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दरअसल, व्यक्ति के लिए हर कीमत पर अपनी आंखों को संभाल कर रखना बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि इन के बिना कुछ भी कर पाना और किसी भी चीज को देख पाना बहुत ही ज्यादा मुश्किल हो सकता है। इससे न केवल आपके काम रोजाना प्रभावित होंगे, बल्कि इसके कारण आपकी पूरी जीवन शैली बुरी तरीके से प्रभावित हो सकती है। इसलिए, आंखों की विशेष देखभाल करना बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण होता है और साथ में नियमित आंखों की जांच भी जरूरी होती है, ताकि आंखों में होने वाली किसी भी तरह की समस्या का पता लगने पर उसका तुरंत इलाज किया जा सके और आंखों को होने वाले नुकसान को रोका जा सके। पर हम में से ज्यादातर लोग आंखों की देखभाल करना इतना जरूरी नहीं समझते हैं, जितनी की हमारे लिए जरूरी होती है। इसी कारण से वह आंखों से जुड़ी कई तरह की समस्याओं का शिकार हो जाते हैं, जिसमें ग्लूकोमा जैसी समस्या होना भी शामिल है।
दरअसल, एक उम्र के बाद आधे से ज्यादा लोगों को आंखों में ग्लूकोमा या फिर मोतियाबिंद जैसी समस्या की शिकायत होना लाजमी है। यह समस्या आम के साथ-साथ बहुत ज्यादा गंभीर भी है, क्योंकि इस समस्या का समय पर इलाज न होने पर यह आंखों की रोशनी हमेशा के लिए चले जाने का खतरा बना रहता है। आम तौर पर, ग्लूकोमा एक आई डिसऑर्डर है, जो हमारी ऑप्टिक नर्व को काफी ज्यादा नुकसान पहुंचता है, जिसके कारण आंखों की रोशनी चले जाने को जोखिम होता है। इसकी वजह से आँखों में पानी जमा हो जाता है और इंट्राऑक्युलर प्रेशर बढ़ने लग जाता है। ओपन-एंगल, क्लोज्ड-एंगल, नॉर्मल-टेंशन और जन्मजात यह सभी प्राइमरी ग्लूकोमा के आम प्रकारों में से एक माने जाते हैं। वैसे तो, ग्लूकोमा का कोई पूर्ण इलाज नहीं है, पर समय रहते इसके लक्षणों की पहचान करके आई ड्रॉप्स या लेज़र सर्जरी से आंखों की रोशनी को कम होने से रोका जा सकता है। यह ग्लूकोमा को दूर करने के दो समाधान हैं। ऐसे में लोग जानना चाहते हैं, कि इलाज के इन दो समाधानों में से ग्लूकोमा इलाज के लिए कौन सा बेहतर होता है? दरअसल, डॉक्टर के अनुसार वैसे तो ग्लूकोमा के इलाज के लिए आई ड्रॉप्स और लेजर सर्जरी दोनों ही काफी कारगर साबित होती हैं, पर इस दौरान इलाज का बेहतर विकल्प मरीज की स्थिति पर निर्भर करता है। आइये इस लेख के माध्यम से इस के बारे और विस्तार से जानकारी प्राप्त करते हैं।
ग्लूकोमा का शुरुआती उपचार
दरअसल, आई ड्रॉप के माध्यम से ग्लूकोमा के शुरुआती स्तर का इलाज किया जाना संभव है। यह मरीजों की आईओपी और ऑक्यूलर या सिस्टमेटिक की स्थिति पर निर्भर होता है। इससे आंखों में पानी बनना और निकलना आसान हो जाता है
ग्लूकोमा में लेजर सर्जरी है कारगर
ग्लूकोमा जैसी स्थिति में लेजर सर्जरी कारगर साबित होती है। क्योंकि, लेजर सर्जरी के कई फायदे होते हैं, जो लंबे समय तक प्रभावशाली रहते हैं। पर, स्थिति के हिसाब से ही मरीज का उपचार निर्भर करता है। यह दो प्रकार की होती है:
