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घरेलू उत्पादों से तैयार करे चमत्कारी पट्टी,जो आँखों की जलन और चुभन को करे कम

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Category: Hindi

घरेलू उत्पादों से तैयार करे चमत्कारी पट्टी,जो आँखों की जलन और चुभन को करे कम
घरेलू उत्पादों से तैयार करे चमत्कारी पट्टी,जो आँखों की जलन और चुभन को करे कम
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घरेलू उत्पादों से तैयार करे चमत्कारी पट्टी,जो आँखों की जलन और चुभन को करे कम

    May 29, 2024 2808 Views

आँखों में जलन और चुंबन की मुख्य वजह है प्रदूषण और हवा में मिलने वाले कण जो इस समस्या को बढ़ावा देती है | हलाकि कुछ अन्य स्थितियां जैसे की आँखों में किसी तरह की बीमारी, लम्बे समय तक मोबाइल या सिस्टम पर काम करने, ख़राब खानपान या फिर खानपान में पौष्टिक तत्व का मौजूद ना होना इत्यादि कारणों से भी हो सकते है | आँखों में जलन से रोज़ाना कामकाज में भी बहुत बुरा असर पड़ता है | इसलिए इस समस्या को कम करना बहुत ही आवश्यक है | अगर इस समस्या को सही समय पर कम ना किया जाये तो यह आगे जाकर बहुत बड़ी बीमारी का कारण भी बन सकती है | अगर आप चाहे तो इस समस्या को तुरंत कम करने के लिए घर में बने चमत्कारी पट्टी का उपयोग कर सकती है | इस पट्टी को ज़्यादा कुछ नहीं घर में मौजूद सामग्री की ही ज़रूरत होती है | आइये जानते है इस चमत्कारी पट्टी को बनाने की विधि :-

आँखों में जलन और चुभन को कम करने के लिए घरेलू उत्पादों से तैयार की गयी पट्टी

एलोवेरा से बनी पट्टी

आवश्यकता सामग्री :-

  • फ्रेश एलोवेरा जेल :- 1 बड़ा चम्मच
  • गुलाब जल :- 2 चम्मच
  • कॉटन पैड :- 2 (आप चाहे तो रुई का भी इस्तेमाल कर सकते है )

पट्टी बनाने की विधि :- एक कटोरे में फ्रेश एलोवेरा जेल और गुलाब जल को डाल एक चम्मच के सहायता से अच्छी तरह से मिला ले, फिर कॉटन पैड या रुई को गोलाकार में काट कर इस मिश्रण में भिगो दे | इस कॉटन पैड अपनी दोनों आँखों के आस पास लगा कर 20-30 मिनट के लिए छोड़ दे , फिर अपनी आँखों को नार्मल पानी से धो कर मोइस्टीरिज़ क्रीम से मालिश कर ले | 10 मिनट बाद ही आपकी आँखों में जलन और चुंबन की समस्या कम हो जाएगी |

कैस्टर ऑयल से बनी पट्टी

आवश्यकता सामग्री :-

  • कैस्टर ऑयल :- 2 बड़े चम्मच
  • कॉटन पैड :- 2 (आप चाहे तो रुई का भी इस्तेमाल क्र सकते है )

पट्टी बनाने की विधि :- एक कटोरे में कैस्टर ऑयल में कॉटन पैड या रुई को गोलाकार में काट कर 10 मिनट के लिए छोड़ दे, फिर इस कॉटन पैड को हलके हाथों से निचोड़ कर अपनी दोनों आँखों के आस पास लगा कर तब के लिए छोड़ दे जब तक यह पट्टी सुख न जाये , फिर इसके बाद अपनी आँखों को नार्मल पानी से धो कर कोई भी रोज़ाना इस्तेमाल करने वाली मोइस्यूरीज से मालिश कर ले | कुछ देर बाद ही आपकी आँखों में जलन और चुंबन की समस्या कम हो जाएगी |अगर आपके पास कॉटन पट्टी मौजूद नहीं है तो आप कैस्टर ऑयल को अपने हाथ में लेकर हलके हाथों से मालिश भी कर सकते है |

 खीरे के रस से बानी पट्टी

आवश्यकता सामग्री :-

  • खीरा का रस  :- 2 बड़े चम्मच
  • शहद :- 1 चम्मच
  • कॉटन पैड :- 2 (आप चाहे तो रुई का भी इस्तेमाल क्र सकते है )

पट्टी बनाने की विधि :- सबसे पहले खीरे को कदूकस करके, उसमें से रस को निकाल कर एक कटोरे में अलग कर ले, फिर बताई गयी मात्रा अनुसार खीरे के रस और शहद को एक कटोरे डाल कर में अच्छी तरह से मिला ले | इस मिश्रण में कॉटन पैड या रुई को गोलाकार में काट कर भीगने के छोड़ दे |फिर पट्टी को अपनी दोनों आँखों के आस पास लगा कर 10-20 तक के लिए छोड़ दे | फिर अपनी आँखों को नार्मल पानी से धो कर मोइस्यूरीज क्रीम से मालिश कर ले | 10 मिनट बाद ही आपकी आँखों में जलन और चुंबन होना कम हो जायेगा |

अगर इस पट्टी के इस्तेमाल से भी आपकी आँखों में जलन और चुभन जैसे समस्या कम नहीं हो रही है तो डॉक्टर के पास जाकर इलाज करवाना ही उचित रहेगा | इससे समस्या से जुड़ी कोई भी सलाह आप मित्रा आई हॉस्पिटल एंड लासिक लेज़र सेंटर से ले सकती है | यह टॉप हॉस्पिटल में से एक है और इनके सभी डॉक्टर ऑप्थैमोलॉजिस्ट एक्सपर्ट है |


आँखों-में-दर्द-की-समस्या-से-कैसे-करें-खुद-का-बचाव
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eye care Hindi

आँखों में दर्द के क्या है लक्षण, कारण, इलाज और घरेलु उपाय ?

    April 30, 2024 33188 Views

आँखों में दर्द का होना काफी समस्या बनी हुई है लोगों के लिए वही इसके दर्द से हम कैसे खुद का बचाव कर सकते है और आँखों में दर्द के क्या है कारण, लक्षण व घरेलु बचाव के तरीके। तो आप भी अगर आँखों में दर्द या जलन जैसी समस्या का सामना कर रहें है तो इससे बचाव के लिए लेख के साथ अंत तक बने रहें ;

आँखों में दर्द के कारण क्या है ?

  • कॉर्नियल विकार, हमारी आँख के सबसे संवेदनशील हिस्सों में से एक है। कॉर्निया गंदगी, कीटाणुओं या किसी अन्य हानिकारक कणों को बाहर रखने में बाधा के रूप में कार्य करता है जो आँखों को नुकसान पहुंचा सकते है। कॉर्नियल डिसऑर्डर से पीड़ित लोग लोग दर्द, आँखों से पानी आना या दृष्टि में कमी का अनुभव कर सकते है।
  • कॉर्नियल घर्षण, यह तब होता है जब कोई बाहरी वस्तु आपकी आँखों पर खरोंच छोड़ देती। 
  • संक्रमण भी गंभीर घर्षण या लेंस के अनुचित उपयोग के कारण होता है। 
  • सूखी आँख, यह आमतौर पर आँखों में खिंचाव या शुष्क हवा के मौसम के कारण होने वाली एक अल्पकालिक समस्या है।
  • ग्लूकोमा, उम्र से संबंधित आँखों की समस्या है जो ऑप्टिक नसों को प्रभावित करती है। 
  • स्टाइस, एक मवाद से भरी हुई गांठें होती है, जो पलकों के पास बनती है। यह बेहद दर्दनाक होती है।
  • ब्लेफेराइटिस, कोई गंभीर समस्या नहीं है और इसके लिए डॉक्टर से तुरंत परामर्श लेने की भी आवश्यकता नहीं होती है। 

हद से ज्यादा कॉन्टैक्ट लेंस इस्तेमाल करने के कारण आपके आँखों में धुंधलापन या दर्द की समस्या उत्पन्न हो गई है तो इससे बचाव के लिए आपको पंजाब में लेसिक सर्जरी का चयन करना चाहिए।

आँखों का दर्द क्या है ?

