे में यह बात बिलकुल सच है, कि भारत में 90 फीसदी लोगों को पता नहीं होता, कि उनको ग्लूकोमा है। इसलिए, यह समस्या पीड़ित लोगों में अपना गंभीर रूप धारण कर लेती है और आंखों की रौशनी प्रभावित होने का कारण बनती है। ग्लूकोमा आंखों की रोशनी को पूरी तरीके से छीन लेता है और ऐसे में हैरानी कि बात यह है, कि ग्लूकोमा की वजह से आंखों को हुए नुकसान को पूरी तरीके से ठीक नहीं किया जा सकता है। पर अगर वक्त रहते इस समस्या को पहचान लिया जाए और समय पर इलाज कर दिया जाए, तो इससे होने वाली बीमारी को रोका जा सकता है। इसके अलावा, इसके कारण आंखों को हुए नुकसान से भी बचा जा सकता है। ऐसे में, जो व्यक्ति हाई बीपी कि समस्या से पीड़ित होते हैं, दरअसल उन रोगियों में ग्लूकोमा जैसी गंभीर बीमारी का खतरा काफी ज्यादा रहता है। समस्या के बारे में पता लगने पर या फिर स्थिति गंभीर होने पर आपको तुरंत अपने डॉक्टर से मिलना चाहिए। इसके बारे में ज्यादा जानकारी प्राप्त करने के लिए और आंखों से जुड़ी कोई भी गंभीर समस्या महसूस होने पर आज तुरंत मित्रा आई हॉस्पिटल एंड लेसिक लेज़र सेंटर के विशेषज्ञों के साथ संपर्क कर सकते हैं। 

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल 

प्रश्न 1. काला मोतियाबिंद के क्या -क्या लक्षण हो सकते हैं?

दरअसल, काला मोतियाबिंद न केवल आंखों की एक गंभीर बीमारी है, बल्कि यह नजर का एक खामोश चोर भी होता है। इसके पीछे का कारण, इस समस्या की शुरुआत में किसी भी लक्षण का न दिखना है। इसलिए, लोग इस समस्या को जल्दी पहचान नहीं पाते हैं और इस समस्या से गंभीर रूप से प्रभावित हो जाते हैं। ऐसे में इसके विशेष लक्षणों में धीरे-धीरे साइड नज़र का कम हो जाना, लाइट के चारों ओर घेरे का महसूस होना धुंधला दिखाई देना, काफी तेज सिर में दर्द होना, आंखों में तेज दर्द का अहसास होना, उल्टी आना और जी मिचलाना जैसे कई लक्षण शामिल हो सकते हैं। 

प्रश्न 2. क्या छोटे बच्चों को भी काला मोतियाबिंद हो सकता है?

दरअसल, हाँ इस समस्या से न केवल छोटे बच्चे बल्कि नवजात शिशु भी बुरी तरीके से प्रभावित हो सकते हैं। जिस को आम तौर पर, कन्जेनिटल ग्लूकोमा के नाम से जाना जाता है। 

प्रश्न 3. क्या सच में काला मोतियाबिंद से आंखों की रोशनी जा सकती है?

दरअसल, हाँ अगर वक्त रहते काला मोतियाबिंद जैसी गंभीर समस्या पर ध्यान न दिया गया, तो इसके कारण स्थायी रूप से आंखों की रोशनी प्रभावित हो सकती है।

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