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यह गंभीर समस्या आपकी आंखों की रोशनी पर असर डाल सकती है, डॉक्टर से जाने जाने इसके कारण और लक्षण

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यह गंभीर समस्या आपकी आंखों की रोशनी पर असर डाल सकती है, डॉक्टर से जाने जाने इसके कारण और लक्षण

    September 1, 2025 2995 Views

आंखे हमारे शरीर के मुख्य अंगों में से एक हैं। दरअसल आंखें हमारे जीवन में रंगों के महत्व को बनाए रखने में एक महत्वपूर्ण भूमिका को निभाती हैं। आमतौर पर आंखें ठीक होने से ही हम दुनिया के रंगों को अच्छे तरीके से देख पाते हैं और इसके साथ ही अपने जीवन के सभी कामों को आसानी से कर पाते हैं। आप कल्पना कीजिये अगर आपके चारों तरफ अंधेरा ही अंधेरा हो, और कहीं पर भी उजाला न हो, तो सोचिए इस कल्पना मात्र ही आप कितना ज्यादा घबरा जाते हैं, आप इस चीज को सोचने से भी बचेंगे। एक यही कारण है, कि आपको अपनी सेहत के साथ -साथ अपनी आँखों का भी पूरा ध्यान रखना चाहिए, पर कुछ लोगों को इंफेक्शन और ब्रेन से जुड़ी समस्याओं के चलते आँखों से संबंधित परेशानी जैसे कि हेमियानोप्सिया हो सकता है। 

बता दें की यह एक किसम का न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर है, जिसमें एक व्यक्ति आमतौर पर अपनी एक आंख या दोनों आंखों के एक हिस्से की नज़र को खो देता है। दरअसल इसको आम भाषा में आधी नज़र का नुक्सान भी कहा जाता है। इस लेख के माध्यम से डॉक्टर से इसके बारे में विस्तार से जानकारी लेंगे की आखिर हेमियानोप्सिया क्या होता है, और आंखों से केवल आधा हिस्सा दिखाई देने की समस्या किन कारणों से होती है और इसके क्या लक्षण होते हैं?

हेमियानोपिया क्या है?

दरअसल हेमियानोपिया, जिसको हेमियानोप्सिया के नाम से भी जाना जाता है, आमतौर पर यह तब होता है, जब कोई व्यक्ति दिमाग या ऑप्टिक तंत्रिका को नुक्सान पहुंचने की वजह से अपने दृश्य क्षेत्र के कुछ हिस्सों में नज़र को खो देता है। इसमें  व्यक्ति किसी भी चीज को पूरा देखने में असमर्थ हो जाता है। बता दें कि यह स्थिति व्यक्ति की दोनों आंखों की नज़र को परभावित करती है। हर आँख में दृष्टि क्षेत्र का प्रभावित क्षेत्र एक जैसा या फिर बिलकुल अगल हो सकता है और यह इस बात पर निर्भर करता है, कि दिमाग के कौन से हिस्से को नुकसान पहुंचता है। 

आमतौर पर स्ट्रोक या फिर दिमाग की गंभीर चोट लगने के बाद ही हेमियानोपिया की समस्या लोगों में देखी जाती है। आमतौर पर नज़र का नुक्सान हल्का या फिर गंभीर हो सकता है। इस समस्या में किसी भी व्यक्ति को बाएं या दाएं तरफ नज़र का नुक्सान हो सकता है, हालांकि आंखें पूरी तरह से स्वस्थ लग सकती हैं। इसके कारण के आधार पर, इलाज से नज़र में सुधार करना संभव है, पर आमतौर पर हेमियानोपिया के कुछ मामले कभी ठीक नहीं हो सकते हैं। 

See also  Why Should you Not Ignore Optic Nerve Dysfunction and its Symptoms

हेमियानोपिया के कितने प्रकार होते हैं?

वैसे तो हेमियानोपिया के कई प्रकार हैं, जो प्रभावित दृश्य क्षेत्र के स्थान और आकार द्वारा निर्धारित किये जाते हैं। 

हॉमोनीयस हेमियानोप्सिया 

दरअसल हॉमोनीयस हेमिअनोप्सिया में एक ही दिशा में दोनों आँखों की नज़र चली जाती है। आमतौर पर यह दिमाग के विजुअल कॉर्टेक्स या ऑप्टिक ट्रैक्ट में हुए नुक्सान की वजह से होता है। बता दें कि इसकी किस्मों में बाइनेजल या बाइटेम्पोरल हेमिअनोप्सिया और क्वाड्रंटनॉप्सिया को शमिल किया जाता है। 