  • आँखों के दर्द में आप आँखों से जुडी हुई तरह-तरह की परेशानियों को झेलते है। 
  • आँखों से जुडी परेशानी, तेज दर्द और चुभने वाला या सुस्त और छुरा घोंपने वाला हो सकता है। आपकी आंखें चिढ़ या किरकिरा महसूस कर सकती है। साथ में आंखों का दर्द हो सकता है धुंधली दृष्टि, खुजली, लाली, सूखी आंखें, या पानी वाली आंखें। 

आँखों में दर्द की समस्या क्या है इसके बारे में जानने के लिए आप पंजाब में आंखों के स्पेशलिस्ट डॉक्टर का चयन भी कर सकते है।

आँखों में दर्द से बचाव के लिए घरेलु उपचार क्या है ?

  • चश्में को लगाए ताकि कॉन्टैक्ट लेंस पहनने से बच सकें। 
  • आँखों में दर्द होने पर गर्म सेक से आँखों को सेके। 
  • आँखों में अगर कुछ बाहरी कण चला गया हो तो साफ पानी से आँखों को धोए। 
  • आँखों में दर्द होने पर आप एंटीबायोटिक्स ले सकते है। 
  • आँखों में परेशानी होने पर आँख की दवा का प्रयोग करें
  • आँखों में दर्द अधिक होने पर दर्द की दवा जरूर लें।
  • अधिक गंभीर संक्रमण में आपका डॉक्टर आपको कॉर्टिकोस्टेरॉइड्स लिख सकता है।

आँखों में दर्द के लक्षण क्या है ?

  • आंखों में जलन की समस्या। 
  • तेज छुरा घोंपने की अनुभूति। 
  • लालपन की समस्या। 
  • प्रकाश के प्रति संवेदनशीलता। 
  • जब आप अपनी आँखें घुमाते हैं तो दर्द होता है। 
  • आँख से स्राव। 
  • आँख का फड़कना। 
  • नम आँखें। 
  • खुजली की समस्या।

आँखों में दर्द का इलाज और हॉस्पिटल ! 

  • आँखों में दर्द की समस्या से निजात दिलवाने के लिए कई डॉक्टर दवाइयों की मदद से इसको ठीक करते है और समस्या गंभीर होने पर सर्जरी भी की जा सकती है। 
  • आँखों में इलाज के लिए आप मित्रा आई हॉस्पिटल का चयन कर सकते है, वहीं इस हॉस्पिटल में डॉक्टर पहले मरीज़ की जाँच अच्छे से करते है उसके बाद ही इलाज की प्रक्रिया को आधुनिक उपकरणों की मदद से शुरू किया जाता है।

निष्कर्ष :

आँखों से जुडी किसी भी तरह की समस्या से निजात पाने के लिए डॉक्टर के कहेनुसार ही उपचार का चयन करें।


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Hindi LASIK surgery

जानिए 40 की उम्र के बाद लेसिक सर्जरी को करवाना कितना है सुरक्षित !

    April 25, 2024 10322 Views

लेसिक सर्जरी जोकि हर उम्र के लोगों के लिए तक़रीबन फायदेमंद मानी जाती है, तो वहीं इस सर्जरी को लेकर कुछ लोगों का ये सवाल भी सामने आया है की क्या 40 के बाद भी इस सर्जरी को करवाना फायदेमंद हो सकता है, साथ ही 40 के बाद करवाई गई इस सर्जरी के क्या फायदे हो सकते है, इसके बारे में भी आज के लेख में चर्चा करेंगे  

क्या है लेसिक सर्जरी ?

  • लेजर असिस्टेड इन-सीटू केराटोमिलेसिस (LASIK) सर्जरी चश्मे या कॉन्टैक्ट लेंस से मुक्ति पाने का सबसे बेहतरीन जरिया है। 
  • वहीं यह दुनिया भर में की जाने वाली सबसे लोकप्रिय दृष्टि सुधार प्रक्रिया है। जिन लोगों को पहले से कोई आंख की समस्या नहीं है, नियंत्रित रक्त ग्लूकोज स्तर, आंखों की शक्ति में स्थिरता और सामान्य पूर्व-लेसिक परीक्षण लेसिक के लिए उपयुक्त माने जाते है।
  • लेसिक सर्जरी की बात करें तो ये आमतौर पर अलग-अलग प्रकार की दृष्टि समस्याओं के इलाज में काम आते है। इनमें निकट दृष्टिदोष (मायोपिया), दूरदर्शिता (हाइपरोपिया) और दृष्टिवैषम्य (एस्टिग्मैटिज्म) भी शामिल है। 
  • यह सर्जरी एक सामान्य प्रक्रिया है, जिससे लोग अपनी दृष्टि में सुधार कर सकते है। 
  • हालांकि, ज्यादातर 40 से ज्यादा उम्र वाले लोगों को यह जानना चाहिए कि लेसिक उनके लिए सुरक्षित है या नहीं।

अगर आप भी चश्में की समस्या से निजात पाना चाहते है, तो इसके लिए आप पंजाब में लेसिक सर्जरी का चयन करें।

क्या 40 के बाद लेसिक सर्जरी को करवाना फायदेमंद है या नहीं ?

  • यदि आप लेसिक सर्जरी को 18 वर्ष से अधिक आयु के बाद करवाते हो तो आमतौर पर आपके लिए कोई भी चिंता का विषय नहीं है, लेकिन कभी-कभी, 40 वर्ष से अधिक आयु वाले लोग चिंता करते है कि क्या लेसिक सर्जरी उनके लिए सही विकल्प है या नहीं।
  • तो आपको बता दे की जैसे-जैसे हम बड़े होते है, हमारी त्वचा और मांसपेशियों के अलावा हमारी आँखों में भी उम्र बढ़ने के लक्षण दिखाई देने लगते है। लेकिन इसके बाद भी 40 साल से ज्यादा उम्र के लोगों के लिए लेसिक सर्जरी बिलकुल सुरक्षित है। 
  • इस प्रक्रिया की सफलता दर बहुत ज्यादा है और इसे बहुत सुरक्षित माना जाता है। इसका मुख्य कारण यह है कि बढ़ती उम्र के साथ हमारी आंखों की रोशनी कम होने लगती है और हम प्रेसबायोपिया भी विकसित कर सकते है। यह तब होता है, जब आंख का लेंस पास की वस्तुओं पर ध्यान केंद्रित नहीं कर पाता है।

40 के बाद इस सर्जरी को करवाना सुरक्षित है या नहीं इसके बारे में जानने के लिए आप पंजाब में आंखों के स्पेशलिस्ट डॉक्टर का चयन जरूर से करें।

40 के बाद लेसिक सर्जरी के क्या है फायदे नज़र आते है ?

  • लेसिक के बाद आपको चश्मा या कॉन्टैक्ट लेंस पहनने की जरूरत नहीं पड़ती।
  • सर्जरी से जीवन में बाद में मोतियाबिंद होने की संभावना भी कम हो सकती है।
  • यह आपकी दृष्टि में सुधार कर सकती है।
  • आंखों की लेसिक सर्जरी अपेक्षाकृत तेज और दर्द रहित है।
  • इसके नतीजे स्थायी है।
  • यह जटिलताओं की कम दर के साथ बहुत ही सुरक्षित प्रक्रिया के रूप में जाना जाता है।

जोखिम क्या नज़र आते है, लेसिक सर्जरी के?

  • इसके जोखिम में सबसे पहले व्यक्ति को सूखी आँखों की समस्या का सामना करना पड़ सकता है। इसके अलावा सूखी आंखें असुविधा और धुंधली दृष्टि का कारण भी बन सकती हैं।
  • इस सर्जरी को करवाने के बाद अगर आप अंधेरे कमरे से अचानक उजाले की तरफ आते है तो आपको चकाचौंध जैसा दिखाई दे सकता है। 
  • यदि 40 साल से ज्यादा उम्र के मरीज इस सर्जरी का चयन करते है तो उनकी दृष्टि में कम या ज्यादा सुधार के कारण उन्हे अन्य लेजर उपचार की जरूरत हो सकती है।

वापसी लेसिक सर्जरी के सबसे जटिल जोखिम कारकों में शामिल है, जिसमें मरीज की दृष्टि समय के साथ खराब होने लगती है। और साथ ही बुजुर्ग मरीजों में यह जटिलता ज्यादा होने की संभावना हो सकती है।

सुझाव :

अगर आप 40 की उम्र के बाद इस सर्जरी का चयन करने जा रहें है तो सबसे पहले इसका चयन करने से पहले एक बार डॉक्टर से जरूर सलाह ले। उसके बाद आप इस सर्जरी को मित्रा आई हॉस्पिटल से भी करवा सकते है। 

निष्कर्ष :

40 के बाद आप चाहे तो इस सर्जरी का चयन कर सकते है, और इस सर्जरी के ज्यादा जोखिम भी नहीं है, लेकिन ध्यान रहें इस सर्जरी को करवाने के लिए आप किसी बेहतरीन आँखों के स्पेशलिस्ट डॉक्टर का चयन करें। इसके अलावा इससे संबंधित और जानकारी हासिल करने के लिए आप ‘मित्रा आई हॉस्पिटल’ से भी जानकारी हासिल कर सकते है।


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Eye Surgery Hindi

एस्टिग्मेटिज्म के क्या है – लक्षण, कारण, निदान और इलाज के तरीके ?