- ट्रैबेकुलोप्लास्टी लेजर सर्जरी।
- लेजर पेरिफेरल इरिडोटॉमी।
निष्कर्ष: ग्लूकोमा को काला मोतिया भी कहा जाता है। यह एक गंभीर समस्या है, जिसमें पीड़ित व्यक्ति की हमेशा के लिए आंखों की रोशनी जाने का खतरा बना रहता है। यह समस्या आँख के अंदर बढ़ते हुए दबाव के कारण होती है। इस समस्या की शुरुआत में आपको कोई भी लक्षण नजर नहीं आएगा, पर समस्या गंभीर होने पर कम दिखाई देना, नजर धुंधली होना और आँखों में तेज दर्द होना जैसे लक्षण महसूस हो सकते हैं। इस दौरान लक्षणों की पहचान कर व्यक्ति को अपनी आंखों का विशेष ध्यान रखने की बहुत ज्यादा जरूरत होती है और समय पर इलाज भी काफी महत्वपूर्ण है। वैसे तो, ग्लूकोमा का कोई पूर्ण इलाज नहीं है, पर समय रहते इसके लक्षणों की पहचान करके आई ड्रॉप्स या लेज़र सर्जरी से आंखों की रोशनी को और कम होने से रोका जा सकता है। ग्लूकोमा की समस्या को दूर करने में आई ड्रॉप और लेजर सर्जरी दोनों ही कारगर साबित हो सकते हैं। क्योंकि इन दोनों के अपने-अपने फायदे और नुकसान होते हैं। इसके बारे में ज्यादा जानकारी प्राप्त करने के लिए और आंखों से जुड़ी किसी भी तरह की समस्या का तुरंत समाधान पाने के लिए आप आज ही मित्रा आई हॉस्पिटल एंड लेसिक लेज़र सेंटर के विशेषज्ञों से संपर्क कर सकते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल!
प्रश्न 1. ग्लूकोमा क्या है?
दरअसल, ग्लूकोमा जिसे काला मोतिया के नाम से भी जाना जाता है, जो आँखों को बुरी तरीके से प्रभावित कर देता है। आम तौर पर, यह आँखों की स्थितियों का एक गंभीर समूह है, जिसमें आंख के अंदर बढ़ा हुआ प्रेशर ऑप्टिक नर्व को काफी ज्यादा नुकसान पहुंचाता है, जिसके कारण एक पीड़ित व्यक्ति की हमेशा के लिए आंखों की रोशनी जा सकती है।
प्रश्न 2. किन कारणों की वजह से ग्लूकोमा होता है?
ग्लूकोमा जैसी समस्या ज्यादातर आँख के अंदर बढ़ते हुए दबाव के कारण होती है, जो दिमाग से जुड़ी ऑप्टिक नर्व को काफी ज्यादा नुक्सान पहुंचने का काम करती है।
प्रश्न 3. ग्लूकोमा के दौरान किन चीजों से अपनी आंखों को बचाकर रखना चाहिए?
दरअसल, ग्लूकोमा के दौरान सिर को नीचे झुकाने वाले योग करना, टाइट कपड़े पहनना, काफी ज्यादा कैफीन का सेवन करना, धूम्रपान करना और भारी वजन उठाना जैसी आदतों से अपनी आंखों को बचाकर रखना चाहिए। इसके अलावा, ग्लूकोमा में आंखों के दबाव को कंट्रोल में रखने के लिए धूप का चश्मा पहनना, नियमित चेकअप कराना और तनाव को कम करना जैसे तरीकों को अपनाना चाहिए।
प्रश्न 4. क्या ग्लूकोमा की शुरुआत में लक्षणों की पहचान की जा सकती है?
शुरुआत में इस समस्या का कोई भी लक्षण नजर नहीं आता है, पर जब स्थिति धीरे-धीरे काफी ज्यादा गंभीर हो जाती है, तो बाद में आपको इसके लक्षण साफ़ दिखाई दे सकते हैं, जिसमें दिखाई देना कम हो जाना, धुंदला नजर आना और गंभीर मामलों में आँखों में तेज दर्द की समस्या होना जैसे लक्षण शामिल हो सकते हैं।