बाइने जल या बाई टेम्पोरल हेमियानोपिया

  • बाइनेजल : दरअसल बाइनेजल हेमिअनोप्सिया आमतौर पर दोनों आंखों के अंदरूनी हिस्से में नज़र का नुक्सान होता है। 
  • बाइटेम्पोरल : दरअसल इसमें आमतौर पर दोनों आंखों के बाहरी हिस्से में नज़र का नुक्सान होता है। 

दरअसल यह समस्या अक्सर पिट्यूटरी ग्लैंड ट्यूमर या फिर ऑप्टिक चिआज्म पर दबाव की वजह से होती है। 

क्वाड्रंटनॉप्सिया 

आमतौर पर क्वाड्रंटनॉप्सिया में दृश्य क्षेत्र का एक चौथाई हिस्सा प्रभावित होता है, जैसे कि ऊपर बाएं या नीचे दाएं।

हेमियानोप्सिया के लक्षण क्या होते हैं? 

आपको बता दें कि हेमियानोप्सिया आमतौर पर धीरे-धीरे विकसित हो सकता है, या फिर यह अचानक स्ट्रोक या चोट लगने के तुरंत बाद विकसित हो सकता है। हालांकि, कुछ लक्षण हैं, जो हेमियानोपिया का संकेत दे सकते हैं, जिनमें शामिल हैं : 

  1. पढ़ने में दिक्कत होना जैसे शब्दों का आधा हिस्सा न दिखाई देना। 
  2. व्यक्ति की एक आंख या दोनों आंखों के आधे हिस्से से कुछ भी दिखाई न देना। 
  3. व्यक्ति द्वारा चेहरे के आधे भाग को न देख पाना। 
  4. चीजों से टकराकर चलना या बार-बार चीजों से टकराना। 
  5. गाड़ी चलाते वक्त एक दिशा से आती हुई चीजें को न दिखना। 
  6. व्यक्ति द्वारा दिशाओं का ठीक से अंदाजा न लगा पाना। 
  7. व्यक्ति का भीड़ भरे वातावरण में भटक जाना। 

आमतौर पर कुछ लोग नज़र के इस नुक्सान को पहचान नहीं पाते हैं और सोचते हैं, कि उनकी आंखें ठीक हैं, जबकि उनकी यह समस्या दिमाग में होती है। 

See also  क्या प्रकिर्तिक तरीके से आंखों की रौशनी बढ़ाने के लिए डाइट में इन फूड्स को शामिल किया जा सकता है? डॉक्टर से जाने इसके बारे में!

हेमियानोप्सिया के कारण 

आमतौर पर हेमियानोप्सिया का मुख्य कारण दिमाग की दृष्टि से जुड़ी नसों या हिस्सों में नुकसान होना है। 

स्ट्रोक 

दरअसल स्ट्रोक हेमियानोप्सिया के सबसे आम कारणों में से एक है। जब दिमाग के किसी हिस्से को खून सप्लाई नहीं होता है, तो वहां की कोशिकाएं मरने लग जाती हैं, और विजुअल सिस्टम प्रभावित होता है। 

ब्रेन ट्यूमर 

आमतौर पर दिमाग में बढ़ने वाला कोई भी ट्यूमर ऑप्टिक नर्व या विजुअल कॉर्टेक्स पर अपना दबाव डाल सकता है और नज़र का नुक्सान कर सकता है। 

ट्रॉमेटिक ब्रेन इंजरी 

आपको बता दें कि सिर पर चोट लगने से दिमाग की नसों को नुकसान पहुंच सकता है, जिसकी वजह से विजुअल फील्ड में कमी आती है।

इंफेक्शन या सूजन 

दरअसल कुछ न्यूरोलॉजिकल इंफेक्शन या मस्तिष्क में सूजन भी आमतौर पर नज़र को प्रभावित कर सकती है।

सर्जरी के बाद जटिलताएं

कई बार दिमाग के ट्यूमर या स्ट्रोक के लिए सर्जरी के बाद भी हेमियानोप्सिया विकसित हो सकता है।

कुछ सामान्य स्थितियां, जो हेमियानोपिया का कारण बनती हैं

जैसे कि आपको पता है, कि हेमियानोपिया का सबसे आम कारण स्ट्रोक है। हालांकि, ब्रेन ट्यूमर, सूजन और दर्दनाक दिमाग की चोटें भी अन्य संभावित कारण हैं। ऑप्टिक तंत्रिकाओं को कोई भी नुकसान आमतौर पर हेमियानोपिया का कारण बन सकता है। 

यहाँ कुछ कम सामान्य स्थितियां जो की हेमियानोपिया का कारण बनती हैं, उनमें शामिल हैं, जैसे 

  1. मल्टीपल स्क्लेरोसिस। 
  2. लिम्फोमा का होना 
  3. मिर्गी के दौरे पड़ना। 
  4. न्यूरोसिफिलिस। 
  5. अल्जाइमर रोग का होना। 
  6. असामान्य खून की नाड़िओं का गठन होना। 
  7. न्यूरो सर्जिकल प्रक्रियाओं का होना। 

हेमियानोप्सिया का इलाज कैसे किया जाता है? 