    April 12, 2024 9723 Views

आज के समय में जैसे-जैसे हमारे द्वारा टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जा रहा और अपने काम को भी आसान बनाया जा रहा है, तो इसका सीधा असर हमारी आँखों पर पड़ता है क्युकि टेक्नोलॉजी से जुडी जितनी भी चीजे है उसको हमारे द्वारा मोबाइल फ़ोन या लैपटॉप पर किया जाता है, जिसकी लाइट का सीधा असर हमारी आँखों पर भी पड़ता है, और इसके कारण हमारी आँखों में एस्टिग्मेटिज्म या आँखों के पुतली के आकार में परिवर्तन आ जाता है, जिसका नुकसान धुंधली दृष्टि की समस्या को पैदा करता है। तो चलिए जानने की कोशिश करते है की आखिर क्या है एस्टिग्मेटिज्म की समस्या के लक्षण, कारण, इलाज व निदान की प्रक्रिया ;

एस्टिग्मेटिज्म क्या है ?

  • एस्टिग्मेटिज्म आंखों को प्रभावित करने वाली एक गंभीर बीमारी है। आंखों में मौजूद लेंस और कॉर्निया गोल होते है। लेकिन जब यह दोनों किसी कारण अपने रूप से कम या ज्यादा गोल हो जाते है तो आंखों में जाने वाली रोशनी रेटिना पर पूर्ण रूप से केंद्रित नहीं हो पाती है जिसके कारण मरीज को नज़दीक या दूर की चीजें धुंधली दिखाई पड़ती है। 
  • आमतौर पर एस्टिग्मेटिज्म की समस्या मायोपिया (दूर की चीजें धुंधली दिखाई देना) या हाइपरोपिया (पास की चीजें धुंधली दिखाई देना) के साथ होती है। दृष्टि से संबंधित इन तीनों बीमारियों को मेडिकल की भाषा में रिफ्रैक्टिव एरर के नाम से जाना जाता है। विशेषज्ञ का मानना है कि अधिकतर मामलों में एस्टिग्मेटिज्म बच्चों में पाया जाता है। हालांकि, यह वयस्कों में भी धीरे-धीरे विकास कर सकता है। 
  • आमतौर पर एस्टिग्मेटिज्म का इलाज करने के लिए नेत्र रोग विशेषज्ञ चश्मा या कॉन्टेक्ट लेंस के इस्तेमाल का सुझाव दे सकते है।

एस्टिग्मेटिज्म के प्रकार क्या है ?

  1. इसके दो प्रकार है पहला कॉर्नियल दृष्टिवैषम्य, और ये तब होता है जब आपका कॉर्निया खराब हो जाता है।
  2. और दूसरा है लेंटिकुलर एसिग्मैटिज्म, और ये समस्या तब होती है जब आपका लेंस खराब हो जाता है।

अगर आपके आँखों की कॉर्निया ख़राब हो गई है, तो इससे बचाव के लिए आपको पंजाब में आंखों के स्पेशलिस्ट डॉक्टर का चयन करना चाहिए।

क्या कारण है एस्टिग्मेटिज्म के ?

एस्टिग्मेटिज्म के कारण बहुत है जिसके बारे में आपको जानना बहुत जरूरी है जिससे आप इस समस्या से खुद का बचाव आसानी से कर सकते है ; 

  • अनुवांशिक कारण। 
  • आंख की सर्जरी होने के कारण। 
  • आंख में चोट लगने के कारण। 
  • कम लाइट में पढ़ने के कारण। 
  • आंख से संबंधित कोई बीमारी से पीड़ित होने के कारण। 
  • कुछ मामलों में केरेटोकोनस नामक बीमारी भी इसका कारण बन सकती है।
  • लंबे समय तक मोबाइल, लैपटॉप या टीवी स्क्रीन के सामने समय बिताना और आवश्यक दूरी का ध्यान ना देने के कारण आपको इस तरह की समस्या का सामना करना पड़ सकता है।

एस्टिग्मेटिज्म के दौरान किस तरह के लक्षण नज़र आते है ?

  • चक्कर आना। 
  • सिर में दर्द का होना। 
  • दृष्टि का धुंधला होना। 
  • आंखों में दबाव का महसूस करना। 
  • किसी भी वस्तु को देखने में परेशानी का सामना करना। 
  • चीजों को देखने के लिए आंखो को सिकुड़ना। 
  • वस्तुओं के आकार को पहचानने में दिक्कत का सामना करना।

एस्टिग्मेटिज्म का निदान कैसे किया जा सकता है ?

आपका ऑप्टोमेट्रिस्ट या नेत्र रोग विशेषज्ञ कई प्रकार की आंखों की जांच करके एस्टिग्मेटिज्म का निदान करेंगे। ऑप्टोमेट्रिस्ट वह डॉक्टर होते है, जो आपकी आंखों की बीमारी या दृष्टि समस्याओं का निदान करते है। एक ऑप्थामोलोजिस्ट विज़न प्रॉब्लम्स या नेत्र रोग के लिए ट्रीटमेंट या सर्जिकल मेडिकल ट्रीटमेंट प्रोवाइड करते है। एस्टिग्मेटिज्म का निदान करने के लिए ऑप्टोमेट्रिस्ट या नेत्र रोग ऑप्थामोलोजिस्ट द्वारा कई टेस्ट किए जा सकते है, जैसे –

विजुअल एक्यूटी टेस्ट- (Visual Acuity Test)

इसमें डॉक्टर आपके सामने एक चार्ट रखेंगे। चार्ट में कई अक्षर होंगे, आपको इन अक्षरों को एक-एक करके पढ़ना होगा। जैसे-जैसे आप नीचे जाएंगे अक्षर का आकार धीरे-धीरे छोटा होता जाएगा। आपको एक आंख के सामने हाथ रखकर उन अक्षरों को पढ़ना है और इसी तरह दूसरी आंख से भी दोहराना है। यह निर्धारित करने के लिए है कि आप अक्षरों को एक निश्चित दूरी से कितनी अच्छी तरह देख सकते है।

अपवर्तन टेस्ट- (Refraction Test)

इस टेस्ट में “ऑप्टिकल रेफ्रेक्टर” नामक एक मशीन का इस्तेमाल किया जाता है। मशीन में अलग-अलग पावर के कई करेक्टीव ग्लास लेंस होते है। आपका डॉक्टर आपकी आंखों के सामने एक लेंस लाएँगे और आपको चार्ट के अक्षरों को पढ़ने के लिए कहेंगे। वह तब तक लेंस बदलते रहेंगे जब तक आपको चार्ट में लिखें हुए सभी अक्षरों की क्लियर इमेज नहीं मिल जाती।

केराटोमेट्री- (Keratometry)

इस टेस्ट में आपके कॉर्निया की वक्रता को मापने के लिए एक डिवाइस इस्तेमाल किया जाता है, जिसे केराटोमीटर कहा जाता है। यह डॉक्टर को आपके कॉर्निया में किसी भी दिक्कत का पता लगाने में मदद करता है।

एस्टिग्मेटिज्म का इलाज कैसे किया जा सकता है ? 

  • आमतौर पर एस्टिग्मेटिज्म का इलाज करने के लिए नेत्र रोग विशेषज्ञ चश्मा या कॉन्टेक्ट लेंस के इस्तेमाल का सुझाव देते है। चश्मा या कॉन्टेक्ट लेंस से एस्टिग्मेटिज्म का इलाज किया जा सकता है, लेकिन इन्हे एस्टिग्मेटिज्म का बेस्ट इलाज नहीं माना जाता है। 
  • साथ ही, काफी लोगों को हमेशा चश्मा पहनना या कॉन्टेक्ट लेंस लगाना पसंद नहीं है। ऐसे में लेसिक सर्जरी एक बेहतर विकल्प के रूप में सामने आता है। लेसिक सर्जरी एक मॉडर्न और एडवांस सर्जिकल प्रक्रिया है जिससे दृष्टि से संबंधित बीमारियां जैसे कि मायोपिया (दूर की चीजें धुंधली दिखाई देना), हाइपरोपिया (पास की चीजें धुंधली दिखाई देना) और एस्टिग्मेटिज्म का बेस्ट इलाज किया जा सकता है।
  • एस्टिग्मेटिज्म की लेसिक सर्जरी को एक अनुभवी और कुशल नेत्र सर्जन की देखरेख में पूरा किया जाता है। इस सर्जरी को शुरू करने से पहले सर्जन मरीज की आंखों में एनेस्थेटिक ड्रॉप डालते है, जिससे सर्जरी के दौरान होने वाले दर्द का खतरा खत्म हो जाता है। 
  • एनेस्थीसिया देने के बाद, सर्जन लेजर बीम की मदद से कॉर्निया को एक नया शेप दे देते है, जिसके बाद एस्टिग्मेटिज्म की समस्या खत्म हो जाती है। एस्टिग्मेटिज्म की लेसिक सर्जरी को पूरा होने में मात्र 30 मिनट का समय लगता है। इस सर्जरी के दौरान मरीज को कट या टांके नहीं आते है और ब्लीडिंग तथा दर्द का सामना भी नहीं करना पड़ता है।

अगर आप इस सर्जरी का चयन करना चाहते है तो इसके लिए आप मित्रा आई हॉस्पिटल का चयन कर सकते है।

निष्कर्ष :

एस्टिग्मेटिज्म तब होता है जब आपके कॉर्निया के आकार में कोई दिक्कत आ जाती है। या यह जन्म से हो सकता है या बाद के जीवन में उत्पन्न हो सकता है। एस्टिग्मेटिज्म का प्रमुख कारण अभी तक पहचाना नहीं गया है लेकिन कहा जाता है कि यह किसी आंख की चोट या पिछली आंख की सर्जरी के कारण हो सकता है।

एस्टिग्मेटिज्म की हल्की स्थिति के लिए किसी उपचार की आवश्यकता नहीं होती है, लेकिन गंभीर कंडिशन्स का तुरंत इलाज किया जाना चाहिए क्योंकि इसमें देरी करने से आंखों को बहुत अधिक जोखिम हो सकता है। और साथ ही इस तरह की समस्या में किसी भी तरह की आई ड्रॉप या दवाई का सेवन बिना डॉक्टर के परामर्श पर न लें।


Clear eye exam being performed at Mitraeye Hospital for accurate vision assessment.
Optometrist conducts a comprehensive eye check-up at Mitraeye Hospital for optimal eye health.
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Cataract Surgery Eye Hospital Eye Specialist Hindi

मोतियाबिंद के 7 लक्षणों को जानकर जानिए इनसे बचाव के तरीके ?

    April 6, 2024 10745 Views

मोतियाबिंद एक आम आंख की स्थिति है जो सभी उम्र के लोगों को प्रभावित कर सकती है। वहीं मोतियाबिंद की समस्या तब होती है, जब आंख का लेंस धुंधला हो जाता है, जिससे विभिन्न दृष्टि समस्याएं पैदा होती है। इस ब्लॉग में हम मोतियाबिंद के सात लक्षणों पर चर्चा करेंगे और उनसे बचाव के उपाय भी तलाशेंगे ;

मोतियाबिंद के लक्षण –

धुंधली नज़र :

मोतियाबिंद के सबसे आम लक्षणों में से एक है धुंधली दृष्टि। आप देख सकते है कि आपकी दृष्टि धुंधली या धुंधली हो गई है, जिससे स्पष्ट रूप से देखना मुश्किल हो गया है। किताब पढ़ने से लेकर कार चलाने तक, यह आपके दैनिक जीवन पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है।

मोतियाबिंद के कारण होने वाली धुंधली दृष्टि को रोकने के लिए, अपनी आँखों को हानिकारक यूवी किरणों से बचाना आवश्यक है। बाहर जाते समय हमेशा यूवी सुरक्षा वाले धूप का चश्मा पहनें।

लुप्त होते रंग :

मोतियाबिंद के कारण रंग फीके या कम चमकीले दिखाई दे सकते है। आप देख सकते है कि वस्तुएं अपनी सामान्य रंग तीव्रता खो देती है। यह लक्षण विभिन्न रंगों के बीच अंतर करना चुनौतीपूर्ण बना सकता है।

रंग को फीका पड़ने से बचाने के लिए, एंटीऑक्सिडेंट से भरपूर स्वस्थ आहार बनाए रखें, क्योंकि वे मोतियाबिंद के विकास के जोखिम को कम करने में मदद कर सकते है। फल और सब्जियाँ जैसे खाद्य पदार्थ उत्कृष्ट विकल्प है।

प्रकाश के प्रति संवेदनशीलता :

मोतियाबिंद आपकी आँखों को प्रकाश के प्रति अधिक संवेदनशील बना सकता है। तेज धूप या कृत्रिम प्रकाश के संपर्क में आने पर आपको असुविधा या चकाचौंध का अनुभव हो सकता है।

प्रकाश के प्रति संवेदनशीलता को रोकने के लिए, ध्रुवीकृत लेंस वाले धूप का चश्मा पहनें, जो चमक को कम कर सकता है और बाहरी गतिविधियों को अधिक आरामदायक बना सकता है।

आंखों को चोट से बचाएं :

मोतियाबिंद होने पर जितना हो सकें आपको अपनी आंखों को चोट लगने से बचाना चाहिए।

रात्रि दृष्टि में कठिनाई :

मोतियाबिंद कम रोशनी की स्थिति, जैसे रात में, स्पष्ट रूप से देखने की आपकी क्षमता को भी प्रभावित कर सकता है। आपको रात में गाड़ी चलाने या कम रोशनी वाली जगहों पर नेविगेट करने में कठिनाई हो सकती है।

रात्रि दृष्टि समस्याओं को रोकने के लिए, नियमित रूप से आंखों की जांच कराना महत्वपूर्ण है। मोतियाबिंद का शीघ्र पता लगाने से समय पर उपचार और आपकी रात्रि दृष्टि के बेहतर संरक्षण की अनुमति मिलती है।

दोहरी दृष्टि :

मोतियाबिंद से दोहरी दृष्टि हो सकती है, जहां आपको एक ही वस्तु की दो छवियां दिखाई देती है। यह लक्षण भटकाव पैदा करने वाला हो सकता है और पढ़ने या टीवी देखने जैसे कार्यों को कठिन बना सकता है।

दोहरी दृष्टि को रोकने के लिए, नियमित व्यायाम और संतुलित आहार सहित स्वस्थ जीवन शैली बनाए रखें। ये आदतें समग्र नेत्र स्वास्थ्य में योगदान कर सकती है।  

नुस्खे में बार-बार बदलाव :

यदि आप पाते है कि आपके चश्मे या कॉन्टैक्ट लेंस का नुस्खा बार-बार बदलता है, तो यह मोतियाबिंद का संकेत हो सकता है। लेंस का धुंधलापन आपकी दृष्टि में उतार-चढ़ाव पैदा कर सकता है। और इस उतार-चढ़ाव को कम करने के लिए आपको मोतियाबिंद का इलाज करवा लेना चाहिए।

नुस्खे में बार-बार बदलाव को रोकने के लिए, आवश्यक है की आप सुरक्षात्मक चश्में को पहने और अपनी आंखों को चोट से बचाएं, खासकर उन गतिविधियों के दौरान जो आपकी आंखों को खतरे में डाल सकती है।

मोतियाबिंद से बचाव –

मोतियाबिंद उम्र बढ़ने की प्रक्रिया का एक स्वाभाविक हिस्सा है, और इसमें ऐसे कई कदम है जो आप अपने जोखिम को कम करने और उनके विकास को धीमा करने के लिए उठा सकते है, जैसे ;

एक संतुलित आहार खाएं :

अपने दैनिक भोजन में विभिन्न प्रकार के फल और सब्जियाँ शामिल करें। ये खाद्य पदार्थ एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होते है, जो आपकी आंखों को मोतियाबिंद से बचाने में मदद कर सकते है।