इस समस्या की पुष्टि करने के लिए आमतौर पर डॉक्टरों द्वारा विजुअल फील्ड टेस्ट, एमआरआई और सीटी स्कैन किया जाता है। दरअसल हेमियानोप्सिया का उपचार इसके कारणों पर निर्भर करता है। अगर स्ट्रोक, ट्यूमर या चोट इसके पीछे है, तो पहले उन का उपचार किया जाता है। 

  1. विजुअल रिहैबिलिटेशन थेरेपी : इसमें मरीज को दरअसल धीरे धीरे खोई हुई नज़र के साथ तालमेल बिठाना सिखाया जाता है। 
  2. ऑप्टिकल एड्स : इसमें मरीज के इलाज के लिए विशेष प्रकार के प्रिज्म चश्मे या मिरर लेंस का इस्तेमाल किया जाता है। 
  3. ट्रेनिंग और आंखों से जुड़े योग : दिमाग की ट्रेनिंग और आंखों से सबंधित योग करना, जिससे दिमाग बचे हुए विजुअल फील्ड का अच्छे से प्रयोग कर सके। 
See also  उमस बन सकता है आंखों में थकान का कारण, डॉक्टर से जानें इससे बचाव के 5 टिप्स

निष्कर्ष

आंखें हमारे शरीर का सबसे महत्वपूर्ण अंग है, जो हमारे जीवन में रंगों के महत्व को बनाए रखने में एक महत्वपूर्ण भूमिका को निभाती है। आँखों के ठीक न होने पर हम कुछ भी अच्छे से देख नहीं पाते हैं और कोई भी काम नहीं कर पाते हैं, इसलिए अपनी शारीरिक सेहत के साथ -साथ अपनी आँखों का भी अच्छे तरीके से ध्यान रखना बहुत जरूरी होता है। कुछ लोगों को इंफेक्शन और ब्रेन से जुड़ी समस्याओं के कारण आँखों से जुड़ी समस्या जैसे हेमियानोप्सिया सकता है। हेमियानोप्सिया एक गंभीर स्थिति है जो जीवन की गुणवत्ता पर असर डाल सकती है, पर इस की समय पर पहचान और ठीक उपचार से मरीज एक सामान्य जीवन जी सकता है। अगर कोई व्यक्ति अपनी आधी नज़र को खो दे या उसको पढ़ने और पहचानने में परेशानी हो, तो उसको तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। सेहतमंद जीवनशैली, दिमाग की देखभाल और समय-समय पर आंखों की जांच आपको इस प्रकार की जटिलताओं से अपना बचाव करने में मदद कर सकती है। अगर आपको भी आँखों से सम्बंधित इस प्रकार की या कोई और समस्या है, और आप इस समस्या से काफी ज्यादा परेशान हैं और आप इसका इलाज करवाना चाहते हैं, तो आप आज ही मित्रा आई हॉस्पिटल एंड लेसिक लेज़र सेंटर में जाकर अपनी अपॉइंटमेंट को बुक करवा सकते और विशेषज्ञों से इसके बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। 

पूछे जाने वाले सवाल 

प्रश्न 1. क्या हेमियानोप्सिया से आंख की रोशनी पूरी तरह चली जाती है?

नहीं, इसमें नज़र का सिर्फ एक ही हिस्सा प्रभावित होता है, पूरी नज़र नहीं जाती। 

प्रश्न 2. क्या हेमियानोप्सिया का इलाज संभव होता है?

दरअसल हेमियानोप्सिया का इलाज इसके कारणों पर निर्भर करता है। कभी -कभी विजुअल फील्ड लौट सकता है, मामलों में प्रबंधन और थेरेपी से सुधार किया जा सकता है। 

प्रश्न 3. क्या चश्मा पहनने से हेमियानोप्सिया ठीक हो सकता है?

इसके लिए आम चस्मा काम नहीं करता है, पर विशेष प्रिज्म लेंस कुछ हद तक नज़र में सुधार कर सकते हैं।

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