धूप के चश्मे पहने :

यूवी सुरक्षा वाले धूप का चश्मा पहनकर अपनी आंखों को हानिकारक यूवी किरणों से बचाएं। यह सरल कदम मोतियाबिंद और अन्य नेत्र स्थितियों को रोकने में काफी मदद कर सकता है।

धूम्रपान से बचें :

धूम्रपान मोतियाबिंद के लिए एक ज्ञात जोखिम कारक है। धूम्रपान छोड़ने या कभी शुरू न करने से मोतियाबिंद विकसित होने की संभावना काफी कम हो सकती है।

शराब का सेवन सीमित करें :

अत्यधिक शराब के सेवन को मोतियाबिंद बनने से जोड़ा गया है। इस जोखिम को कम करने के लिए संयम महत्वपूर्ण है।

नियमित नेत्र जांच करवाए :

अपनी आंखों के स्वास्थ्य की निगरानी करने और समय पर उपचार के लिए मोतियाबिंद का शीघ्र पता लगाने के लिए ऑप्टोमेट्रिस्ट या नेत्र रोग विशेषज्ञ के साथ नियमित रूप से आंखों की जांच कराएं।

अगर आप मोतियाबिंद से खुद का बचाव चाहते है तो इसके लिए आपको पंजाब में आंखों के स्पेशलिस्ट डॉक्टर का चयन करना चाहिए।

मोतियाबिंद के इलाज के लिए बेस्ट हॉस्पिटल !

मोतियाबिंद की समस्या काफी गंभीर मानी जाती है, इसलिए अगर आप इस समस्या का सामना कर रहें है तो इससे बचाव के लिए आपको मित्रा आई हॉस्पिटल का चयन करना चाहिए।

अंत में :

मोतियाबिंद कई ध्यान देने योग्य लक्षणों के साथ एक सामान्य आंख की स्थिति है। जबकि उम्र से संबंधित मोतियाबिंद को पूरी तरह से रोकना मुश्किल है, वहीं उपरोक्त सरल कदम आपके जोखिम को कम करने और आंखों के बेहतर स्वास्थ्य को बनाए रखने में मदद कर सकते है। सक्रिय उपाय करके, आप स्पष्ट दृष्टि और जीवन की बेहतर गुणवत्ता का आनंद भी ले सकते है।


बिना दवाई के एक्सरसाइज ने आँखों की रोशनी को दिया बढ़ावा !
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कम या धुंधला दिखता है तो आँखों की रोशनी को तेज़ करना हुआ अब और भी आसान

    January 21, 2024 113537 Views

आंखों के रोशनी की भूमिका हमारे दैनिक कार्य में :

 आज के इस लेखन में हम आँखों को स्वस्थ्य कैसे रखेगे उसके बारे में बात करेंगे…

  • ये बात सत्य है कि आंखे एहम भूमिका निभाती हैं, हमारे दैनिक के कार्य को सम्पन करने में। फिर चाहे वो कार्य छोटा हो या बड़ा।
  • तो वही अगर आंखे हमारी इतनी मदद करती है तो हमारा भी फ़र्ज़ बनता हैं कि हम भी इनका भली भाँति से ख्याल रखें, क्युकि आंखे एहम भूमिका निभाती है हमारे शरीर मे।

आइये जानते हैं आँखों से जुडी स्वस्थ एक्सरसाइज कौन सी हैं ?

  आँखों को स्वस्थ्य रखने में एक्सरसाइज के साथ योगासन भी काफी सहायक माना जाता हैं…

  आंख छपकाना एक ऐसी एक्सरसाइज हैं जिसमें 10 सेकंड के लिए आँखों को तेज़ी से झपकाएं और 20 सेकंड आंखे बंद करके उन्हें आराम दें। इस प्रक्रिया को 4-5 बार दोहराना चाहिए

  • हथेली से आंख को ढंकना 5 से 10 मिनट के लिए।
  • आंखों को ऊपर-नीचे की और घुमाना।
  • भस्त्रिका प्राणायाम ये योगासन हैं। इसका असर सीधा हमारे फेफड़े, कानों, नाक और आंखों पर होता हैं।
  • त्राटक भी एक योगासन है जो हमारी आँखों को सही रखने में एहम भूमिका निभाता हैं और इस योगासन मे किसी एक वस्तु को बिना हिल्ले टकटकी लगाकर देखना होता हैं।
  • आँखों की स्वस्थ्य एक्सरसाइज के साथ ही इसको और स्वस्थ्य रखने के लिए आंखों के स्पेशलिस्ट डॉक्टर जोकि पंजाब में हैं उनसे सुझाव ले सकते हैं |

स्वस्थ आँखों के लिए अच्छे आहार का सेवन :

आँखों को स्वस्थ रखने के लिए कुछ डाइट को हम निम्न प्रस्तुत करेंगे ताकि आप अपनी आँखों को स्वस्थ्य रख सके। इन डाइट्स को फॉलो करके…

  • हरी पत्तेदार सब्जियां।
  • खट्टे फल और कुछ सामान्यः फलों को अपने आहार में शामिल करे जैसे संतरे, अंगूर, नींबू और जामुन तो वही पपीते का सेवन।
  • नट्स का सेवन।
  • अंडे का सेवन।
  • बीन्स (सेमफली) का सेवन।
  • अखरोट और सूरजमुखी के बीज का सेवन।

कौन से विटामिन्स हमारे आँखों के लिए लाभकारी माने जाते हैं ?

  आँखों को स्वस्थ रखने में विटामिन्स एहम भूमिका निभाते हैं। तो यदि आप इन विटामिन्स को अपने आहार में शामिल नहीं कर रहे तो आज ही इन्हे अपने आहार में शामिल करके अपने आँखों को स्वस्थ और सुरक्षित रखें…

  • विटामिन ए, बी विटामिन्स, विटामिन सी और विटामिन इ को आंखों के लिए लाभदायक माना जाता है. यदि हम इन विटामिन्स से भरपूर आहार का सेवन करे, तो हमारे शरीर और आँखों को काफी अच्छा रिजल्ट देखने को मिलेगा |

 

आँखों को स्वस्थ रखने के लिए किन बातो का रखे ध्यान :

टीवी या कंप्यूटर स्क्रीन्स को देखने के बीच में कुछ समय का अंतराल जरूर लें।

बहुत ज्यादा रौशनी में आने से पहले आँखों में सनग्लासेस पहनें।

आँखों को होने वाले नुकसान से बचाने के लिए स्मोकिंग का इस्तेमाल न करें।

अपनी आँखों को आराम देने के लिए एक अच्छी नींद लें।

इन सब के बाद भी यदि आप आँखों की रोशनी की समस्या से परेशान हैं, तो लेसिक सर्जरी पंजाब करवाने का करे चुनाव |

निष्कर्ष :

उपरोक्त लिखी सारी बातें अगर आपने पढ़ी है। तो आँखों को लेकर लापरवाही न करें बल्कि किसी अच्छे आँखों के डॉक्टर्स का चुनाव करें। या फिर आप मित्रा आई हॉस्पिटल और लासिक लेज़र सेंटर से भी अपना उपचार करवा सकते हैं | क्युकि यहाँ के डॉक्टर्स हर तरह से आँखों की सर्जरी में नवी तकनीकों का इस्तेमाल कर, मरीज़ो को आँखों से जुडी परेशानी से आराम पहुंचाते हैं।


मायोपिया और दृष्टिवैषम्य के लिए लेसिक सर्जरी
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मायोपिया और दृष्टिवैषम्य के लिए लेसिक सर्जरी के लाभ और जोखिम

    January 9, 2024 11431 Views

लसिक सर्जरी एक लोकप्रिय और प्रभावी सर्जिकल प्रक्रिया है जिसका उपयोग मायोपिया और दृष्टिवैषम्य जैसी दृष्टि समस्याओं को ठीक करने के लिए किया जाता है। निकट दृष्टिदोष के रूप में भी जाना जाने वाला मायोपिया एक ऐसी स्थिति है जहां दूर की वस्तुएं धुंधली दिखाई देती हैं, जबकि दृष्टिवैषम्य एक आंख की स्थिति है जो प्रभावित करती है कि आंख प्रकाश को कैसे केंद्रित करती है।

लसिक सर्जरी दृष्टि में सुधार करने के लिए कॉर्निया, जो आंख का स्पष्ट सामने वाला हिस्सा है, को फिर से आकार देने के लिए लेजर का उपयोग करती है।

जबकि लेसिक सर्जरी पिछले कुछ वर्षों में अधिक आम हो गई है, यह तय करने से पहले कि यह आपके लिए सही है, इस प्रक्रिया के लाभ और जोखिम दोनों को समझना महत्वपूर्ण है।

निकट दृष्टि दोष (मायोपिया) – Myopia (Nearsightedness) और दृष्टिवैषम्य (Astigmatism) के लिए लेसिक सर्जरी के लाभ

बेहतर दृष्टि –

मायोपिया और दृष्टिवैषम्य के लिए लेसिक सर्जरी के मुख्य लाभों में से एक यह है कि यह आपकी दृष्टि में सुधार कर सकता है। प्रक्रिया के बाद, कई रोगी स्पष्ट दृष्टि की रिपोर्ट करते हैं और चश्मे या कॉन्टैक्ट लेंस की आवश्यकता के बिना बेहतर देखने में सक्षम होते हैं।

 त्वरित प्रक्रिया –

लेसिक सर्जरी आमतौर पर एक त्वरित प्रक्रिया होती है, जिसमें प्रति आंख केवल 15 मिनट लगते हैं। इसका मतलब है कि आप सर्जरी के बाद अपेक्षाकृत जल्दी अपनी दैनिक गतिविधियों में वापस आ सकते हैं।

न्यूनतम दर्द –

लेसिक सर्जरी एक अपेक्षाकृत दर्द रहित प्रक्रिया है। प्रक्रिया के बाद मरीजों को कुछ परेशानी या हल्के दर्द का अनुभव हो सकता है, लेकिन यह आमतौर पर अल्पकालिक होता है और इसे ओवर-द-काउंटर दर्द दवाओं के साथ प्रबंधित किया जा सकता है।

 स्थायी परिणाम –

लेसिक सर्जरी के परिणाम आमतौर पर स्थायी होते हैं। प्रक्रिया के बाद, अधिकांश रोगी चश्मे या कॉन्टैक्ट लेंस की आवश्यकता के बिना स्पष्ट रूप से देखने में सक्षम होते हैं।

आत्मविश्वास में वृद्धि –

बेहतर दृष्टि से आत्मविश्वास में वृद्धि और जीवन की बेहतर गुणवत्ता हो सकती है। कई मरीज़ लेसिक सर्जरी के बाद अधिक आत्मविश्वास और आत्मविश्वास महसूस करने की रिपोर्ट करते हैं।

मायोपिया और दृष्टिवैषम्य के लिए लेसिक सर्जरी के जोखिम

 सूखी आंखें –

लेसिक सर्जरी के सबसे आम दुष्प्रभावों में से एक सूखी आंखें हैं। यह तब होता है जब आंखें उन्हें लुब्रिकेटेड रखने के लिए पर्याप्त आंसू पैदा करने में सक्षम नहीं होती हैं। मरीजों को उनकी आंखों में जलन या खुजली का अनुभव हो सकता है और लक्षणों को प्रबंधित करने के लिए आंखों की बूंदों का उपयोग करने की आवश्यकता हो सकती है।

 चकाचौंध और प्रभामंडल –

कुछ रोगियों को सर्जरी के बाद रोशनी के चारों ओर चकाचौंध या प्रभामंडल का अनुभव हो सकता है। इससे रात में या कम रोशनी की स्थिति में स्पष्ट रूप से देखना मुश्किल हो सकता है।

 ओवरकरेक्शन या अंडरकरेक्शन –

कुछ मामलों में, लेसिक सर्जरी के परिणामस्वरूप दृष्टि समस्या का ओवरकरेक्शन या अंडरकरेक्शन हो सकता है। इसका मतलब है कि प्रक्रिया के बाद भी रोगी को चश्मा या कॉन्टैक्ट लेंस पहनने की आवश्यकता हो सकती है।

 फ्लैप संबंधी जटिलताएं –

लेसिक प्रक्रिया के दौरान कॉर्निया में एक पतला फ्लैप बन जाता है। दुर्लभ मामलों में, यह फ्लैप विस्थापित या झुर्रीदार हो सकता है, जिससे दृष्टि संबंधी समस्याएं हो सकती हैं।

संक्रमण –

किसी भी सर्जिकल प्रक्रिया की तरह, लेसिक सर्जरी में संक्रमण का खतरा होता है। सर्जरी के बाद संक्रमण को रोकने के लिए मरीजों को एंटीबायोटिक आई ड्रॉप्स का उपयोग करने की आवश्यकता हो सकती है।

निष्कर्ष

मायोपिया और दृष्टिवैषम्य जैसी दृष्टि समस्याओं को ठीक करने के लिए लेसिक सर्जरी एक अत्यधिक प्रभावी तरीका हो सकता है। हालांकि, किसी भी सर्जिकल प्रक्रिया की तरह, यह निर्णय लेने से पहले कि क्या यह आपके लिए सही है, लाभ और जोखिम दोनों को समझना महत्वपूर्ण है।

जबकि लेसिक सर्जरी आम तौर पर सुरक्षित और प्रभावी होती है, एक योग्य और अनुभवी सर्जन का चयन करना महत्वपूर्ण है जो इस बारे में सूचित निर्णय लेने में आपकी सहायता कर सकता है कि यह प्रक्रिया आपके लिए सही है या नहीं।

मित्रा आई हॉस्पिटल पंजाब का सबसे अच्छा नेत्र अस्पताल है जो लेसिक सर्जरी में आपकी मदद कर सकता है।


किन कारणों से आंखों में दर्द की समस्या होती है ?
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आंखों में दर्द के कारण कौन-सा खतरा बढ़ सकता है !

    November 15, 2023 69357 Views

लोगों में आंखों के दर्द से जुडी काफी बीमारियां देखने को मिलती है, वही आंखों में दर्द के साथ आपके सिर में भी दर्द की समस्या बनी रहती है तो इससे बचाव के लिए सबसे पहले आपको इसके कारणों के बारे में जानना होगा ताकि आप जान सके की आपके सिर दर्द का आंखों में दर्द के साथ क्या संबंध है, तो आप अगर आंखों में दर्द के कारणों के बारे में जानना चाहते है तो आर्टिकल के साथ अंत तक बने रहे ;

आंखों और सिर में दर्द होने के क्या कारण है ?

  • इसका पहला कारण है साइनस वही साइनस कई दफा संक्रमण भी हो सकता है, साइनस में आंखों, माथे, गाल, नाक और ऊपर के दांतों में दर्द हो सकता है। वही ये दर्द कई बार पूरे दिन आपको परेशान कर सकता है, इसके अलावा साइनसाइटिस अक्सर एलर्जी की वजह से बढ़ती है।
  • माइग्रेन भी आँखों और सिर में दर्द के कारणों में गिना जाता है, वही अगर आपको सिर में एक तरफ और कभी-कभी एक आंख के पीछे बहुत दर्द होता है तो ये माइग्रेन के लक्षण है। इसके अलावा ये दर्द कई बार 72 घंटे तक भी रह सकता है, बात करें इस दर्द की तो इसमें आपको जी मिचलाने की समस्या, नाक बहने जैसा भी महसूस हो सकता है. प्रकाश, ध्वनि या किसी गंध से भी आपको एलर्जी हो सकती है। 
  • तनाव भी सिर और आँखों में दर्द की एक महत्वपूर्ण वजह है। वही इस दर्द की बात करें तो इससे ज्यादा ग्रस्त महिलाएं रहती है। वही जब हमारे द्वारा तनाव लिया जाता है तो दर्द सिर के दोनों तरफ या आपके सिर के सामने, आंखों के पीछे हो सकता है।
  • कई दफा क्लस्टर सिर दर्द में भी आंखों के आसपास तेज दर्द होता है, वही ज्यादातर एक आंख के आसपास ही दर्द रहता है. दर्द के साथ आंख से पानी आना और लाल होने की समस्या भी हो सकती है। हालांकि ये आम सिर दर्द नहीं है और ज्यादातर पुरुषों को यह दर्द प्रभावित करता है।

इन सब कारणों को जानने के बाद अपने आँखों और सिर में दर्द की समस्या से बचाव के लिए पंजाब में आंखों के स्पेशलिस्ट डॉक्टर से संपर्क करें।

आँखों में दर्द का होना किस विटामिन की कमी को दर्शाता है !

  • कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि विटामिन-ए और बी12 की कमी होने से आंखों में दर्द की समस्या उत्पन्न होती है और कई बार ये दर्द आँखों की रोशनी को भी प्रभावित करता है, वही इन विटामिन की कमी को पूरा न किया जाए तो आंखों की रोशनी तक जा सकती है।
  • अगर आपको इन विटामिन की कमी की वजह से दूर और पास का साफ़ दिखाई नहीं देता तो इसके लिए आप पंजाब में लेसिक सर्जरी का भी चयन कर सकते है।

आँखों की समस्या से निजात दिलवाने के लिए बेस्ट हॉस्पिटल !

  • अगर आप या आपके परिजन में से कोई भी आँखों में दर्द की समस्या से परेशान है तो इसके लिए आपको मित्रा आई हॉस्पिटल के संपर्क में आना चाहिए। 
  • वही इस हॉस्पिटल में आधुनिक उपकरणों की मदद से मरीजों के आँखों से जुडी समस्या का समाधान किया जाता है। 
  • यहाँ के अनुभवी डॉक्टर की बात करें तो उन्हें भी अपनी फील्ड का काफी सालों का अनुभव है। 
  • वही यहाँ के वरिष्ठ डॉक्टर, “डॉ हरिंदर मित्रा” को भी आँखों में सर्जरी को करने का काफी सालो का अनुभव है। 

सारांश :

इस पूरे लेख को लिखने का मकसद आपको बस जागरूक करना है की अगर आपको आँखों से जुडी किसी भी तरह की परेशानी आ जाए तो कैसे आप खुद का बचाव कर सकते है, तो आप अगर आँखों से जुडी समस्या का समाधान पाना चाहते है तो इसके लिए आपको आर्टिकल को अंत तक पढ़ना होगा, वो भी खुद की बेहतरीन सेहत के लिए।


Eye Drocotr Image
Diagnostic eye examination at Mitra Eye Hospital for comprehensive vision care and eye health services.
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Hindi Macular Edema

मैक्यूलर एडिमा क्या है – जानिए इसके लक्षण, कारण बचाव व इलाज के तरीके?

    November 8, 2023 6010 Views

Macular Edema: मैक्यूलर एडिमा एक ऐसी स्थिति है, जो मैक्युला को प्रभावित करती है, जो रेटिना के केंद्र में स्थित आंख का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। मैक्युला तीव्र, केंद्रीय दृष्टि के लिए जिम्मेदार है, जो व्यक्तियों को विवरण स्पष्ट रूप से देखने की अनुमति देता है। जब मैक्युला में द्रव जमा हो जाता है, तो इससे केंद्रीय दृष्टि में सूजन, धुंधलापन और विकृति आ जाती है। यह स्थिति अक्सर विभिन्न नेत्र रोगों या स्थितियों के परिणामस्वरूप उत्पन्न होती है, तो आइये जानते है क्या है मैक्यूलर एडिमा के लक्षण, कारण, इलाज और बचाव के तरीकों ;

मैक्यूलर एडिमा क्या है ?

हमारे रेटिना के मध्य भाग को मैक्युला कहा जाता है। ज्यादातर फोटोरिसेप्टर मैक्युला में ही होते है। मैक्युला के कारण ही हम पास और दूर की चीज़ों को अच्छी तरह देख पाते है। अगर किसी वजह से इस हिस्से में तरल पदार्थ जमा हो जाए या सूजन आ जाए, तो आंखों को नुकसान पहुंचता है। कभी-कभी मैक्युला में ब्लड भी जमा हो सकता है। अगर समय पर इलाज न किया जाए, तो ये सभी मैकुलर रोग आंखों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकते है।

 

रेटिना क्या है ?

रेटिना हमारी आंख के पीछे अंदरूनी हिस्से में मौजूद एक परत होती है, जो कैमरे की फिल्म की तरह काम करती है। इसमें बहुत सारी फोटोरिसेप्टर कोशिकाएं होती है, जो प्रकाश किरणों को इकट्टा कर मस्तिष्क तक भेजती है। मस्तिष्क इसे एक छवि की तरह समझता है और इसी तरह हम चीजों को देखते भी है।

 

लक्षण क्या है मैक्यूलर एडिमा के ? 

  • मैक्यूलर एडिमा की शुरुआत धुंधली या लहरदार केंद्रीय दृष्टि, रंग धुले हुए दिखना, पढ़ने में कठिनाई और चेहरों को पहचानने में कठिनाई जैसे लक्षणों के माध्यम से प्रकट हो सकती है। 
  • दृश्य गड़बड़ी हल्के ढंग से शुरू हो सकती है और धीरे-धीरे बढ़ सकती है, जिससे दोनों आंखें प्रभावित हो सकती है।

मैक्यूलर एडिमा होने पर अगर आप दोनों आँखों की दृष्टि खो बैठे है तो इसके इलाज के लिए आपको पंजाब में आंखों के स्पेशलिस्ट डॉक्टर का चयन करना चाहिए।

 

मैक्यूलर एडिमा के कारण क्या है ? 

  • मैक्यूलर एडिमा आमतौर पर अन्य आंखों की स्थितियों से जुड़ी होती है, जैसे डायबिटिक रेटिनोपैथी, जहां उच्च रक्त शर्करा के स्तर के कारण रेटिना में रक्त वाहिकाएं क्षतिग्रस्त हो जाती है। 
  • दूसरा कारण उम्र से संबंधित मैक्यूलर डिजनरेशन (एएमडी) है, जहां मैक्युला उम्र के साथ खराब हो जाता है। इसके अलावा, आंख को प्रभावित करने वाली सूजन संबंधी स्थितियां, जैसे यूवाइटिस और रेटिना के आसपास की नसों में रुकावट भी मैक्यूलर एडिमा का कारण बन सकती है।

यदि आप कुछ भी देखने में धुंधलेपन की समस्या का सामना कर रहें है, तो इसके बचाव के लिए आपको मोतियाबिंद का इलाज जरूर से करवाना चाहिए।

 

मैक्यूलर एडिमा में रोकथाम क्या है ? 

मैक्यूलर एडिमा के कुछ कारणों, जैसे उम्र बढ़ने, को रोका नहीं जा सकता है, उचित दवा, आहार और नियमित जांच के माध्यम से मधुमेह जैसी अंतर्निहित स्थितियों को प्रबंधित करने से जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है। नियमित नेत्र परीक्षण आवश्यक है, क्योंकि डायबिटिक रेटिनोपैथी जैसी स्थितियों का शीघ्र पता लगाने से मैक्यूलर एडिमा के विकास को रोकने के लिए समय पर हस्तक्षेप की अनुमति मिलती है।

 

उपचार के तरीके क्या है ? 

  • मैक्यूलर एडिमा का उपचार इसके अंतर्निहित कारण पर निर्भर करता है। डायबिटिक मैक्यूलर एडिमा के लिए, उपचार में आंखों में दवाओं के इंजेक्शन शामिल हो सकते है जो सूजन को कम करते है और तरल पदार्थ के रिसाव को रोकते है। 
  • लीक हो रही रक्त वाहिकाओं को सील करने के लिए लेजर थेरेपी भी एक विकल्प है। उम्र से संबंधित कुछ बातें, असामान्य रक्त वाहिकाओं के विकास को रोकने के लिए आमतौर पर एंटी-वीईजीएफ दवाओं का उपयोग किया जाता है। 
  • कॉर्टिकोस्टेरॉइड्स दवाओं का एक अन्य वर्ग है, जिसे सूजन और सूजन को कम करने के लिए आंखों में इंजेक्ट किया जा सकता है।
  • इसके अतिरिक्त, जीवनशैली में कुछ बदलाव और घरेलू उपचार मैक्यूलर एडिमा को प्रबंधित करने में मदद कर सकते है। 
  • एंटीऑक्सीडेंट और ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर आहार आंखों के स्वास्थ्य में योगदान दे सकता है। धूप का चश्मा पहनकर आंखों को अत्यधिक यूवी जोखिम से बचाना भी फायदेमंद हो सकता है।
  • मैक्यूलर एडिमा से पीड़ित लोगों के लिए किसी नेत्र विशेषज्ञ से नियमित निगरानी और बेहतरीन कार्रवाई आवश्यक है। यह सुनिश्चित करने के लिए कि स्थिति का प्रभावी ढंग से प्रबंधन किया जाए, उपचार योजना का पालन करना और सभी अनुशंसित नियुक्तियों में भाग लेना महत्वपूर्ण है।

 

मैक्यूलर एडिमा के इलाज के लिए बेस्ट हॉस्पिटल !

अगर आप आँखों का इलाज और अपनी दृष्टि को वापिस पाना चाहते है, तो इसके लिए आपको मित्रा आई हॉस्पिटल का चयन करना चाहिए।

 

निष्कर्ष :

मैक्यूलर एडिमा किसी की दृष्टि और दैनिक जीवन पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकती है। हालाँकि कुछ कारणों को रोका नहीं जा सकता है, लेकिन शीघ्र पता लगाना, अंतर्निहित स्थितियों का प्रबंधन करना और समय पर उपचार इस स्थिति की गंभीरता और प्रगति को काफी कम कर सकता है। याद रखें, समग्र स्वास्थ्य का ख्याल रखना और नियमित जांच के माध्यम से आंखों के स्वास्थ्य के बारे में सतर्क रहना अच्छी दृष्टि बनाए रखने और मैक्यूलर एडिमा को प्रभावी ढंग से प्रबंधित करने के लिए महत्वपूर्ण कदम है।


आंखों-के-नीचे-आएं-सूजन-को-कैसे-करें-आसानी-से-कम
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सूजी हुई आँखों से बचाव के क्या है – लक्षण, कारण, बचाव व घरेलु उपचार ?

    November 5, 2023 8839 Views

देर तक जागने और काम खत्म करने के अलावा, पेरिऑर्बिटल पफनेस या सूजी हुई आँखों के कई कारण अलग-अलग होते है। वहीं इस ब्लॉग के माध्यम से हम इस स्थिति को बेहतर ढंग से समझने के लिए आंखों की सूजन के कारणों, लक्षणों और उपचारों के बारे में विस्तार से जानेंगे ;

क्या है पफी या सूजी हुई आंखें ?

  • सूजी हुई आंखें एलर्जी, संक्रमण, सूजन और शारीरिक जलन का एक सामान्य लक्षण है। आंखों के आस-पास के कोमल ऊतकों में अतिरिक्त तरल पदार्थ के कारण सूजी हुई आंखें होती है। 
  • सूजी हुई आँखों के लिए चिकित्सा शब्द केमोसिस है। सूजी हुई आंखें आंख के क्षेत्र को प्रभावित करने वाली स्थितियों में या सामान्य सर्दी या फीवर जैसी अधिक सामान्यीकृत स्थितियों के साथ हो सकती है।
  • आंख की सतह की सूजन और पलकें (ब्लेफेराइटिस) सूजी हुई आंखों के सामान्य कारण है। अन्य सामान्य कारण जैसे रोना, नींद की कमी, या आँखों का अत्यधिक मलना है। 
  • कारण के आधार पर, एक या दोनों आँखों में सूजन हो सकती है और प्रभावित आँखों से लाली, दर्द, खुजली, अत्यधिक आंसू का उत्पादन, या अन्य प्रकार के निर्वहन बैग के साथ हो सकते है। पेरिओरिबिटल पफनेस “फूली आंखों” के लिए चिकित्सा का एक शब्द है। 

सूजी हुई आँखों के बारे में जानने के बाद इसको हल्के में लेने की भूल कृपया न करें, बल्कि समय रहते इससे बचाव के लिए पंजाब में आंखों के स्पेशलिस्ट डॉक्टर का चयन करें। 

सूजी हुई आँखों के लक्षण क्या है ?

  • नेत्रगोलक में उभार का आना। 
  • प्रकाश के प्रति संवेदनशील होना। 
  • आँखों में लालपन की समस्या।   
  • अत्यधिक आँसू का आना। 
  • चोट लगने जैसी समस्या का सामना करना। 
  • खुजली की समस्या। 
  • चेहरे में अन्य सूजन की समस्या आदि।

अगर सूजी हुई आंखें ज्यादा गंभीर हो जाए, और इसी गंभीरता के कारण व्यक्ति कुछ भी देखने में खुद को असमर्थ समझे तो इससे बचाव के लिए आपको पंजाब में लेसिक सर्जरी का चयन करना चाहिए।

सूजी हुई आँखों के कारण क्या है ? 

  • चिकित्सा भी इसके कारण में शामिल हो सकता है। 
  • आँखों में बैक्टीरियल या वायरल के कारण आंखें संक्रमित हो जाती है या उनमे सूजन की समस्या उत्पन्न हो जाती है।
  • प्राकृतिक के कारण भी आंखें सूज जाती है। 
  • लाइफ स्टाइल भी आँख सूजने के कारणों में शामिल है। 
  • वहीं पेरिओरिबिटल एडिमा के चिकित्सा कारणों में शामिल है :
  • मोनोन्यूक्लिओसिस। 
  • आँखों की एलर्जी। 
  • त्वचा संबंधी विकार। 
  • थायराइड का रोग। 
  • पेरिओरिबिटल सेल्युलाइटिस की समस्या। 
  • गुर्दे का रोग। 
  • आंसू वाहिनी की समस्या का सामना करना। 
  • आँखों में घाव का लगना।

सूजी हुई आँखों से कैसे करें खुद का बचाव ?

  • अपनी आंखों को मलने से जितना हो सकें बचें। क्युकी अगर आप सूजी हुई आंखें मलेगे तो उसमे सूजन और बढ़ेगी।
  • बंद आंखों की पलकों पर ठंडा पानी या ठंडे पानी के छींटे मारने से आंखों की सूजन को कम किया जा सकता है।
  • अपने कॉन्टैक्ट लेंस को तब तक निकालें रखें, जब तक कि आंखों की सूजन कम न हो जाए।

सूजी हुई आँखों का निदान कैसे करें ?

  • सूजी हुई आँखों के निदान में सबसे पहले आपका नेत्र रोग विशेषज्ञ आपके मेडिकल इतिहास, जीवनशैली और लक्षणों के बारे में प्रश्न पूछ कर आपकी स्थिति का आकलन करेंगे। 
  • आपके लक्षणों के आधार पर त्वचा बायोप्सी, रक्त परीक्षण, एलर्जी परीक्षण और इमेजिंग परीक्षण, जैसे – अतिरिक्त परीक्षणों की सिफारिश की जा सकती है।

सूजी हुई आँखों का इलाज कैसे किया जाता है ?

  • इसके इलाज को मरीज़ दो तरीके से करवा सकते है, पहला घरलू उपचार और दूसरा स्थिति गंभीर होने पर व्यक्ति को डॉक्टरी सहायता लेनी चाहिए।
  • वही घरेलु उपाय की बात करें, तो आपको कम नमक, पौष्टिक आहार लेने और बहुत सारा पानी पीने की सलाह दी जाएगी। 
  • यदि आपकी आंखों में सूजन के कारण एलर्जी है, तो आमतौर पर कोल्ड कंप्रेस या एंटीहिस्टामाइन की सिफारिश की जाएगी। और यदि यह किसी संक्रमण के कारण होता है, तो एंटीबायोटिक्स सूजन का इलाज करने का एक बेहतरीन तरीका है।   
  • यदि किसी अंतर्निहित स्थिति के कारण आपकी स्थिति गंभीर होते जा रहीं है, तो आपको उस मूल कारक का इलाज करने के लिए दवा और उपचार की आवश्यकता होगी जो आपकी आंखों में सूजन का कारण बन रहा है। 
  • दिन के अंत में, सूजी हुई आँखें परेशान करने वाली और असुविधाजनक होती है। क्युकि यह आपके सामान्य दिन बिताने की आपकी क्षमता को सीमित कर सकती है। इसलिए, अपने पेरिऑर्बिटल पफनेस के निदान और उपचार के लिए हमेशा आपको एक नेत्र चिकित्सक से परामर्श करने की सलाह दी जाती है। 

आँखों की समस्या से बचाव के लिए बेस्ट हॉस्पिटल !

अगर आप वाकई में अपनी सूजी हुई आँखों से बहुत ज्यादा परेशान है, तो इससे बचाव के लिए आपको मित्रा आई हॉस्पिटल का चयन करना चाहिए, वहीं आँखों में किसी भी तरह की समस्या आने पर आपको कोई भी उपाय खुद से नहीं अपनाना चाहिए, बल्कि एक दफा डॉक्टर से जरूर सलाह लें।   


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